सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह

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सविता भाभी की स्टोरी: सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह, इसी आसान में अंकित ने 10-12 घस्से लगाए और फिर अपना लंड बाहर निकाल लिया.

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हम वहां से चल दिए… मैरिज हॉल में जा कर अलग हो गए, पर नज़र एक दूसरे के ऊपर ही थी. दिल्ली दिसावर दिल्ली सट्टाये तो हम दोनों के हथियारों को एक साथ बिना उफ़ करे दोनों छेदों में ले सकती है.

नीचे लेटे हुए ओमार का लंड जब एक बार फिसल कर गांड को निशाना बनाने से चूका तो सामने बैठे किड ने इस बात की सजा भी नताशा को उसके चूतड़ों पर पांच चपत लगाते हुए दे डाली और फिर अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाल कर उसके मोटे माँसल टोपे द्वारा पांच बार उसके गालों पर भी चपत रसीद कर दी. हिंदी सेक्सी पिक्चर फिल्म मूवीमैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

जैसे ही मैंने पीछे से उनकी गदराई हुई गांड को ठुमकते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए.सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह: मैं भी उसी पलंग पर आ गई, मैं पीछे से वर्षा की चूत में जीभ डालने लगी.

अब जवानी के बादल रीना पर मंडराने लगे और अबकी बार इतना अधिक बरसे कि जैसे रीना की चुत से बरसाती नाला निकल रहा हो.आंटी, भाभी, और लौंडियों के साथ मेरे चुदासे भाइयों को नमस्कार…मेरा नाम आयुष शर्मा है, मैं अन्तर्वासना चोदन स्टोरीज का नियमित पाठक हूँ.

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इसी आसान में अंकित ने 10-12 घस्से लगाए और फिर अपना लंड बाहर निकाल लिया.कुछ पल बाद मैंने अपना हाथ हटाया तो वो लंड बाहर निकालने को कहने लगी, पर मैंने उसकी बात पे ध्यान दिए बिना उसके मम्मों को दबाना जारी रखा.

अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो कल से दिन में तुम भाभी और सोनू की देखभाल कर सको तो बड़ी मेहरबानी होगी. सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह लेकिन मैं लंड कई महीनों बाद ले रही थी इसलिए थोड़ा दर्द हो रहा था और कमल का लंड काफ़ी मोटा भी था.

इसके बाद वो नताशा के गले में पड़े गुलाबी रंग के मखमली स्कार्फ को पकड़ कर उसके गर्भाशय में अपने लंड को घुमाने लगा, और दोबारा अपना अंगूठा उसके मुंह में घुसेड़ दिया.

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एक लंबी कहानी है… पर तुम समझी कैसे कि मैं इस बार जीजू से चुदवा कर आयी?”चाल दीदी चाल… कुंवारी लड़की और चूत चुदाई की हुई लड़की के चाल में मामूली अंतर आ जाता है. मेरे जिस्म का जलवा पूरे गांव में आग की तरह फ़ैल गया और गांव के सारे लड़के मेरे आगे पीछे घूमने लगे. ये सोच कर मैंने अवी से कहा- देखो आस पास कोई बाहर तो नहीं और अपनी कार का दरवाजा खोल दो, जहाँ मुझे बैठना हो और ये लो ताला और मेरे निकलने पर बंद कर देना.

यह हिंदी पोर्न स्टोरी तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के तीसरे साल में था. वो बोली- अब फिर करोगे? इतनी सुबह सुबह?मैंने उसे अपने लंड की ओर इशारा करके दिखाया- इसे देखो, ये जिद कर रहा है!तो वो हंसती हुई बोली- बच्चों की सारी जिदें पूरी नहीं करते… नहीं तो बच्चे जिद्दी हो जाते हैं. जब मेरा दोस्त बाहर आने लगा तो इतने में मैं दूर जाकर बैठ गया जैसे मुझे कुछ पता ही ना हो!दरवाजा बंद करके मेरा दोस्त मेरे पास आया और बोला- तू जा अब!मैं बोला- ठीक है भाई!अब बारी मेरी थी तो मैं अंदर गया और दरवाजा बंद कर लिया.

यह बात नहीं मेरे घर में किसी को पता थी कि मैं अपने पड़ोस से चाचा से व्हाटसप्प पर रात भर बातें करती हूँ. उन्होंने मुझे देखा और हंटर लहराते हुए कहा- चल बहन के लंड, आज तेरी माँ चोदती हूँ. थोड़ी देर बाद महेश ने मुझे सीधा किया और मेरे पैरों को मोड़ कर बीच में बैठ गया.

शुरू शुरू में जोश तो रहता ही है, उसकी नई नई शादी थी और उसने हर तरीके से सेक्स एन्जॉय किया था. तो उसने अपना खुद का नंबर टाइप किया और अपने खुद के मोबाइल मिस कॉल कर दिया.

ये कहानी मेरी पिछली हिंदी पोर्न स्टोरीपैसेन्जर ट्रेन में चूत चोदीके आगे की है.

कुछ देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल कर फिर से एक जोरदार धक्का दे मारा, इस बार आधा लंड अन्दर घुस गया था.

पहले मैं रीना को लेकर अंदर गया और जाते ही उसके कपड़े निकाल कर फेंक दिए और पागलों की तरह उसे नोचने लगा और कभी उसकी गर्दन और कभी उसकी चूची पर लगातार किस कर रहा था और उसने मेरी पैन्ट खोल दी और लंड को आगे पीछे करने लगी. अपनी खुशी चाहना और अपनी इच्छाओं को पूरा करना कोई गलत तो नहीं!मैंने कहा- नहीं. मैंने हथेली का एक कप सा बनाया जिस में मेरी उंगलियाँ नीचे की ओर थी और उससे प्रिया की योनि को पूरा ढाँप लिया.

एक बोतल व्हिस्की की लेकर मैं उन लोगों से मिलने चला गया। बातों ही बातों में पता चला कि वो लोग मेरे ही ऑफिस में इंटर्न बेसिस पर जॉब करते हैं। सबकी उम्र लगभग 22-23 साल होगी। सबसे बात तो मैं कर रहा था. उन दिनों काम की वजह से भाई रात को देर से आते थे और कभी कभी उन्हें अपनी साईट पर 2-3 दिन रहना भी पड़ता था. मैंने सबको अपने हाथों से केक खिलाया और उन सबने भी मुझे अपने हाथों से खिलाया.

मैं- क्या कमी है?अमित- जो क्रीम मैंने दो बार तुम्हें लगा कर मालिश की थी, अपने मम्मों पर यही हफ्ते में 2-3 बार लगाओ और अपने चूतड़ों पर लगाओ.

खुद से घृणा हुई, वो बेचारी मर जाती तो!मेरी किस्मत में किसी को सुधारना तो नहीं लिखा, अब मैं उसे मेरी तरह बिगाड़ूँगी नहीं, नहीं तो सचमुच वो भी मेरी तरह लंड की अधीन हो जायेगी और लंड के लिये तड़पेगी, और कभी ना कभी बेचारी बदनाम हो जायेगी, इसलिये मैं अब मैं उसे किसी भी तरह ने नहीं उकसाती. भाबी को भी मजा आ रहा था, भाबी मेरी पीठ पर हाथ घुमा कर अपना मजा दर्शा रही थीं. मैंने लंड से कंडोम निकाला, भाभी ने एकदम से लंड को मुँह में ले लिया.

जब वो मुझे बूट पहना रहा था तो ना सिराज ने चोदना रोका ना उसके चोदने की रफ़्तार काम हुई. कभी कभी मेरी और प्रिया की नज़र मिल भी जाती तो क्षण भर के लिए… प्रिया की कजरारी आँखों में एक बिल्लौरी चमक और होंठों पर एक गुप्त सी ‘मोनालिसा मुस्कान’ आ कर गुम हो जाती जिसे सिर्फ मैं ही भांप पाता. फिर मनाते हुए कहा- चल मेरा भैया! लेट जा अच्छा भैया!!इरशाद ने उसका एक चुम्बन ले लिया.

!भाभी- हां मेरे राजा, आज के बाद तू ही मुझे चोदेगा और मेरी प्यास बुझाएगा.

माया ने जल्दी से अपना हुलिया ठीक किया, अपना सामन समेटा और पार्किंग की तरफ दौड़ पड़ी. वो ऑफिस आज जल्दी आ गई थी और उस्मान, अमित या सुमित से पहले अपने केबिन पहुँच कर अपनी ब्रा और पेंटी उतार देना चाहती थी.

सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. अंकित ने माया की मैक्सी के अन्दर से हाथ डालते हुए माया के दोनों चुच्चे पकड़ लिए.

सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह मैं भी थोड़ा डर सा गया, फिर मैंने कहा- नहीं हम पहले बिस्तर पे चलकर एक दूसरे को गरम करते हैं, हो सकता है तुम्हारी गांड में सूखा हुआ फेवीकोल पिघल जाए. अब ओमार अत्यधिक उत्तेजित हो तेज आवाज में सिसकियाँ भरते हुए धीरे धीरे अपने टोपे को मेरी पत्नी के मुंह में धकेल रहा था और उसी समय किड ने मेरी गुड़िया के सैंडल उतारने चालू कर दिए.

मैं शाम को काम से आया, अभी चाय पी ही रहा था कि पायल ने मुझे सब बात बताई औऱ मुझे छाया के घर की चाभी दी.

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तभी मैंने कहा- रोशनी तुम्हारी गांड से गुलाब, चमेली और गेंदे की खुशबू आ रही है. अब वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं बिल्कुल पोर्न मूवीज की अभिनेत्री की तरह. थोड़ी देर के बाद जब वो आया तो मैंने देखा उसके हाथ में कंडोम का पैकेट था, उसके बाद उसने वो कंडोम मेरे हाथों में दे दिया और कहा- मेरी रानी इसे अपने राजा को पहना दो.

उसने अन्दर एक रूम दिखाते हुए कहा कि ये मेरा रूम है, जाओ और तैयार हो जाओ. पर जब अपना बॉक्सर उतारने गया तो मीना जी ने मेरा हाथ पकड़ कर, अपनी नशीली आंखें नचाते हुए अपनी मुंडी ‘ना’ में हिलाई. सोमवार तो उसका व्रत हमेशा ही रहता है इसके अलावा एकादशी, प्रदोष और साल में एक बार आने वाले व्रत जैसे जन्माष्टमी, शिवरात्रि, नवदुर्गा इत्यादि न जाने कितने; सब पूरे विधि विधान से ही करती, निभाती है.

रात को मैं अपने कमरे में था, मुझे बाथरूम जाने की जरूरत लगी, मैं नीचे जाने लगा.

ओ भगवान! यह कहाँ ला कर पटका मुझे?’मुझे, मेरे जानने वाले बहुत ही प्रैक्टिकल सोच वाला व्यक्ति मानते हैं लेकिन यह सोच तो हरगिज़ प्रैक्टिकल ना थी. ”तुम? क्या तुम भी ऐसा करते हो?”मैंने अब तक कभी किया ही नहीं तो ऐसे वैसे का सवाल ही नहीं उठता. इधर रमेश एक हाथ से काजल की चूत पर हमला किया जा रहा था और दूसरे हाथ से उसने उसकी एक चुची को संभाल रखा था.

दर्द नहीं हो रहा?मेरे दिमाग में शरारत सूझी और मैं भाभी के पास जाते ही गिरने की एक्टिंग करने लगा. हम स्टेशन पहुँचने वाले थे तो अवी ने मेरा हाथ पकड़ा और किस करके कहा कि कितने दिन के लिए जा रही हो, फिर कब मिलोगी?मैंने बताया कि 20 दिन बाद कॉलेज खुलेगा, तब आ जाऊँगी. चाचा कुछ देर रुक गए और उसके बाद वो मुझे धीरे धीरे चोदने लगे, मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ था तो चाचा मुझे थोड़ा तेज तेज चोदने लगे और जोर के धक्के मेरी चूत में मार मार कर जल्दी जल्दी चोद रहे थे और मैं सिसकारियाँ ले रही थी.

प्रिय दोस्तो, मेरा एक गे दोस्त था शाकिर, गोरा माशूक था, पर बहुत चालाक एकदम कमीना था. यह सारा चुदाई का प्रोग्राम आधे घंटे तक चलता रहा, तब कहीं जाकर मेरा पानी निकला.

और खास कर जब वो बार बार जब अपने नीचे वाले होंठ को खुद ही काट लेती थी तब तो सही में रुकना मुश्किल हो रहा था।रात को वो मेरे सामने की तरफ बीच वाली बर्थ पर सोई थी, और ट्रेन जब हिचकोले ले रही थी और उसके बोबे हिल रहे थे. जब मैं वापिस आया और उसे आँखें खोलने को कहा, वो मुझे देख कर खिलखिला कर हंसने लगी. तो वो मुर्दे की तरह बिस्तर पर पड़ गया। मैं एक तरफ मुँह करके अपनी किस्मत पर रोने लगी। परन्तु यश पर मेरे रोने का कोई फर्क न पड़ा और वो मुँह दूसरी तरफ करके सो गया। थोड़ी देर बाद मैं उठी और बाथरूम जाकर चूत को साफ किया और चूत को रगड़कर पानी निकाला। फिर आकर सो गई।”ओह्ह.

ऐसे ही कुछ दिन और निकल गए और रवि की मदद से मैंने महेश से बात कर ली.

कुछ दमदार शॉट लगे ही थे कि मेरा पूरा माल मामी की चूत में ही छूट गया. सच में बड़ा मजा आ रहा था और जब मेरा रस निकलने को हुआ तो मैंने उससे मेरा लंड मुँह में लेने को कहा तो उसने मेरा लंड से कंडोम उतार कर अपने मुँह में भर लिया और जोर जोर से लंड चूसने लगी. मैंने कभी ऐसा नहीं किया था तो मैंने मना कर दिया, पर संजय मेरी चुत को इस तरह चाट रहा था कि मैं अपने आप पर कन्ट्रोल नहीं कर पाई और मैंने संजय के मोटे लंड को सहलाते हुए मुँह में ले लिया, जिसकी एक्साइटमेन्ट से संजय ने अपनी जीभ मेरी चुत में अन्दर तक डाल दी.

वो मानने को राजी नहीं था।अंततः मेरे लौड़े ने मधु की गाण्ड में अपनी नोक लगा दी। जिदगी में पहली बार मेरे लौड़े ने इतना सुख पाया था। मुझे मधु बहुत हसीन लग रही थी।हम दोनों कुछ देर यूं ही पानी में खेलते रहे और जब वापस किनारे पर आये तो मधु उतर कर चलने को हुई। लेकिन मेरा लौड़ा अब भी तन्नाया हुआ था. यही फायदा होता है लड़कों के साथ में शॉपिंग करने का, बहुत प्यारी ड्रेस खरीद कर लाई हो.

कई भारतीय पुरुष अपनी पत्नी को शादी के बाद जब हनीमून पर ले जाते हैं तो उनकी फैंटसी रहती है कि वह अपनी पत्नी को किसी गठीले बदन के नीग्रो के साथ बिस्तर पर शेयर करें. तुम्हें किसी ने रोका है क्या? और मुझे गांव के अन्दर से होकर ले चलना ताकि मैं सभी लोगों से मिल सकूँ. बॉस ने मेरी गांड को और जोर से मारना चालू कर दिया और मेरी गांड मारते हुए जोर जोर से गाली देते हुए अपने लंड का पानी निकालना शुरू किया.

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एक दिन सुरेंदर भैया ने मुझसे कहा कि उनको 10 दिनों के लिए ऑफीशियल टूर पर जाना है और मैं उनके पीछे उनके घर का ध्यान रखूँ.

वो अगले दिन ही यूपी चले गए। मैं परेशान सी हो गई। मैं सेक्स के बारे में नहीं सोचती थी. मोहन लाल की पत्नी के पिता यानि के मोहन लाल के ससुर भी उसको उतना ही प्यार करते थे, जितना वो उसको करता था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.

फिर मैंने उसके होंठों को ऐसे चूमने लगा जैसे जैसे पूरा भरा आइसक्रीम कोन चूसते हैं. उसने पहले थोड़ी थोड़ी जीभ लगाई, फिर जब उसे लगा कि ये उतना गंदा नहीं है, तो वो जोर जोर से लंड पर लगी क्रीम चाटने लगी. తెలుగు దెంగులాటशराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

दीदी इतना काम करती थी, फिर थक भी जाती थी तो मैंने सोचा कि मैं दीदी को जितना खुश कर सकता हूँ उतना तो करूँ. हाँ, पापा जी… अब बताओ, क्या कह रहे थे आप? बहुत इशारे कर रहे थे?” बहूरानी ने मेरी गोदी में बैठ कर मेरे गले में अपनी बांहों का हार पहना कर पूछा.

आह्ह्ह अह्ह मर गईई!” मैंने कहा- जल्दी अपना काम कर लो, कोई आ जायेगा. कभी कभी दोस्तों और रिश्तेदरों के यहां जाना होता तो बहुत तकलीफ होती रही. मैंने भी उनका दिल रखने के लिए हाँ बोल दी और हम दोनों खाना खाने लगे.

पिंकी पलंग पे चलकर अपनी गुब्बारों जैसे चूतड़ों को रोशनी के मुँह पे रख कर बैठ गई. मैंने बोला- क्या हुआ?उसने बोला- पता नहीं, क्या मैं तुम्हारे गले लग सकती हूँ?मैंने बाँहें फैला कर बोला- ज़रूर…उन्होंने मुझे हग कर लिया. मैंने कुछ नहीं कहा तो उसने चॉकलेट मेरे होंठों पर फिराई और बोली कि कैसी है?मैंने कहा कि मुँह में तो गई ही नहीं.

भाभी एक हफ्ते के लिए मेरे पास रुकी हुई थीं, उस दिन भैया रुके फिर अगले दिन चले गए.

यह सब करने के बाद वो शादी में गये और फटाफट चाट टिक्की खाकर घर आ गए. जब मैंने पीछे से देखा तो गीली मैक्सी से चाची की काली पेंटी साफ चमक रही थी.

कुछ मिनट के बाद जब मैं वापस आया, तब मैंने देखा कि रजनी सोफे पर सो गई थी. नाभि में जीभ घुमाते हुए मैं अपने हाथ उनकी कमर पर बंधी साड़ी की गांठ पर ले आया और ज़ोर से उनकी साड़ी की गांठ को पकड़ कर खींचा तो साड़ी एक झटके के खुलकर नीचे गिर गई. कुछ मिनट तक भाभी के मम्मों को चूस कर मैं नीचे भाभी की चूत की ओर बढ़ने लगा.

जब अपने ऑफिस पहुंचा तो ज्यादा काम भी नहीं होने से और कुछ तबियत भी ख़राब होने से, मैं कुछ घंटे ही रुका और जल्दी घर आ गया. कुछ दिन रहने के बाद उनसे थोड़ी बातचीत बढ़ी, वो लोग भी बहुत अच्छे स्वभाव के थे. ” कहते हुए माया ने अंकित का लंड अपनी चुत पर सैट किया और धीरे धीरे नीचे होने लगी.

सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह मैंने कहा- अभी कैसे बुला सकती हूं उसे? वो पापा का मोबाइल दिखा कर बोली- अभी कॉल करके बुलाओ प्लीज दीदी. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

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तो उसने भी मेरी तरह मोना को उलटा कर लिया, जिससे उसकी गांड अब राहुल के सामने थी. अभी लंड पेला भी नहीं था कि वो मादक सिसकारियां लेते लेते फिर से झड़ गई. मैं ट्रेन में ऊपर वाले बर्थ पे चढ़ गया और मेरा नसीब भी इतना अच्छा कि वह ठीक मेरे सामने वाले बर्थ पे बैठ गयी और मैंने उसे घूरा और उसने मुझे देखा और स्माइल दे दी.

इतने में मैंने महसूस किया कि दो लड़कियाँ जो उम्र में मुझसे छोटी लग रही थी, मुझे परेशान करने लगी, वो कभी मेरे ऊपर पानी डाल देती तो कभी एक दूसरी को धक्का मार कर मेरे ऊपर गिराती और फिर मेरे ऊपर हंसती. मैं भाभी की गांड में सटासट धक्के दिए जा रहा था और वो छटपटा रही थीं. सेक्स रिकॉर्डसंजय शर्मा, वो अमृतसर से है, उसका ट्रान्सफर दिल्ली में हुआ है और बेचारे के कोई रिश्तेदार भी यहां नहीं हैं, तो वो मुझसे रहने के लिए कोई ठिकाने लिए पूछ रहा था.

वो योग गुरू आनन्द मेरी बीवी मोना के होंठों के रस को पी रहा था और मेरी बीवी के हुस्न की दावत उड़ा रहा था.

वो मेरे कमरे में आई और चुपचाप चादर तकिया रजाई ले गई; टीवी वाले कमरे में सो गई. फिर हम दोनों हंसने लगे, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा ली और ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा.

अब तक बहुत देर हो चुकी थी, सो मैंने उसको कपड़े पहन कर तैयार होने को कहा. मैंने बहुत बारीक लाइन वाली पैंटी पहनी थी जिसमें सिर्फ पुसी की लाइन छुपे, तो मेरे पुसी के बाल थोड़ा बड़े थे, वो भी दिख रहे थे।मैं बाहर निकलने में शरमा रही थी तो भाभी ने बोला- चलता है आरती, यहां कोई नहीं, सिर्फ लेडीज़ हैं और पापा लोग!जैसे ही मैं बाहर निकली और कपड़े जहां रखे थे, वहां पहुंची तो वहां कपड़े वाला बैग नहीं था।मैंने भाभी को आवाज लगा दी- भाभी कपड़ों का बैग नहीं है. तो एक दिन जब मुझे ठीक लगा मैंने सानिया से पूछ ही लिया- मैंने उस दिन ट्रेन में जो भी किया तुम्हारे साथ… तो तुम्हें वो बुरा लगा था क्या?मेरे इस मेसेज से फिर 2 दिन तक सानिया का कोई जवाब नहीं आया।फिर तीसरे उसका मेसेज आया- गुड मॉर्निंग!तो मैंने फिर वही बात पूछ ली.

वह बोली- क्या देख रहे हो?मेरे मुंह से निकल पड़ा- एकदम पटाखा माल देख रहा हूँ!वह बोली- अच्छा!मैं- हां जी, क्या माल लग रही हो! क्या किया इतने दिन में!वह- कुछ खास नहीं!फिर मैंने उसे डांटना शुरू कर दिया- कितने टाइम से रुक कर इन्तजार कर रहा हूँ.

मैंने काफी सोच कर कहा- मुझे चाहिए कुछ नहीं है, लेकिन किस थोड़ा मुश्किल काम है और ये मैं कैसे करवा सकती हूँ, वो भी कमर पर?अमित- सोच लो यार. क्योंकि उस वक्त मेरी एक गर्लफ्रेंड थी और मैं उसी के साथ काफी व्यस्त रहता था. ”हम बातें कर ही रहे थे कि तभी हीरो झड़ गया और उसका वीर्य हिरोईन ने अपने मुँह में भर लिया.

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अमित- ठीक है फिर अभी अवी तुम्हें कॉल करके बताएगा, फिर मैं बात करता हूँ. हम सभी स्टाफ में अच्छी दोस्ती थी और हमारे ब्रांच मैंनेजर भी बहुत अच्छे थे. जब मैं वापिस आया और उसे आँखें खोलने को कहा, वो मुझे देख कर खिलखिला कर हंसने लगी.

मम्मी ने पूछा- क्या हुआ? तबियत नहीं सही है क्या?तो मैंने बोला- नहीं, वो सपना देख रहा था तो डर गया!माँ बोली- कोई बात नहीं, खाना खाकर मेरे पास ही सो जाना यदि डर लग रहा हो तो!मैं बोला- नहीं माँ, अब ठीक है!और खाना खाने लगा. भाभी बोलीं- अच्छा तो बताओ क्या अच्छा है मुझमें?मैंने कहा- आप में बहुत कुछ है. तभी थोड़ी देर में मेरा शरीर भी अकड़ने लगा और मैंने धक्के और तेज कर दिए और उसकी चूत में ही झड़ गया.

मैं भाभी के मुंह से चुदाई की सीधी ब्लू फिल्म का आडियो टेप सुन कर लंड सहलाने लगा था. मैंने एक पल के लिए प्रिया की ओर देखा। सामने से आते किसी वाहन की हैडलाईट के नीम उजाले में प्रिया की कजरारी आँखों में वही बिल्लौरी चमक और गुलाबी होंठों पर वही जानी-पहचानी मोनालिसा मुस्कान दिखी।हम दोनों एक दूसरे से कुछ बोल तो नहीं रहे थे लेकिन मौन सम्प्रेषण चालू था. इस बार मैंने ताकत से झटका दिया और मेरा 4 इंच उसकी गांड में रगड़ता हुआ घुस गया.

उसने मुझे देखा, मैंने भी उसे देखा, उसका ध्यान बाजू में गया और वो समझ गया. उसने कुछ कहा नहीं, बस मेरी तरफ मुड़ गई, मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया.

ये स्टोरी मेरी एक दोस्त ने लिख कर मुझे दी है ताकि मैं इसको अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवाने के भेज दूँ.

पर मैं नहीं माना और बार बार उसके साथ छिप कर उसके साथ चूमा चाटी और कुछ मर्दन का मजा ले रहा था. मद्रासी सेक्सी मूवीमैंने बहूरानी का हाथ पकड़ के अपने पास खींचा और पहले तो पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत की जो दरार दिख रही थी, उसमें उंगली फिराई, फिर बहू की पैंटी थोड़ी सी साइड में सरका कर उसकी नंगी चूत की दरार में उंगली फिराई और फिर चूत को चूम लिया. ब्राह्मणी माता फोटो hdचाची मेरे लंड की तरफ मुँह करके लेट गईं और मेरा सर पकड़ कर अपनी चुत पर लगा दिया. अब मै ज़ोर ज़ोर से चाची को चोद रहा था और चाची के चूचे किसी बॉल की तरह ऊपर नीचे होते जाते थे.

कभी वो मुझे मस्ती में मार देती तो कभी मैं मस्ती में उसके जिस्म में हाथ फिरा लेता था.

और उनके लंड को अपने दांतों से इतने जोर से काटा कि वो जोर से आह करते ही उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरे रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?पूरी कहानी सुन कर मजा लीजिये. मैंने उससे हाथ मिलाया और कहा- इतने लम्बे हो, झुकने में प्रॉब्लम होगी. मैं फिर रुक गया, कमरे में गया, मैंने देखा कि कामिनी विवेक की बांहों में बेशर्मों की तरह लेटी थी, उसने अलग होना भी ठीक नहीं समझा.

उसने झट से मेरी और देखा और बोली- ये क्या कर रहे हो तुम?मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही हमारा नंबर आ गया और हम दोनों एक साथ एक झूले पे बैठ गए. मैंने लंड से कंडोम निकाला, भाभी ने एकदम से लंड को मुँह में ले लिया. सो अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और रात की बात सोचने लगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि यश मुझे चोद ही न पाए। यह सोच कर ही डर सा लगने लगा। फिर खुद को समझाया कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है आज मेरी चुदाई अच्छी होगी और सोचते हुए सो गई। शाम को उठी.

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अगले दिन उसका कॉल आया और मैंने उसका कॉल नहीं उठाया क्योंकि मैं उससे बहुत गुस्सा था. हमें चूसो, खा जाओ!मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स चाटने लग गया और उसने मेरी शर्ट निकाली और मेरे नंगे बदन को चाटने लग गई. तभी मेरे शैतानी दिमाग़ में आज की रात को यादगार बनाने का एक आइडिया आया.

पर रोशनी ने कहा- सुबह फिर वापस आना पड़ेगा और अगर तुम चाहो तो आज रात मेरे घर ही रुक सकते हो।मेरी तो जैसे लाटरी निकल गई.

मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मार दिया.

[emailprotected]भाई बहन सेक्स कहानी का अगला भाग :कंजरी मंजरी की पहली चुदाई-2. और जोर से चोदने की मांग करते हुए मेरी पीठ में अपने नाखून चुभाने लगी. सेक्सी फिल्म हिंदी अंग्रेजीखैर अब मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी और अब वो और मैं बिल्कुल नंगे थे.

वो भी मेरा नाम सुन कर खुश हो गई और धीमे स्वर में बोली- हां हां आलोक जी, क्या हाल हैं. हम दोनों चुदाई में एक दूसरे के साथ डूबे हुए थे, हमें दुनिया की कोई फ़िक्र ना थी. अब वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं बिल्कुल पोर्न मूवीज की अभिनेत्री की तरह.

अब श्री चूत चुदाई के लिए पूरी तैयार थी, मैं पहले से तेज़ धक्के लगाने लगा और अब वो भी स्मूच करने लगी. दूसरों के सामने की तो बात ही क्या, जब कभी हम अकेले भी होते तो बहूरानी हमेशा अपने सर पर पल्लू डाल के नज़र नीची करके मुझसे सम्मान से बात करती; उसने कभी भी मुझे यह बात जताई नहीं कि वो मेरी अंकशायिनी भी है.

मैंने उसे कोई क्रीम लाने को कहा और उसे उसकी गांड पर अच्छी तरीके से क्रीम को मला और उसे अच्छे तरीके से सहलाया.

मैंने भाभी को आवाज़ दी- जानेमन बाहर तो निकलो… हम दोनों साथ में खाना खाएंगे. मुझे तो पता ही था कि मुझे क्या देखना है और मैं पहले एक बार देख भी चुकी थी तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. विवेक ने उसकी टांगें फैला कर अपने लंड को उसकी खुली चुत में घुसा दिया और झटके पे झटका देने लगा.

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डॉक्टर अच्छी थी, उसने नेहा की तकलीफ समझी और मदद के लिए तैयार हो गई।लेकिन डॉक्टर ने बातों बातों में नेहा के घर का पता और फोन नम्बर पूछ लिया. थोड़ी देर के बाद वो मेरे पास आ कर मेरे कंधे पे अपने कंधे मार के मैरिज हॉल की सीढ़ियों पर चढ़ गईं. फिगर का नाप कितना है, वो तो मैंने कभी टेप लेकर मापा नहीं है, पर ले देकर कहा जाए तो वो बहुत खूबसूरत है.

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रोशनी बड़ी खुश हुई और पिंकी भी खुश थी क्योंकि उसके चुचे मैंने चूस लिए थे. यह सुनते ही उन्होंने मुझे फ़िर से पकड़ लिया और मुझे स्माइल देते हुए किस करने लगीं. आपको मेरी गरम कहानी अच्छी लगी या नहीं, मुझे मेल ज़रूर करें ताकि मैं अपनी अगली गर्म कहानी भी आपके सामने ला सकूं.

उसने कुछ कहा नहीं, बस मेरी तरफ मुड़ गई, मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया. मेरा मन अब बहकने लगा था, मैं अपने पर काबू नहीं रख पा रहा था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मन कर रहा था कि भाभी को अपनी बांहों में ले लूँ और उनकी चुचियों को मसल दूँ.

एकदम दूध जैसी सफेद गेंदें देखते ही मेरा लंड अपना संयम खोने लगा और धीरे धीरे मेरा लंड खड़ा हो गया.

अपना हाथ मैंने उनकी मैक्सी में डाल दिया तो देखा कि उन्होंने पेंटी नहीं पहनी थी. मुझे ये तब पता चला जब वो मेरे ऊपर लेट कर मेरे चुचे चूस रहा था और उसका डंडा मेरी जाँघों में घुस रहा था. मैंने उसके होंठों पर होंठ रख कर काफी देर तक उसे चूमा चाटा, फिर उसका टॉप उतार दिया और ब्रा के नीचे से उसकी चूची निकाल कर चूसने लगा, वो कामुकता वश सिसकारियाँ भरने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…मैंने अंजलि का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा तो उसने शर्मा कर अपना हाथ पीछे खींच लिया.

फिर मैं उसे किस करता रहा… अचानक एक जोर का झटका दिया और वो जोर से चिल्ला उठी. कुछ देर बाद मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया और अब मैं नीचे और वो मेरे ऊपर थी. मैंने कह- भाभी, आप इसे मुँह में लेकर प्यार करोगी?वो बोलीं- नहीं ये सब मुझे पसंद नहीं है जानू.

मैंने उसे देखा तो उसकी आँखों में आंसू थे, पर होंठों पर एक मुस्कान थी.

सेक्सी बीएफ दो हजार अट्ठारह: जैसे ही राहुल उसके नजदीक आया, जोया ने उसके लंड को आजाद कर दिया और तुरन्त उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया. वो बार बार ऐसे करने लगा और मुझसे बोला- देखो, तेरे गांड की पॉटी मेरे लंड पर लगी है.

दीदी की चूत ने मेरा वीर्य सोख लिया था, पर वह इतना ज्यादा था कि चूत से बह कर बेड पे गिर रहा था. उसकी चूत एक सूरजमुखी के फूल जैसी खुल गई और मेरे तने हुए लंड की तरफ देखने लगी. राहुल ये गेंदे की महक किसकी है?”मैंने अपना लंड उसके मुँह पर रख कर कहा- एक बार चूस कर देख लो अपने प्यार को.

कुछ देर बाद ही उसने फिर से मेरा सर पकड़ा और मेरे सर को अपने बुर में दबाने लगी.

तो देखा उसने अपनी पैन्ट उतारी हुई थी और अपने लण्ड को मुठिया रहा था। मुझे देख कर उसने झट से पैन्ट पहन ली।मैं- यह क्या कर रहे हो?वो चुप रहा. मन कर रहा था कि अभी बहू के लबों को चूम लूं मैं… लेकिन मैंने सब्र किया… मन में मैंने सोचा कि अभी कुछ देर मैं इन लबों को चूम लेने की लालसा को मन ले लिए तड़पता रहूँगा, इस तड़प में मुझे और ज्यादा आनन्द मिलेगा. चलो बेटा, बत्ती बुझा दो, फिर सोते हैं!” मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और लेटते हुए कहा.