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मैं ये सोचने लगी।मेरी इस सच्ची घटना पर आप सभी के सभ्य भाषा में विचारों का स्वागत है।[emailprotected]yahoo. माना कि तुमने ऐसा नहीं किया, पर तुमने मुझे उससे ज्यादा दिया है और तुम उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और आनन्द देने वाली लगती हो।यह कहते हुए मैं उसके होंठों का रसपान करने लगा. आज वो ही आजमा ले शायद तेरी परेशानी भी ख़त्म हो जाएगी और चूत को आराम भी मिल जाएगा।दीपाली- आप सही बोल रही हो.

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विकास दीपाली के पास लेट जाता है और उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगता है।तभी दीपाली करवट लेती है और उसकी गाण्ड विकास के लौड़े के सामने हो जाती है।विकास उससे चिपक जाता है और लौड़ा उसकी जाँघों के बीच फँस जाता है।विकास अब दीपाली से चिपका हुआ उसके मम्मों को दबाने लगता है।थोड़ी देर में दीपाली वापस करवट लेती है और अबकी बार एकदम सीधी सो जाती है।विकास का लौड़ा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।विकास- मेरी जान. ई…’श्रेया की मस्ती को देख कर मेरी मस्ती भी दुगनी होने लगी थी।श्रेया की सिसकारी हर पल बढ़ने ही लगी थी उसके साथ ही मेरे लण्ड की गति भी बढ़ती जा रही थी।‘आहहह… आहहह… उई. तुम सुन्दर हो, इस बात का ही हर एक दीवाना होता है,ये सुंदरता गर चली गई तो फिर तो पछताना होता है,कब तक सम्भालोगी यौवन को, इसको ढल जाना होता है!.

उम्र के साथ बढ़ गए होंगे।अनुजा- अरे पगली तू उम्र की बात करती है तुम से कम उम्र की लड़की के मम्मों को तुझ से बड़े मैंने देखे हैं अब क्या कहेगी तू?दीपाली- सच्ची दीदी. एंड यू?उनसे मेरी सारी चैट अंग्रेजी में हुई पर मैं उसको हिंदी में लिख कर आपके सामने जस का तस रख रहा हूँ।मैं- मैं आपसे छोटा हूँ मेरी उम्र 18 वर्ष है और मैं भी दिल्ली से ही हूँ।मैम- ओके. जिसकी वजह से वो काफी रिलैक्स फील कर रही थी।मैंने फिर उसके चूचों को जैसे ही छुआ तो उसने ऑंखें खोलीं और मेरी ओर प्यार भरी निगाहों देखते हुए कहने लगी- आई लव यू राहुल.

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होगा ये बोलो अब तुम्हारी तबियत ठीक है न?फिर उधर से कुछ कहा गया होगा जिसके जबाव में माया ने कहा- अच्छा चलो.

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और मेरे होंठों पर एक कुटिल मुस्कराहट आ गई।साक्षी भी मुस्कराते हुए मेरी बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठ गई।मेरी पीठ पर साक्षी के भारी चूचे चिपके हुए थे, हर झटके पर पड़ने वाली रगड़ मेरे शरीर में सनसनी पैदा कर रही थी. तो उसने मुझे उठाने के लिए कंधा पकड़ा और हिलाया, पर मैं कहाँ उठने वाली थी।उसने ज़ोर से हिलाया, पर मेरा इरादा तो कुछ और ही था और जब वो थक गया और हार मान कर जाने ही वाला था कि तभी मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख कर उठीं और ज़ोर से एक तमाचा मारा और कहा- ये क्या कर रहा है बे?तो वो रोने लगा और कहने लगा- मैंने कुछ नहीं किया. जिसकी कुछेक बूँदें मेरे पेट पर गिर चुकी थीं।उसको इतना मज़ा आ रहा था कि बिना चूत में कुछ डाले ही चरमोत्कर्ष के कारण स्वतः ही उसकी चूत का बाँध छूट गया और उसका कामरस मेरे पेट पर ही गिरने लगा।और देखते ही देखते माया ने निढाल सा होकर पलंग पर घुटने टिका कर.

तब मेरा भी मन कुछ करने को करता था और ऊपर से मैं ये अन्तर्वासना साईट रोज पढ़ती थी और मेरा भी अब चुदाने का मन करता था।कभी-कभी रात को पोर्न मसाला देख कर पैन्टी गीली हो जाती थी. पर दर्द खून बहाने वाली लड़कियों की तरह ही होता है।मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मैं इस मामले में अनाड़ी जो था कि ‘एक्सपीरिएंस होल्डर’ के साथ चुदाई करने पर चलो कुछ तो ज्ञान प्राप्त हुआ. शायद उसके पति ने उसका फ़ोन बंद करवा दिया।तब से आज तक मैं सोचता हूँ कि काश कोई मुझे फिर ऐसे ही मिल जाती तो ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत हो जाती.

अलग-अलग तरीके से चुदवाती थीं।मामी का यह चूत देने का एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भुला पाऊँगा।यह मेरा सच्चा अनुभव है।.

बीते सालों में मैंने इस मंच पर लिखी सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं आप लोगों के सामने अपनी कहानी लेकर आया हूँ. अब मैं बैठ गया और पायल मेरी गोद में मेरे लण्ड पर आकर बैठ गई और मैं उसकी चूची पीने लगा।काफी मज़ा आ रहा था. मैं बस झड़ने ही वाली थी कि मेरा बच्चा जग गया और रोने लगा।मैंने सोचा कि अगर मैं उठ गई तो दुबारा बहुत समय लग सकता है इसलिए अमर को उकसाने के लिए कहा- तेज़ी से करते रहो.

जिससे वो भी मस्तियाने लगी और उसके मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं- आआअह्हह्हह ऊऊह्ह्हुउउउउउउहु ऊऊओह्हह. मेरे मेल पर इसी तरह अपने सुझावों को मुझसे साझा करते रहिएगा।पुनः धन्यवाद।मेरी चुदाई की अभीप्सा की मदमस्त कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]. मुझे बाजार जाना है एक जरूरी काम है।अनुजा ने एक गोली दीपाली को दे दी और जाने लगी।दीपाली- नहीं दीदी आप यहीं रहो ना प्लीज़…अनुजा- अरे पगली बस अभी जाकर आती हूँ कुछ समान लाना है.

तुम तो बहुत अच्छे से मुझे जान चुकी हो कि मुझे गर्म चाय और उसको पिलाने वाली दोनों पसंद हैं।फिर हम दोनों ने चाय पी और कुछ देर बैठे ही बैठे एक-दूसरे को बाँहों में लेकर प्यार भरी बातें करने लगे जिससे कुछ ही देर में माया फिर से गर्माते हुए बोली- राहुल मैं सोच रही हूँ जैसे मैंने शादी की पहली रात को तीन-चार बार किया था. वो शांत चित्त हो कर लेटी हुई थी।मैं उसकी आँखों में और वो मेरी आँखों में देख रही थी।मेरे मन का शैतान पूरी तरह से जाग चुका था.

उसने अपना बदन ढीला छोड़ रखा था और वो टीवी भी नहीं देख रही थीं।मैंने मौक़ा देख कर एक हाथ उसके कूल्हे पर रखा और धीरे-धीरे हाथ उसकी पीठ पर से उसके ब्रा के हुक पर ले गया और धीरे से दबा कर हुक खोल दिया।मामी ने मेरे सर पर हाथ मारा- शैतान. फिर जब दोनों के झड़ने का समय आया तो हम असली तरीके पर आ गए और मैं उसके ऊपर लेट कर धबाधब धक्के मारने लगा और इस तरीके में मैं आराम से उसकी चूची चूस और दबा रहा था और जहाँ तक मेरा अन्दाज़ा है. तो उसने हाथ देकर बाइक रोकी और बोली- आज लिफ्ट के लिए नहीं पूछोगे?मैंने कहा- आप बैठती ही कहाँ हो…वो बोली- लो, आज मैं बैठ जाती हूँ।वो मेरी बाइक पर बैठ गई।हम लोग कॉलेज आ गए।कॉलेज की छुट्टी के बाद वो मेरे पास आई और बोली- राहुल तुम चल नहीं रहे…मेरे सभी दोस्त आँखें फाड़ कर देख रहे थे।देखने वाली बात जो थी।वो अपने आप में कयामत थी, हर बंदा उसे पटाना चाहता था.

जिसकी वजह से वो काफी रिलैक्स फील कर रही थी।मैंने फिर उसके चूचों को जैसे ही छुआ तो उसने ऑंखें खोलीं और मेरी ओर प्यार भरी निगाहों देखते हुए कहने लगी- आई लव यू राहुल.

तुमने ही एकदम से निकाल दिया।वो बोली- मुझे क्या पता था कि तुमने चड्डी नहीं पहनी और ये भी धीरे से नहीं खड़ा हो सकता था?ये कहते हुए उसने मेरे लन्ड को पकड़ कर मरोड़ दिया। अब मेरी बारी थी ‘आऊऊऊऊउ’ करने की. दीपाली अभी चुदाई के लिए तैयार नहीं है… कहीं जल्दबाज़ी में बना बनाया काम बिगड़ ना जाए।विकास- अरे मेरी प्यारी अनु. पर पलट कर पीछे का सीन देखा तो दंग रह गए।राज मेरी बीवी का ब्लाउज और साड़ी उतार कर उसके मम्मों से खेल रहा था।इधर मेरे हाथ भी उसकी बीवी के मम्मों पर थे।हम चारों एक-दूसरे को देख कर चुपचाप खड़े रहे।अचानक राज हंसने लगा और बोला- अरे भाई राहुल.

बस रंग ही तो लगा रहा हूँ।वो कुछ बोलती इससे पहले उसने रंग लगाने के बहाने उसका मुँह दबा दिया और मैं बाहर आ गया।इसके बाद वो डर गई और कहने लगी- मुझे छोड़ दो. जैसे ही मैं लंड के और करीब गई तो मुझे वहाँ से कुछ गंदी बदबू आने लगी और मैं वापिस पीछे हटी।तब आनन्द बोला- क्या हुआ?मैं डरते हुए बोली- बहुत बदबू आ रही है.

और आप मेरी ही बस से जाती हो ना?मैंने कहा- हाँ।तो उसने कहा- क्या आप मेरा फोन थोड़ी देर के लिए अपने पास रख सकती हो?मैंने बोला- हाँ… क्यों नहीं. यह सुन कर उसे कुछ तसल्ली हुई, फिर मैंने उसे पानी पिलाया और कुछ देर बाद वो हिम्मत करके उठ कर बैठ गई और मेरे गले में बाँहें डाल कर मुझसे लिपट कर बोली- जिस तरह आपने मुझे इतने प्यार से सम्भाला है. अगले कुछ ही पलों में मेघा और मेरे कपड़े चिथड़ों जैसे इधर-उधर पड़े थे।लैपटॉप पर अब भी वो लड़की लौंडे का लण्ड अपनी चूत में लिए इतरा रही थी।इधर जैसे ही मैंने मेघा के उरोजों को छुआ तो लगा कि उसकी चूचियाँ बिल्कुल तन चुकी हैं और मेघा ने खुद उठ कर मेरे मुँह में अपनी चूची डाल दी।मैं जोर-जोर से चूसने लगा.

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जब मेघा उतर जाती और बस भी लगभग खाली हो जाती तो मैं रूचि के बगल में आकर बैठ जाता ताकि अंकिता की बातें जान सकूँ, लेकिन मुझे अच्छी तरह से पता था कि रूचि एक नंबर की चुप्पा है.

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तो कल तुझे पक्का एक प्यारा सा गिफ्ट लाकर दूँगा और आज के बाद तुझे कभी परेशान नहीं करूँगा।मुझे तो इसी मौके का इन्तजार था, मगर ऐसे सीधे ‘हाँ’ बोल देती तो गड़बड़ हो जाती। पापा ने रात भर चोद कर मुझे ऐसी रंडी बना दिया था कि आइडिया अपने आप मेरे दिमाग़ में आ गया।रानी- ठीक है भाई. तब कहा भी नहीं कि तू मुझसे प्यार करती है।वो बोली- तुझे तो बचपन से ही पता है ना कि मैं तुझसे कितना प्यार करती हूँ। लेकिन क्योंकि कुछ नहीं हो सकता था इसलिए मैं मन बना चुकी थी। फिर भी मैं तेरे फेरों में रो रही थी और इसी कारण ज़्यादा देर तक ही मैं तेरे फेरे भी न देख पाई। फिर तेरी जिन्दगी में बीवी आ गई. 70 साल सेक्सी वीडियोफिर हम दोनों एक-दूसरे को फिर से चूमने लगे।यह मेरा पहला मौका था जब मैंने किसी महिला को इतनी करीब से देखा था.

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दिन ऐसे ही बीत गया।छुट्टी के बाद प्रिया को लेकर वो घर की तरफ जाने लगी।दीपाली- हाँ तो अब बता तूने क्या सोचा?प्रिया- सोचना क्या था मेरा तो अब भी वही जवाब है कि हाँ. तब तो ऐसा नहीं हुआ था?तो वो बोली- इस समय पैन्टी नहीं पहनी है और उस समय पैन्टी पहन रखी थी।मैंने बोला- हम्म्म. उतना कर लें।उसने मेरा साथ दिया और उसकी बुर बिल्कुल खुल कर सामने आ गई।उसकी बुर का किनारा और उसके अन्दर का रास्ता खुल गया जिससे कि अब मैं आराम से बाल निकाल सकता था।मैं धीरे से उसके बाल साफ करने लगा।उसको भी अच्छा लग रहा था क्योंकि वहाँ पर साबुन या झाग मैंने पोंछ दिया था.

उफ़ ऐसे ही शुरू हो गई तू आहह…दोस्तो, इसी पल सोनू खिड़की से अन्दर आया था और आपको बता दूँ वो रसोई की खिड़की थी. ?मेरा उत्तर ‘नहीं’ में था।फिर उसने आँख मारते हुए मुझसे पूछा- तुम्हें मुझमें सबसे अधिक क्या अच्छा लगता है?‘तुम्हारे मम्मे मुझे बहुत पसंद हैं. जानू तुमने अंदर तो नहीं डाला था ना?उधर से आवाज़ आती है- नहीं बेबी, डाला था… अंदर पूरा गहराई तक डाला था, तभी तो तुम्हारी चीखें निकली थी.

तो कुछ बात होने के बाद उन्होंने मुझे अपनी फ़ेसबुक आईडी दी और फिर हमने फेसबुक पर चैट चालू की।अब चैट करते-करते एक दिन हम दोनों ने नम्बर भी साझा किए और फिर व्हाट्सएप पर भी बात हुई।कुछ दिन बात हम ऐसे ही बात करते रहे।एक दिन उन्होंने बोला- मुझे आपसे मिलना है।मैंने- ओके.

पर मैंने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा है, प्लीज़ मेरा उद्घाटन करवा दीजिए।मामी हँसी- तो तूने आज तक कभी नहीं किया ना. लेकिन उससे पहले ही रजनीश ले आया।रजनीश टेबल पर खड़ा हो गया और विभा रसोई में चली गई।रजनीश अपना काम कर रहा था लेकिन बाथरूम का फर्श गीला होने के कारण टेबल डगमगाने लगी।तभी रजनीश ने विभा को आवाज़ दी- विभा भाभी.

लग रहा है कि बस में तुम्हारे पीछे वाले ने चोद कर माल छोड़ा है?मैं क्या कहती, पर सुनील से बोली- साले ने अपना रस तो निकाल लिया और मेरी चूत को प्यासी छोड़ दिया।सुनील ने मेरी तरफ प्यार से देखा।अब तक की कहानी कैसी लगी, मुझे ईमेल जरूर करना।. जोर से और आजह्ह्ह् उम्म्म्म्म इइइइइ।अब मैंने अपने कपड़े उतार कर उसकी चूत को हाथ से सहलाने लगा।उसकी चूत एकदम साफ़ थी. कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तेरे जैसी कमसिन कली के नाज़ुक होंठ मेरे लौड़े पे लगेंगे।दीपाली को कुछ होश नहीं था.

तो मैं बाहर अजहर को देखकर चौँक गया था।जैसे ही अजहर ने मुझे देखा तो उसने मेरे बाजुओं को जोर से पकड़ा और एक कोने में ले गया।उसने मुझे गाल पर चुम्मा लिया और कहने लगा- अकेले-अकेले मजे कर लिए. और लड़की को ज्यादा मजा नहीं दे पाओगे।लेकिन दोस्तों लड़के का पहेला फर्ज़ लड़की को तृप्त करना होता है और खास करके शादीशुदा औरत के लिए तो ये जिम्मेदारी और भी अधिक ढंग से निभानी चाहिए।दोस्तो, आप जितने भी काम से क्यों ना थके हों. मेरा बहुत मन कर रहा है कि तेरे मम्मों का रस पिऊँ मगर ये मैंने किसी और को देने का वादा किया है।आख़िर की लाइन अनुजा ने धीरे से बोली ताकि दीपाली सुन ना सके।दीपाली- दीदी आहह.

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मैंने अपना लौड़ा एक झटके में पेल दिया और 15 मिनट तक जम कर चुदाई की।वो एकदम से अकड़ गई और झड़ गई फिर कुछ ही धक्कों के बाद मैं भी झड़ गया।वो पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी।फिर मैं अपने बिस्तर पर कपड़े पहन कर सो गया।कुछ देर बाद जतिन आया उसे लगा कि मैं सो गया हूँ, उसने निशा से पूछा- इसने कुछ ग़लत तो नहीं किया तुम्हारे साथ?वो बोली- नहीं. तुम अब मुझे वो करने दो, जिसके बाद तुम आज की मुलाकात कभी नहीं भूलोगी।ऐसा सुन कर वो कातिलना मुस्कान के साथ बिस्तर पर लेट गई।मैंने उसके पैर के अंगूठे को चुम्बन किया और अपने मुँह में लेकर किसी लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया।उसकी सिसकारी छूट गई ‘आआआअहह. उसका लंड मेरे गले में उतर गया, मेरी साँस रुक गई।मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे।तब उसने लंड बाहर निकाला.

मैं तो बस तेरी भलाई ही चाहती हूँ।अनुजा ने दीपाली को इस तरह ये बात कही कि दीपाली बहुत शरमिंदा हो गई और उसने अनुजा से माफी माँगी फिर सारी बात अनुजा को बता दी।अनुजा- हे राम तू लड़की है या क्या है. पर मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !अब मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा।मानसी मुझे कुछ ज्यादा ही खुश दिख रही थी।वो मजे के साथ ही मुझसे कह रही थी- ओहह… जान लव यू. 2 लड़के एक लड़की की सेक्सी वीडियोरोहन बेटा मज़ा आ रहा है…’मैं अपनी दो ऊँगलियाँ तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा… साली रंडी मम्मी पागल हुई जा रही थी, रंडी मम्मी की चूत बहुत ही गर्म थी।मेरे ऐसा करते ही उसके मुँह से सिसकी निकल गई- आअहह, ह्म्म्म्म ऊऊहह.

मगर उन्होंने मेरी चूत में लौड़ा डाला तो उनको पता चल जाएगा कि मेरी सील टूट चुकी है, तब मैं उनको क्या जवाब दूँगी?पापा- अरे पागल, वो दोनों एक साथ तो तुझे चोदेंगे नहीं, जो भी पहले चूत में लौड़ा डाले.

तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से निकाल कर उनके मुँह में दे दिया।वो मेरा सारा माल सटक गईं और मेरे लौड़े को चाट कर साफ़ कर दिया।फ़िर उस रात हमने 3 बार चुदाई की और इन तीनों मर्तबा मैंने अपना माल उनकी चूत में डाल दिया।सुबह मैंने ये खुशखबरी चाचा को फोन पर दी. कोई एक आध महीने का फ़र्क होगा।तीनों दिखने में भी बस ठीक-ठाक से ही हैं इसी लिए कोई लड़की इनको भाव नहीं देती और हाँ तीनों पढ़ाई में भी कमजोर हैं.

आपकी चुदाई में तो बहुत मज़ा आएगा… सच में कहूँ तो मुझे 22 से 30 साल की महिला के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है।प्रिया– आरके सिंह. उन सब के अलग अलग अंगों पर पहने हुए गहनो की खनख़नाहट और पैरों में पहनी हुई चप्पल और सैंडल्ज़ की आवाज़ें रेस्ट रूम में गूँज रही थी. ’समर रसोई में गया और चाय बना लाया।दोनों ने कुछ देर टीवी देखा और बातें की।दो बजे फिर चुदाई का काम शुरू हुआ।इस बार पूनम ने समर को लौड़ा पिया, फिर गोलियाँ भी चाटी।पूनम और समर दोनों ने जमकर चुदाई का सुख लिया और पहली रात 3 बार चुदाई का सुख लिया।शादी के एक महाने तक 3-3 बार चुदाई चलती थी।दोपहर में दुकान होने के कारण समर कभी नहीं चोद पाता था.

गईईईई…’ कहते हुए एक लम्बी सिसकारी ली और उसकी योनि ने एक बार फिर रस सखलित कर दिया!अब उसकी योनि में इतना स्नेहन हो गया था कि मेरे हर धक्के पर उसकी योनि से ‘फच.

फिर उसको पलटने को बोला, वह पलट गई।उनसे पूछा- आपके मम्मों पर मालिश करना है कि नहीं?उसने कहा- सब जगह करना है।इस पर मैं बोला- फिर आप फिर अपनी चड्डी उतार दें. उन दोनों को और मुझे भी थोड़ी कम्पनी मिल जाएगी।वो हमारे यहाँ तीन दिन के लिए आया।मैंने उसे अपनी बेटी के बगल वाला कमरा दे दिया, पर वो बहुत डरपोक निकला।पहले दिन ही रात में उसने मुझे जगा दिया और कहने लगा- मुझे डर लग रहा है।तो मैंने उससे कहा- तुम मेरे कमरे में सो जाओ।एक तरफ वो लेट गया और दूसरी तरफ मेरा बच्चा. इसी बहाने पापा मुझे प्यार से तो पेश आएँगे।मैं चुपचाप नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।पापा ने पास रखी तेल की बोतल ले ली और मेरी गाण्ड पर मालिश करने लगे।अपने हाथ चलाते-चलाते वो मेरी चूत पर भी ऊँगली घुमा देते।वहाँ हल्की-हल्की झांटें थीं जो एकदम रुई की तरह मुलायम थीं।रानी- आहह.

एक्स एक्स एक्स एक्स सनी लियोन सेक्सीपीछे से हाथ डाल कर मेरे मम्मों पर रख कर दबाने लगा।‘आहह… उम्म्म्म…’ मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं।उसने मेरा ब्लाउज उतार दिया… एक हाथ से मम्मों को दबाता और दूसरे हाथ को मेरे पेटीकोट में डाल कर मेरी चूत को सहला रहा था।‘आह… उफफफ्फ़… और करो. जब मेरी नानी का देहान्त हुआ।मेरी मम्मी 15 दिनों के लिए अपने मायके चली गई।पापा सुबह नाना के यहाँ चले गए और मैं कॉलेज ना जा कर लता के आने का इंतज़ार करने लगा।दिन भी गरम होने लगे थे और मैं भी गरम था.

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वो मदमस्त हो गई और मेरी टी-शर्ट फाड़ने लगी।मैंने उसे रोका और अपनी टी-शर्ट उतार दी।उसने भी अपनी टी-शर्ट उतारी. वहीं सो गया।मैं भी खाना खा कर सोने के लिए जब छत पर गया तो पूरी छत भरी पड़ी थी।अब मैं कहाँ सोऊँ यही सोच में पड़ा था कि तभी मम्मी आ गईं और बोलीं- बहुत से लोग अगल-बगल के पड़ोसियों की छतों पर भी जा कर सोये हैं. वो मेरे पास आकर बैठ गईं और मुझसे इधर-उधर की बातें करने लगीं।तभी उसने मुझे पूछा- तुम्हारा ऑफिस?तो मैंने बता दिया- आज आपके लिए छुट्टी ले ली…तो उन्होंने ‘धन्यवाद’ कहा.

बाहर एकदम खामोशी छाई थी!क्या सब औरतें और लड़कियाँ चली गई है?तभी मैंने महसूस किया कि बाहर का दरवाजा खुला और कुछ लड़कियाँ बातें करती हुई वॉशरूम में आई और अचानक ही चुप हो गई. वो बैठ गई और मैंने उसकी कमीज निकाल दी।वो लाल रंग की ब्रा पहने हुई थी।मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को चाटने औऱ काटने लगा।उसके बाद मैंने ब्रा भी उतार दिया. क्योंकि पूरी रात की चुदाई से बिल्कुल थकी हुई थी, मेरी चूत भी सूखी थी, पर पति की इच्छा थी, सो मैं भी साथ दे रही थी।पति रात की बात सुन इतना गर्म हो गए कि उन्होंने मेरी सूखी बुर में लंड पेल दिया और 10-15 धक्के लगा कर ‘पुल्ल-पुल्ल’ की और झड़ गए।फिर मैं नहाने चली गई।जब बाहर आई तो आकाश बोले- लग रहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है.

वो दोनों कुत्ते एक साथ मेरे मुँह में अपने लौड़े घुसा रहे थे।अब तो मैं हिल भी नहीं पा रही थी, बस चुदी जा रही थी।कमीने थे भी बड़े तगड़े. मुझे भी पता नहीं चला।हमेशा उसी के बारे में सोचती थी और उसके ही सपने देखती थी कि वो आएगा और मुझसे बात करेगा और फिर मुझे ‘प्रणय-निवेदन’ करेगा।फिर न जाने क्या. लेकिन मेरा दर्द कम नहीं हुआ और मेरी चूत से और पानी निकलने लगा।कुछ देर उसी अवस्था में आनन्द अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा था।मेरी चूत के पानी से लौड़े में चिकनाई आ गई थी और अब सटासट चुदाई से मैं भी पागल हो गई थी.

तुम्हारा क्या शानदार लंड है।वो उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं, मुझे जन्नत का मजा आने लगा और मैं उन्हीं के मुँह में छूट गया।वो मेरा सारा माल पी गईं और मेरा लंड अब मुरझा गया था, वो उसे फिर मुँह में लेकर चूसने लगीं।मेरा पूरा 8 इंच का लंड फिर से खड़ा गया…अब वो बोलने लगी- मुझे जल्दी से चोद कर ठंडा कर सोनू. मुझसे अब रहा नहीं गया!मैंने भाभी के पेट को चूमना शुरू किया और दोनों पैर भाभी के दोनों तरफ डाले और उनकी पर मुँह रख दिया।भाभी तड़प उठी- छीईः गंदे.

और साथ ही पैन्टी भी सरका दी।अब उसकी रसधार इतनी ज्यादा हो गई थी कि उसकी जांघें पूरी गीली हो चुकी थी।क्योंकि ऑपरेशन की वजह से वो अब भी ज़्यादा उठ नहीं सकती थी.

पर जल्दबाजी ठीक नहीं थी।इधर मेरा लण्ड तो एकदम सख्त हो कर पूरे रौद्र रूप में आ चुका था। लौड़ा अपनी पूर्ण नाप में आकर सवा सात इंच का हो गया।मुझसे रहा नहीं जा रहा था. हिंदी पिक्चर सेक्सी साड़ी वालीपर ज़्यादातर लोगों ने मुझे किसी लड़की कोई आंटी कोई भाभी से सैटिंग करवाने के लिए ही ईमेल किए हैं।मैं इन चुलबुली लड़कियों के साथ बहुत मज़े करता हूँ और कोई भी इस तरह से कोई लड़कियों के नम्बर नहीं देता।आप मेरी जगह पर हो तो आप भी नहीं दे सकते. सेक्सी पिक्चर जानवरों की सेक्सी फिल्म’फिर मैं झड़ गया, कुछ देर बाद मैंने पानी पिया और दस मिनट बाद मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया।मैंने लण्ड पर थूक लगाया और पिंकी की चूत पर भी हाथ फेरा।वो बिस्तर पर लेट गई थी. पर मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !अब मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा।मानसी मुझे कुछ ज्यादा ही खुश दिख रही थी।वो मजे के साथ ही मुझसे कह रही थी- ओहह… जान लव यू.

जैसे मैं अभी नींद से जागा हूँ…मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मेरा नया फ़ोन जो कि मेरी बर्थ-डे पर मेरे पापा ने गिफ्ट किया था… अचानक गिर गया.

मैंने उनकी चूची और निप्पल चूसना शुरू किया, बहुत चूमाचाटी की और पीछे से उनकी गांड के सुराख में उंगली डाली।‘उईईईईई…’और मैंने उन्हें जोर से अपने ऊपर बिठा लिया।पूरा लंड अंदर… और भाभी की चीख नीकल गई- आआअह्ह ह्ह्ह मर गईई ऊओह…अभी तक दो बार चुदने के बाद भी चूत इतनी कसी लग रही थी, मुझे मज़ा और जोश दोनों आ रहा था…भाभी मेरे सीने से चिपटी रही. ऐसी कोई बात नहीं है बल्कि गुड्डी मुझे रसगुल्ला खिलाने आई थी और रसगुल्ले का रस मेरे गालों में पोत कर भाग रही थी. तूने आज तो मेरे सब दोस्तों के लंड खड़े कर दिए।यह बात सुन कर मुझे अच्छी नहीं लगी, कोई पत्नी नहीं चाहेगी कि उसका शौहर पत्नी के बारे में ऐसी बात करे।मैं चुप रही।खाना खाने के बाद सलीम मुझसे बोला- चलो तुमको कंप्यूटर सिखाता हूँ।फिर मुझे कंप्यूटर के बारे में सब बताया.

मेरा नाम अविनाश है, मैं पंजाब से हूँ।यह बात 2 साल पुरानी है। जब मैं 19 साल का था तो मैं यूरोप में आ गया था।यहीं मेरा एक दोस्त बना, उसका नाम रॉकी था।रॉकी का जन्म यूरोप में ही हुआ था. जरा देर से लौटेंगे… क्या बात है?मैंने कहा- बस ऐसे ही… तबियत कुछ खराब हो गई है… हाथ-पैर में थोड़ा दर्द है… सोचा था कि नीलम से कुछ. यहाँ किराना थोक में और अच्छा कहाँ मिलता है?मैं बोला- क्यों अंकल नहीं है क्या?‘अंकल अपने काम से 5 दिनों के लिए बाहर रायपुर गए हैं।’मैं मन ही मन मुस्कुराया।फिर मैंने उन्हें बताया- किराना आपको यहाँ इतवारी में मिलेगा।उन्होंने पूछा- कितनी दूर है?मैंने कुछ ज्यादा ही दूर बता दिया- करीब 8-9 किलोमीटर…तो उन्होंने कहा- इतनी दूर.

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जिसमें से उनके गोरे-गोरे चूचे चमक रहे थे। मैंने उसको भी निकाल फेंका और उनके एक मम्मे को पकड़ कर पागलों की तरह चूसने लगा।मैं एक को चूसता और दूसरे को मसलता. मैंने देखा उससे कपड़ों और पैरों पर चाय गिर गई थी। मैंने उसे अपनी टी-शर्ट दी और बदलने के लिए कहा। वो कमरे में चली गई और थोड़ी देर बाद जब वो वापस आई… हाय. तुमने कितनों को चाहा मन में, ये सच अनजाना होता है,जब तक ना तुम स्वीकार करो, हर शख्स बेगाना होता है,कब तक सम्भालोगी यौवन को, इसको ढल जाना होता है!.

थैंक्स…आओ दोबारा कहानी की तरफ ले चलती हूँ:विकास वहाँ से निकल कर सीधा रसोई में गया।अनुजा ट्रे में कुछ चिप्स और बिस्कुट रख रही थी.

मैं काफ़ी अंतर्मुखी व्यक्तित्व का लड़का था तकनीकी शिक्षा में डिप्लोमा करने तक मैं 18 साल का हो गया था… ना मुझे सेक्स का कोई ज्ञान था.

समझी, ये बड़े लोग हैं इनको ‘ना’ सुनना पसन्द नहीं है। चलो अब ऊपर वो लोग इंतजार कर रहे होंगे।मैं बोल भी क्या सकती थी. अब मेरी चूत में से कुछ पानी निकलने लगा इसलिए दर्द भी कुछ कम हो गया और अच्छा भी लगने लगा।मैंने भी अब ज़ोर से मेरे शौहर को पकड़ लिया और उसकी चूमा-चाटी का जबाव देने लगी।अभी मेरी मस्ती शुरू ही हुई थी कि तब सलीम ने 3-4 ज़ोर के झटके दिए और मेरी चूत में पानी निकाल दिया और मेरे बदन पर ही गिर गया।मेरी संतुष्टि हुई ही नहीं. इंडियन सेक्स सेक्सी बीपीमतलब अब मैं उसको अधिक से अधिक देखने की कोशिश करने लगा।उसे भी इसका एहसास होने लगा था कि मैं आजकल इतना बदल सा गया हूँ।वो पाँच दिसम्बर की रात थी.

पहचाना?’मैंने कहा- हाँ पहचाना… सुबह मैंने लगाया था पर आप का फोन बन्द था।वो बोली- आज सुबह ही मैं सूरत आ गई थी, पर नींद आ रही थी, तो मैं अपना सेल बन्द करके सो गई थी।मैंने कहा- तो अब तो तुम फ्रेश हो गई होगी?तो कहा- हाँ. !सोनी ने अनन्या की ओर देखा तो अनु ने कहा- मेरी तरफ क्यों देख रही हो… मैं तो वैसे भी पीरियड में हूँ… पर बी केयरफुल… हम्म. ?ऐसा क्या है मेरे फिगर में?तो मैं समझ गया कि इनको भी अपनी तारीफ सुनने में मज़ा आ रहा है।फिर भी मैंने डरते-डरते कहा- आपके ऊपर में जो है वो।तो अब उन्होंने शरारत करते हुए पूछा- ऊपर में क्या है?मैं समझ गया कि इनको भी ये सब सुनने का दिल कर रहा है।फिर मैंने कहा- आपके मम्मे।वो एकदम से चौंक गईं।कहानी अगले भाग में समाप्य।आपके विचारों का स्वागत है ।मुझे अपने विचार लिखिए।.

तुम भी…मैं कुछ नहीं बोला और दो मिनट सब चुप हो गए।तभी मैंने देखा कि मेरा बॉस और उनमें से 1-2 लड़के हंस रहे हैं। मैं समझा कुछ गड़बड़ है।इस पर बॉस ने पूछा- टॉयलेट किधर है?और वो बिना मेरे जबाव का इन्तजार किए अन्दर चले गए।बीवी एक तरफ खड़ी थी, टॉयलेट से बाहर निकल कर उन्होंने मेरी बीवी से पानी माँगा, तो वो पानी लेकर आई और उन्होंने पानी का गिलास लेने के बजाए बीवी का हाथ पकड़ लिया।इस पर वो चिल्लाई- छोड़ो. चलो दोबारा कहानी पर आती हूँ।करीब आधा घंटा बाद वो उठकर रसोई में गया।दीपाली रोटियां बेल रही थी और अनुजा सब्जी बना रही थी।विकास वहीं दरवाजे पर खड़ा होकर वो नज़ारा देख रहा था।दीपाली जब बेलन से रोटी बेल रही थी उसकी गाण्ड आगे-पीछे हो रही थी.

उसे मैंने कैसे शांत किया।तब तक आप सभी मुझे ढेर सारी मेल करके बताएँ कि आप लोगों को मेरी यह आपबीती कैसी लग रही है और इसे पढ़ने में आपको कितना मजा आ रहा है?.

तो मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए।लगभग 7-8 मिनट के बाद वो दूसरी बार झड़ गई।मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और कुछ देर बाद वो फिर से अकड़ गई. ये बात है… अच्छा मान लो अगर वो तुमसे चुदवाना चाहे तो क्या तुम अपना लौड़ा उसकी चूत में डालोगे?अनुजा की बात सुनकर विकास का बदन ठंडा पड़ गया और दीपाली को चोदने की बात से ही उसका लौड़ा पैन्ट में तन गया जिसे अनुजा ने देख लिया।विकास- क्या बकवास कर रही हो तुम. मेरा नाम विक्रम सिंह है। अभी मैं राजस्थान के कोटा जिले में रहता हूँ और यहीं अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रहा हूँ।मेरी हाइट 5.

देसी साडीवाली सेक्सी व्हिडिओ थिरकते चूतड़ों को देख कर यूँ लगता था कि अभी उठूँ और लवड़ा उनकी गाण्ड में ठूंस दूँ।उनका दो मंज़िला मकान था. मैं यह क्या सुन रही हूँ?हसन ने कहा- क्या हुआ?मैंने फिर उन्हें सारी बात बता दी तो वो बोले- यार मैंने अनवर को मना किया था कि तुमसे बात ना करे लेकिन उसने पता नहीं क्यों ऐसा किया।मैंने कहा- वो छोड़िए.

कभी भी देख लेना, ये मुझे एक फ्रेंड ने बताया था।मैं उसका लंड मजे से चूस रही थी और अब वो जोर-जोर से धक्के लगाने लग गया और 15 सेकंड बाद अपना सारा माल मेरे मुँह में ही छोड़ दिया।जो मैं सारा पी गई।अब उसने मुझे बिस्तर के किनारे बिठा दिया और अपनी दो ऊँगलियां मेरी चूत में डाल कर रगड़ने लगा. तो मैं उसे ऐसे उठाए हुए ही गुसलखाने में लेगया और शावर चालू करके नीचे खड़ा हो गया।कामिनी बोली- तुम्हें पता है कि मेरा वज़न 70 किलो है और तुम मुझे ऐसे उठा कर घूम रहे हो।तो मैं बोला- जब दिमाग में मस्ती होती है तो वज़न का पता नहीं चलता।वो बोली- कोई बात नहीं. और उसे खाँसी आ गई थी।रानी अपने मुँह में भर चुके मेरे वीर्य को थूक रही थी और मेरे बनियान से अपने मुँह को पोंछ रही थी।फिर रानी ने मेरे लण्ड को मेरी ही बनियान से पोंछ कर साफ किया.

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जाँघों तक की ड्रेस पहने थीं और गला भी बहुत बड़ा था।मैडम की बड़ी-बड़ी चूचियाँ आधी से ज़्यादा बाहर आ रही थीं।उनकी गोरी-गोरी चिकनी जांघें और चूचियाँ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. मुझे बड़ा मज़ा आया।फिर उसने क्रीम की शीशी खोल कर उसमें से ढेर सारी क्रीम निकाल कर मेरी गाण्ड के छेद पर लगा दी।फिर उसने अपनी एक ऊँगली मेरी गाण्ड के छेद पर रख कर धीरे से उसे अन्दर डाल दी. आह उहह…करीब 7-8 मिनट में वो ठंडा हो गया और मेरी गाण्ड को पानी से भर कर चला गया।मैं काफ़ी देर तक उसी हालत में पड़ी रही और न जाने कब मेरी आँख लग गई।शाम को 6.

काफ़ी समय बाद मैंने उसको मुक्त किया।फिर में नेहा के ऊपर लेट कर उसे चुम्बन करने लगा।वो भी मेरा साथ देने लगी।मैंने उसके टॉप में हाथ डाल कर उसके मम्मे दबाना चालू कर दिया।मैं बहुत सख्ती से उसके मम्मे दबा रहा था।उसे बहुत दर्द हो रहा था. ससस्स चोदो आह्ह… अई कककक ज़ोर-ज़ोर से आह्ह… चोदो मज़ा आ रहा है मेरे लौड़ूमल आह्ह… मज़ा आ रहा है।विकास पर अब जुनून सवार हो गया वो सटासट लौड़ा पेलने लगा। अब उसकी रफ्तार बढ़ गई थी.

शायद मैंने कभी लंड को खड़ा हुआ नहीं देखा, मेरे पति का तो खड़े होते ही पेशाब निकल जाता है और फिर उनका लंड सो जाता है।मैंने उनकी बात को समझा और मैं उन पर से उतर कर बिस्तर पर खड़ा हो गया और उससे कहा- खुद मेरा अंडरवियर नीचे करके मेरा लंड देख लो।तभी उन्होंने एकदम से अंडरवियर खींच लिया और मेरा लंड अंडरवियर के इलास्टिक से नीचे तक गया और फिर उछल कर बाहर आया और ऊपर-नीचे हिलने लगा.

सुबह इसे जल्दी उठा देना स्कूल के लिए तैयार होने में इसे बहुत वक्त लगता है और इसका बैग और ड्रेस तो यहीं है प्लीज़ तुम सुबह इसके साथ आ जाना मैं घर की चाबी गमले में रख दूँगी दीपाली को पता है कहाँ है गमला…अनुजा- ओके आंटी. क्योंकि मेरे शैतान दिमाग में एक अजीब सा ख्याल आया।मैंने उनसे कहा- आप मेरी अंडरवियर उतार दो लेकिन हाथों से नहीं बल्कि अपने मुँह से…उनको बड़ा अचम्भा लगा. ऐसा लग रहा था कि अब जैसे इसमें जान ही न बची हो।फिर मैंने माया को जब ये बताया कि तुम्हारे दाँतों की चुभन से मेरा सामान बहुत दुःख रहा है.

Sharm Haya Lajja aur Chudai ka Maja-3मैं धीरे-धीरे उसकी चूत का स्वाद लिए जा रही थी और निशा भी अपने हाथ मेरे सिर पर दबा कर मजे ले रही थी।ऐसा करीब 20 मिनट तक चलता रहा, अब हम दोनों बहुत थक चुके थे।फ़िर मैंने निशा से कहा- यार तूने मु्झे आज बहुत मजे करवाए हैं, आज का दिन मैं कभी नहीं भूल सकती।तभी निशा ने कहा- अभी नहीं… अभी तो और मजे बाकी हैं. 30 बजे उसके घर पहुँचा।वो तो जैसे मेरा इन्तजार ही कर रही थी और तैयार ही थी।उसने दरवाजा खोला, मैं अन्दर आ गया।आज मैं उसे देखता ही रह गया वो गोरे-गोरे जिस्म पर सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में खड़ी मेरा इन्तजार कर रही थी।मैं तो एकदम से उस पर टूट पड़ा उसको बुरी तरह से चूमने और चाटने लगा।उसने खुद ब्रा का हुक खोल दिया और पैन्टी भी निकाल कर फेंक दी।अब मैं उसके मम्मों को हाथ में लेकर मसल रहा था. अलग-अलग तरीके से चुदवाती थीं।मामी का यह चूत देने का एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भुला पाऊँगा।यह मेरा सच्चा अनुभव है।.

पर तभी अचानक से आनन्द ने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया।मैं ज़ोर से चिल्लाई और आनन्द को पीछे धकेलने लगी.

भोजपुरिया बीएफ हिंदी: ये कह कर वो हँसने लगी।तो मैंने माया के कन्धों को पकड़ा और उसे उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके दोनों हाथों को सर के ऊपर ले जाकर उसे चूमते हुए. यह कहते हुए वो मेरे होंठों को चूसने लगी और अभी मेरे लौड़े में भी पीड़ा हो रही थी जो कि मेरे जंग में लड़ने की और घायल होने की दास्तान दर्द के रूप में बयान कर रही थी।एक अज़ीब सा मीठा दर्द महसूस हो रहा था.

अनुजा वहीं पास में बैठी अपनी चूत सहला रही थी।दीपाली लौड़े को जीभ से चाट रही थी और टोपी को अपने होंठों में दबा कर चूस रही थी। उसको बहुत मज़ा आ रहा था।अनुजा- अरे मेरी जान पूरा मुँह में ले. ’ निकल रहा था।मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ी बढ़ाई उसको और मजा आने लगा।अब उसके मुँह से निकल रहा था ‘चोदो और चोदो. उसने कुछ भी नहीं किया।फिर जतिन उसे प्यार करने लगा और कुछ ही देर में जतिन ने उसे चोदने की कही, पर उसने मना कर दिया क्योंकि वो पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी।अब उसका और चुदने का मन नहीं था।वो दोनों फिर सो गए।अगले दिन वो मुझे चुपके से अपना फोन नंबर मुझे दे गई और बोली- तुम हिमाचल आना.

सो उसका साथ देने लगी।फिर दुर्गेश ने मुझको पूरा नंगा कर के अपनी पैन्ट भी उतार दी और फिर जैसे ही उसने अपनी अंडरवियर उतारी.

जब घर पर सिर्फ हम और तुम ही रहेंगे।वो इस पर चहकती हुई आवाज़ में बोली- अकेले क्यों? जान लेने का इरादा है क्या?तो मैंने बोला- नहीं. सब कुछ खोल कर सो रहे हैं… हा हा हा !किशोरी- धत्त भाभी… आप भी ना? वो तो आप ही दिन में भैया को परेशान कर रही होंगी।सलोनी- अच्छा तो बच्चू? तू जाग रही थी तब? अब तेरे लिए छोड़ कर जा रही हूँ… मेरी नाइटी पहन ले और मौका है, तू इनके सोने का फ़ायदा उठा. जब मेघा उतर जाती और बस भी लगभग खाली हो जाती तो मैं रूचि के बगल में आकर बैठ जाता ताकि अंकिता की बातें जान सकूँ, लेकिन मुझे अच्छी तरह से पता था कि रूचि एक नंबर की चुप्पा है.