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घर पर दिक्कत हो जाएगी। कल मैं फिर आ जाऊँगी।पर उन्होंने ऐसे रिएक्ट किया. आपी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा लण्ड भी आपी की चूत में पानी छोड़ने लगा।आपी ने कहा- सगीर क्या मस्त लण्ड है तुम्हारा. इस बार पहले से ज्यादा आँसू थे और होते भी क्यूँ न? लण्ड वहाँ पर फँसा हुआ था.

पेलो अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में।फ़िर मैंने जैसे ही आधा लण्ड उसकी चूत में डाला तो वो बहुत चिल्लाने लगी- आआह्ह्ह. मैं जबलपुर क़ा हूँ। मेरी उम्र 40 साल की है। मैं शादीशुदा हूँ।मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ, हमारा ऑफिस एक अपार्टमेंट में है, जो जबलपुर के एक पॉश एरिया में है।जिस बिल्डिंग में हमारा ऑफिस है.

?’ फरहान ने सवालिया अंदाज़ में कहा।आपी बोलीं- फरहान, दरवाज़ा बंद कर दो।जारी रहेगी।[emailprotected].

अब आगे-पीछे करो।मैंने अपने हाथ अपनी बहन की कमर के इर्द-गिर्द से गुजारे और आपी के खूबसूरत खड़े उभारों को अपने हाथों में थाम लिया और उन्हें दबाते हुए अपना लण्ड आपी की रानों के दरमियान में आगे-पीछे करने लगा।मैं जब अपना लण्ड पीछे को खींचता तो मेरा लण्ड आपी की चूत के अंदरूनी नरम हिस्से पर रगड़ ख़ाता हुआ पीछे आता और जब मेरे लण्ड का रिंग… जो रिंग टोपी के एंड पर होता है.

तो वो बोलीं- मुझे गुदगुदी हो रही है।मैंने पूछा- अच्छा नहीं लग रहा है?वो बोलीं- बहुत अच्छा लग रहा है।मैंने उनके निपल्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. ’ आपी के संजीदा लहजे में कोई फ़र्क़ नहीं आया था।मैंने कहा- आपी ठीक है कि आप मेरी बहन हो. नहीं तो मैं घर पर अकेली रह जाऊँगी।मैंने हामी भर दी।घड़ी में अलार्म भरते हुए भाभी ने एक बार फिर से कहा- तुम्हें कुछ पूछना है.

मैंने आपी के दोनों निप्पल अपनी चुटकियों में पकड़ कर मसले और आपी की गर्दन से होंठ हटा कर कहा- मेरी सोहनी बहना जी. फिर मैं बहुत खुश हो गया, मैंने उसी समय ‘हाँ’ कर दी।वह मुस्कुराते हुए बोली- कल मुझे अपने गांव जाना है. एक लम्बी चूमाचाटी के बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उनकी टाँगें चौड़ा कर चिकनी चूत पर अपनी जीभ को जैसे ही लगाया.

पर उसकी चैन नहीं मिल रहा था।उसके गाउन को मैं ताक़त लगा कर खींचने लगा.

तो आपी की नज़र उस डिल्डो पर पड़ी और उन्होंने फरहान के लण्ड को मुँह में ही रखे हुए आँखें फाड़ कर मुझे देखा।मैंने मुस्कुरा कर आपी को आँख मारी और डिल्डो की टोपी को आपी की आँखों के सामने लहराते हुए कहा- मेरी प्यारी बहना जी. और खुद ही अपने जिस्म को आईने में निहारने लगीं।फिर इसी तरह अपने हाथों को चेंज किया और दूसरे रुख़ पर हो कर फिर अपना साइड पोज़ देखा और आईने में ही से फरहान को देखा. में लगे रहते हो।अब मैंने सोचा कि पहले खा लेता हूँ फिर आराम से ट्रिपल एक्स किताब देखूँगा।मगर खाने में भी मन नहीं लग रहा था।उसके बाद मम्मी मार्केट चली गईं और भाई टीवी में कार्टून देख रहा था।इतने में आयशा आ गई और कहने लगी- चल कुछ खेलते हैं।मैंने कहा- तुम लोग खेलो.

अब मैं हमेशा उन्हें गंदी नज़र से देखता था।एक दिन शाम को वो नहाने के लिए बाथरूम गईं. क्योंकि इसमें कुछ गलत नहीं होता है।फिर वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी इतने में मम्मी और बहन आ गईं और हमारी बातें वहीं खत्म हो गईं।अगले दिन नाश्ता करने के बाद 10 बजे मम्मी और बहन कुछ काम से मार्केट चले गए। मैं घर में अकेला बोर हो रहा था. बस जल्द ही अगले पार्ट के साथ आपसे मिलता हूँ।तब तक आप उंगली फ्री कीजिएगा और मुझे मेल कीजिएगा।[emailprotected]अगर फ़ेसबुक पर बात करना चाहते हैं हो तो फ़ेसबुक का लिंक हैं https://www.

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मैं हूँ न।मेरे मनाने के बाद वह मान गई।मैंने कहा- करेंगे कहाँ?तो उसने कहा- मेरे घर पर.

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वो तो मरता नहीं है।वो अपने पति के बारे में कह रही थीं।मैं- तो क्या हुआ भाभी अभी आपका देवर तो जिन्दा हैं ना. तो मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई, मेरी साँसें भी ज़ोर से आवाज कर रही थीं।भैया ने पूछा- क्या हुआ?तो मैंने कहा- कुछ नहीं. मेरा ईमेल है।[emailprotected]मैं फिर एक बार गाँव की शरारातें लेकर आऊँगी।.

’शायद आपी की जहांदीदा नज़र ने भी इसे महसूस कर लिया था। इसलिए वो नरम से लहजे में मेरे लण्ड की तरफ हाथ का इशारा करते हुए बोलीं- सगीर प्लीज़ कम से कम अपने जिस्म को तो कवर करो. तो मेरी धड़कन बढ़ जाती थी। उनका पति कमजोर किस्म का शख्स था। वो रजिया जैसी फिट औरत को संतुष्ट नहीं कर सकता था।शायद इसलिए रजिया चाची मेरी तरफ बहुत ही कामुक अंदाज़ से देखती थीं लेकिन पहले-पहल मैंने उन पर उतना गौर नहीं किया था।एक दिन रजिया चाची छत पर थीं. लेकिन खास तब्दीली थी कि आपी की बड़ी-बड़ी खूबसूरत आँखों में झिलमिलता काजल.

मैं तुमसे यह पूछना चाहता हूँ कि क्या तुमने कभी सेक्स किया है?अर्श- ओह सर.

अब तक वो एक बार अपना सफ़ेद पानी निकाल चुकी थी। अब मेरा पानी भी निकलने वाला था।मैंने तेज शॉट मारते हुए पानी निकाला तो उसकी चूत ने भी फिर से रस छोड़ दिया।कुछ पल तक हम दोनों निढाल पड़े रहे फिर अलग हुए ही थे कि मेरे घर से फोन आ गया।मैंने बोला- बस अभी आता हूँ।मैंने उसको चुम्बन किया और बोला- आई लव यू जान. धीरे-धीरे मेरी उंगली अन्दर-बाहर होने लगी।उसके बदन में सिहरन होने लगी. लेकिन तुम्हारे जैसा लण्ड मैंने आज तक कभी नहीं देखा।इस बार मैंने फ़ैसला कर लिया कि मौसी की गाण्ड मारनी है.

जो पीड़ा कम और आनन्द ज्यादा दे रहे थे। उसकी अधखुली साड़ी अस्त-व्यस्त हो रही थी. ये लड़की पौधों को पानी लगाते-लगाते पूरी टंकी ही खाली कर देगी।टीवी लाऊँज के दरवाज़े से निकल कर राईट साइड पर हमारे घर का छोटा सा लॉन है. अपना मोटा हथियार और मेरी प्यास बुझा दे।मैं भी इसी के इंतज़ार में था.

आपको मेरे साथ हुए अपने अनुभव को आपको कैसा लगा बताना मुझे।मेरी प्यारे भाई लोगों को सलाम और मस्त चूतों को चुम्मा!धन्यवाद।आप मुझे मेल कर सकते हैं।[emailprotected]मेरी Facebook आईडी है Facebook. तो हमने अपने आपको ठीक किया और सोने का नाटक करने लगे।आने वाले का चेहरा ठीक से तो दिख नहीं पाया.

मैंने एक सिसकारी ली और आपी के चेहरे को देखने लगा।आपी भी मेरा लण्ड चूसते हुए ऊपर नज़र उठा कर मेरी आँखों में ही देख रही थीं।आपी लण्ड ऐसे चूसती थीं. बस दस मिनट का समय दो…और दस मिनट के बाद रवि का लंड फिर फनफना रहा था।इस बार मीना खुद रवि के ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत की गर्मी को ठंडा कर लिया।[emailprotected]. और फिर मैं नहाने चली गई, आलोक भी अपने कमरे में चला गया।थोड़ी देर बाद मैं जब नहा कर बैडरूम में आई.

अपना सिर अपने घुटनों पर रख कर फूट-फूट कर रोने लगीं।आपी को रोता देखते ही मेरा दिल पसीज गया। जो भी हो वो थीं तो मेरी सग़ी बहन और मैं उनसे शदीद मुहब्बत करता हूँ।मैंने फ़ौरन अपनी अलमारी से अपना ट्राउज़र निकाला और पहन लिया, फिर भागते हुए ही मैंने आपी की बड़ी सी चादर उठाई और लाकर उनके जिस्म के गिर्द लपेटी.

जब मेरे मन में उसको पाने की चाहत जगी। उसके साथ बात करके मैंने उसके पति के बारे में पूछ ही लिया।पति के जिक्र से सुनीता कुछ उखड़ी-उखड़ी सी लगी।तो मैंने उससे पूछ लिया- एक बात बताओ कि तुम्हारे पति के साथ तुम्हारी सेक्स लाइफ कैसी है?मुझको यह जान कर आश्चर्य हुआ कि उनके बीच लगभग एक साल से अधिक समय से कोई सम्बन्ध नहीं बन पाया था। कुछ उसके जेल में रहने के कारण. बुआ अन्दर नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थीं और वो अपनी चूत और अपने मम्मों को दबा रही थीं. क्यूंकि उसका मोबाइल नम्बर अभी भी मेरे पास था।दिल्ली आकर वही अपनी सिगरेट, किताब और पोर्न मैगज़ीन वाली जिन्दगी में मैं भावना को कब भूल गया.

बस मुझे जन्नत दिखा दो।मैं उसका इशारा समझ गया और मैंने उसको अपनी बाँहों में ले लिया।बाँहों में लेते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. तो मैं शाम को दफ्तर से आने के बाद छत पर टहल लेता था।वहीं उसी छत पर सिमरन भी टहला करती थी जैसा कि मैंने आपको बताया कि हम दोनों कि छत एक ही है।मैं उसको अपनी चोर निगाहों से देखा करता था।एक दिन मैं उसी समयानुसार छत पर टहलने चला गया।सिमरन पहले से ही छत पर थी।उस दिन वो अपनी मम्मी के साथ थी.

तो मैं अपना हाथ उसके गोल-गोल चूतड़ों पर फेरने लगा। वो कुछ नहीं बोली तो उसके बाद मैं अपना हाथ उसके मम्मों पर ले गया और मम्मे सहलाने लगा।धीरे-धीरे उसके मम्मे कड़े होने लगे। मैं सोच रहा था कि क्या मस्त रात है ये। मैं अपने हाथ सरकाते हुए उसकी बुर के पास ले गया।जैसे ही मैंने उसकी बुर को टच किया. मैं आ जाऊँगी।मैंने फ़ोन काट दिया।अब यश जोर से मेरी मार रहा था।कुछ मिनट के बाद यश का भी काम हो गया। उसने भी वीर्य चूत में ही छोड़ा. फ़िर भी आशंका से उसने पूछा- आप मुझे काम से तो नहीं निकालेंगी ना? दीदी.

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कि घर पर भी बुलवाया करोगी।अब मैंने अपने एक हाथ से उसकी चूत में भी दो उंगलियाँ घुसा दीं और दूसरे हाथ से उसकी चूची दबाने लगा, धीरे से लौड़ा उसकी गाण्ड में पेल दिया।वो तड़फी.

और हाँ हगने के लिए तो जरूर जाती हैं।हमारे चाचा के घर के पीछे ही एक तालाब है जो कि कुछ ही दूरी पर है, बीच में और किसी का घर नहीं था। सिर्फ कुछ बड़े-बड़े पेड़ थे।हमारी भाभी उधर ही कपड़े धोने जाती थीं।सभी भाभियाँ काम बांट लेती थीं, कोई रसोई. जो शायद इस कहानी के बाद मेरे दोस्तों को पता चलेगी।यह कहानी मेरे दोस्त भूषण की है। हम जब गोवा गए थे तो वहाँ भूषण एक मसाज पार्लर में कुछ करवाने के लिए 3 हज़ार लेकर गया था और जब वापस आया तो कह रहा था कि यार पैसे तो गए और हाथ से ही मुठ मारनी पड़ी।मैं उसका चेहरा देखते ही समझ गया था कि यह झूठ बोल रहा था।जब मैंने रात को उससे पूछा- क्या हुआ था?उसने जवाब दिया- किसी को मत बताना।मैंने कहा- ओके. और वो अपनी फ्रेंड से मिलने के लिए उसके घर जा रही थी।उसने मेरे बारे में पूछा.

इसलिए मैंने बाथरूम में जाकर अपनी योनि और जाँघों को साफ करके अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गई।अब मुझे पछतावा हो रहा था कि मैंने ये क्या कर दिया? मुझे भैया को कैसे भी करके रोकना चाहिए था।यही सब सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई।सुबह जब मैं उठी तो मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था।मित्रो, यह कहानी कैसी लगी. कोई आ गया तो?मैंने कहा- आपी कोई नहीं आएगा और बीवी को तो किसी भी वक्त प्यार कर सकते हैं।आपी ने कहा- वो तो ठीक है. एचडी वीडियो बीएफ सनी लियोनजिससे मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में घुस गया। वो मेरे लण्ड के टोपे को अपने गर्भाशय तक महसूस कर रही थीं, उनके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकलना चालू ही थीं।अब मैं पूरा लण्ड बाहर निकालता और पूरा एक ही झटके में घुसा देता जिससे उनका पेट और कूल्हे ऊपर उठ जाते थे।मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी चालू की.

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मैं हाथ से हिलाकर लंड का पानी निकाल लेता हूँ। मैं मुठ मारने का बहुत शौकीन हूँ और लगभग रोज़ ही टट्टी करते समय मुठ मारने का मज़ा कर लेता हूँ।मुझे लगा था कि शादी के बाद मेरी यह आदत चली जाएगी मगर ऐसा न हो सका।मैं मनप्रीत सिंह 32 साल एक का 5’7″ लम्बाई वाला औसतन शरीर के साथ गोरे रंग का आम सा आदमी हूँ। ज्यादा मोटा नहीं हूँ. ऐसी चूत चोद कर तो मैं धन्य हो जाऊँगा। लेकिन मौसी तुम तो केवल आज तक सिर्फ चुदी हो.

मेरी सोहनी बहना जी?आपी ने मेरी आँखों में ही देखते हुए अपना एक क़दम आगे बढ़ाया और मेरी पैंट की ज़िप को खोलते हुए कहा- अपने ‘लण्ड’ का दीदार करवा दो. लेकिन मैंने ग़ोता लगाना सीख लिया है।तभी दादी आ गईं और हम सब दूसरी बातें करने लगे।दादी के आने से मैं भाभी से बोला- भाभी, मैं गाँव में थोड़ा घूम कर आता हूँ।भाभी के बदले दादी बोलीं- हाँ. दोनों जाँघों के बीच गुलाबी रंगत लिए फूली हुई योनि।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मेरा शरीर कद काठी में तो भाभी के समान ही था.

फिर बोला- हाँ भाई, ये तो बात है!‘अब दिमाग से चूत को निकाल और चल अब पढ़ाई कर और मैं भी सोता हूँ.

तो फिर मैंने उसे कुतिया बनाया और फिर लण्ड को गाण्ड के छेद पर टिका दिया।थोड़ा सा अन्दर घुसेड़ने के बाद पूरी ताकत के साथ बाकी का हिस्सा अन्दर तक डाल दिया। मैं इतनी तेजी और बेरहमी के साथ धक्के लगा रहा था कि वो सह नहीं पा रही थी।बस 8-10 धक्कों के बाद ही वो संतुलन खो बैठी और और फिर गिर गई। लेकिन मैंने उसे फिर से कुतिया बनाया और लगातार धक्के मारने में लगा रहा।वो जितना चीखती चिल्लाती. इसलिए मैं अपने कमरे में आकर ऐसे ही लेट गई।बाहर बारिश तो नहीं हो रही थी. मेरा नाम प्रवीण है। मैं 35 साल का अहमदाबाद में रहने वाला शादीशुदा इंसान हूँ। यह मेरी पहली और एकदम सच्ची कहानी है। अगर कोई भूलचूक हो तो कृपया माफ़ कर दीजिएगा।बात कुछ 4 साल पुरानी है। मैं अपनी फैक्ट्री से अपने से शाम के 8 बजे घर जाने को निकला। मैं अपने घर के नज़दीक ही बस स्टॉप के पास से गुजर रहा था कि एक आंटी, जिनकी उम्र करीब 45 साल की होंगी.

रानी मुखर्जी की बीएफहम एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने और चूसने लगे।हम दोनों ने लोअर टी-शर्ट पहनी थी। मैंने उसकी टी-शर्ट निकाल दी।गर्मी की वजह से उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था।हाए. मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती हूँ।मैंने थोड़ा इतराते हुए बोला- क्या कहना है?वो बोली- यार सैंडी.

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सच में हिला देना वाला था।उसके बाद मैंने उसको बांहों में भरके किस करना स्टार्ट किया और सलवार का नाड़ा खोल कर चूत में उंगली करना चालू कर दी।शायद उसने आज ही अपनी चूत की शेव की थी।उसकी चूत एकदम कोमल सी थी, एकदम गीली-गीली. चुप क्यों हो?आपी ने कहा- कुछ नहीं तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी।आपी अभी बोल ही रही थीं कि तभी अचानक अम्मी के कमरे का दरवाजा खुला। आपी आवाज़ सुन कर चुप हो गईं और टीवी देखने लगीं।अम्मी कमरे से बाहर आईं और मुझे देख कर कहा- तुम तो बाहर गए थे?तो मैंने कहा- अभी-अभी वापिस आया हूँ।अम्मी ने कहा- मैं ज़रा बाज़ार जा रही हूँ. जिससे मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनके मुँह में ही पिचकारी छोड़ दी और उनका मुँह पूरा अपने माल से भर दिया।फिर वो बाथरूम चली गईं और साफ़ करके वापस आईं.

पर उन्होंने सिर्फ मेरे लौड़े को किस किया, तकिये के नीचे से कंडोम निकाल कर मुझे दिया. मगर खिड़की से इतनी रोशनी आ रही थी कि मैं थोड़ा बहुत देख सकती थी।मैं जल्दी से दरवाजा खोलने चली गई और मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो भैया सीधे मेरे ऊपर गिर पड़े. पर कोई बयान नहीं कर पा रहा था।फ़िर हमारी मम्मियों ने सोने के लिए बुला लिया तो हम सब सोने चले गए। बहुत सारे मेहमानों के होने की वजह से अन्दर कमरों में जगह ही नहीं थी इसलिए हम बच्चे लोग हॉल में ही सो गए थे.

क्या मुझे आप तौलिया दे दोगी।भाभी बोली- अभी देती हूँ।जैसे ही भाभी ने तौलिया देने के लिए हाथ दिया. तो दर्द कहाँ से बर्दाश्त होगा हरामी?मुझे चुदाई के समय गालियाँ अच्छी लग रही थीं. इस सब में हम दोनों को बहुत मज़ा आया था।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !आखिर हम दोनों एक-दूसरे से अलग-अलग हुए और फिर एक साथ नहाए।नहाने के बाद हम दोनों फिर बिस्तर पर आए और अर्श मेरी बाँहों में थी।अर्श से मैंने पूछा- तुझे कैसे महसूस हुआ और कितना मज़ा आया?तो अर्श ने बताया- मुझे लण्ड का रस पीना अच्छा लगता है.

आपी ने बात खत्म की तो मैंने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि आपी ने एकदम शदीद परेशानी से मेरे कंधे की तरफ हाथ बढ़ा कर कहा- ये क्या हुआ है सगीर?मैंने अपने कंधे को देखा तो वहाँ से गोश्त जैसे उखड़ सा गया था जिसमें से खून रिस रहा था।मैंने आपी की तरफ देखे बगैर अपनी कमर को घुमा कर आपी के सामने किया और कहा- जी ये आपके दाँतों से हुआ था और ज़रा कमर भी देखो. उसके लंड ने मेरी गांड को खोल के रख दिया था जिसका अहसास मुझे अंदर बाहर जाते हुए लंड से हो रहा था।उसने अपने एक हाथ की उंगली मेरे मुंह में दे दी, मैं उसे चूसने लगा और दूसरे हाथ से वो मेरी गांड को सहलाते हुए चोदने लगा।उसके धक्कों से मेरा सिर दीवार पर टकरा रहा था और मैं छिपकली की तरह दीवार से लगा हुआ अपनी गांड उठाकर उससे चुदवा रहा था।‘आह मेरी रानी.

पता ही नहीं चला।तकरीबन एक घंटे के बाद पायल की आँख खुली। मेरा जिस्म अभी भी आधा उसके ऊपर था। पायल धीरे-धीरे मेरे बालों को सहला रही थी।तभी मेरी आँख खुली.

मैं क़िसी को नहीं बताऊँगा।बहुत मनुहार करने के बाद वो राजी हो गई लेकिन उसने कहा- ठीक है. बंगाल बीएफ’ भर रही थीं।मेरे जेहन में ये आया कि यही टाइम है कि अब मैं दोबारा ट्राई करूँ।इस सोच के आते ही मैं उठा और आपी के सामने आकर उनको सीधा करते हुए आपी के होंठों को अपने होंठों में दबाया और एक हाथ में आपी का हाथ पकड़ते हुए दूसरे हाथ से उनके सीने के उभार दबाने लगा।मैंने चंद लम्हें ऐसे ही आपी का हाथ थामे रखा. की एक्स एक्स एक्सअन्दर चलो।हम दोनों अन्दर चले गए और दूसरे कमरे में जाते ही मैं उनको दीवार से सटा कर चूमने लगा. जो उनकी चुदास को बता रहा था।मैं उनके ही बिस्तर पर उनको लिए बैठा था। मैंने मोना भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया.

दोस्तो, मेरा नाम राज है और मैं पुणे महाराष्ट्र में रहता हूँ। मेरी उम्र 23 साल है.

आज वो खुद मेरी बाँहों में हैं।उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मुझे किस करने लगीं। मैं भी उनका साथ देने लगा और उनके बड़े-बड़े चूचों को दबाने भी लगा।कुछ देर बाद वो मेरे बेल्ट को खोलने लगीं. शायद उन्होंने खुजाया होगा और वो फिर से सो गईं।मैं काफी देर तक चुपचाप ऐसे ही पड़ा रहा. वो ज्यादातर अपने पति विवेक के साथ आती हैं।विवेक सर बहुत ही स्मार्ट हैं.

तो देखा रूम में मेरा दोस्त सचिन उसकी गर्लफ्रेण्ड सीमा एक-दूसरे को किस कर रहे थे।मुझे देख कर एक बार तो वे दोनों डर गए. कहीं से भी ना कम ना ज्यादा।मैंने उसके इन आकारों का उसकी मैक्सी से आसानी से अनुमान लगा लिया था। मेरा एक और अनुमान था कि वो कभी भी नहाने के तुरंत बाद अंडरवियर नहीं पहनती थी. तो सविता चाची रसोई में से पानी की बॉटल और आइस-ट्रे लेकर आ रही थीं और उनके होंठों के बीच एक जलती हुई सिगरेट सुलग रही थी।देखने वाली बात तो यह थी कि चाची सिर्फ़ पेटीकोट में थी और ऊपर से उनके बड़े-बड़े ब्राउन निप्पल वाले पपीते लटक रहे थे।कसम से मेरा 6 इंच का लण्ड कुतुबमीनार बन कर पैन्ट में सख्त हो गया।तभी नीचे से डोरबेल बजी.

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पर बाद में आराम से काम शुरू हो गया। धकापेल चोदने के बाद वो बहुत उत्तेजित हो गई. उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मुझे पूरा नंगा करके खुद भी नंगा हो गया।वो मेरे पैर का अंगूठा चूसते हुए मेरी चूत पर आ गया, मेरी चूत पर एक किस करके बोला- मेरे छोटे राज को भी तो खुश कर. फिर आपी ने अपनी गर्दन को साइड से घुमाते हुए सीधा किया और आँखें बंद रखते हुए ही धीमी आवाज़ में बोलीं- सगीर मुझे लिटा दो नीचे.

तो घर में केवल मम्मी और चाची ही रह जाती थीं।फाइनल इयर में मैंने कॉलेज जाना कम कर दिया था.

बस यही चीज़ मेरे साथ हो गई, उस समय बात करते-करते उन्हें नींद लगने लगी, मैं पलंग पर सो गया और वो नीचे चटाई बिछा कर उस पर सो गईं।मामी की लड़की जो सिर्फ़ एक साल की थी.

’ कर रही थीं।मैंने ऐसे ही उनको बहुत देर तक अलग-अलग पोजीशन में चोदा। अब तक भाभी 3 बार झड़ चुकी थीं और वो थक गई थीं. !यह कहते-कहते ही आपी ने अचानक देखा कि मेरा लण्ड मेरी मुठी में पूरा खड़ा है और मेरे लण्ड का जूस मेरे पूरे हाथ पर और लण्ड की नोक पर फैला हुआ है।‘सगीर. सनी लियोन की फुल बीएफभाभी ने अपना पेटिकोट उतार दिया और नंगी भाभी में मेरे भी बाकी के कपड़े उतार दिए और फिर मेरा लण्ड देख कर तो उछल सी गईं, बोलीं- वाह.

तुम निपट जाओगी तो सौ शॉट का जादू कैसे देख पाओगी।उसने कहा- देखो तुम्हें जो करना है वो करो. इससे पहले ही मैंने उसके होंठों का रस चूसना शुरू कर दिया और बस चूसता रहा।जैसे ही उसने थोड़ा सा मुँह खोला. देखने में बिल्कुल भोली-भाली लगने वाली अर्श का यह रूप देखकर मैं खुद हैरान था।मैंने बिना देर करते हुए उसे बाथटब के ऊपर बिठाया और उसकी गाण्ड में लौड़ा पेलना शुरू कर दिया और मैं तेज-तेज उसकी गाण्ड को चोदने लगा।मेरे जवान लौड़े से गाण्ड चुदवा रही अर्श के फेस को मैंने ध्यान से देखा तो वो बहुत सुन्दर लग रही थी।मैंने अपना मुँह उसके कान के पास करके कहा- साली मादरचोद.

पर उन्होंने मुझे चुप कर दिया- यह कोई फैशन है जो तुम पहनती हो? देखा नहीं क्या इन शहरी लड़कियों को? वे जितने छोटे छोटे कपड़े पहनती हैं, उतनी ही सेक्सी लगती हैं।तुम्हें तो सोचना पड़े करेगा कि क्या पहनूँ. मुझे शरम आती है।मैंने मौसी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए तो वो शर्माने लगीं, धीरे-धीरे मैंने मौसी को एकदम नंगी कर दिया।उनकी चूचियाँ अभी थोड़ी बड़ी थीं और हल्की सी लटक भी रही थीं.

तो साली हिलने लगी।मैंने सोचा कि कहीं साली जग गई तो हंगामा हो जाएगा.

कभी अपनी उंगली मेरे मुंह में डालकर चुसवा रहा था और कभी मेरे नर्म चूतड़ों को हाथों में जोर से भींच रहा था।उसकी जांघों वाला हिस्सा बिल्कुल मेरी गांड से चिपका हुआ था और वो अपने नंगे चूतड़ हवा में ऊपर नीचे करते हुए मुझे चोदने की कोशिश कर रहा था।जब उसकी जांघें मेरी गांड से टकरा रही थीं तो खेत के सन्नाटे में पट्ट-पट्ट की आवाजें आ रही थीं।मैंने उसको हटाने की कोशिशें तेज कर दीं. मगर तभी भैया ने मेरे कूल्हों के नीचे अपने दोनों हाथों को डालकर मेरी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और मेरी योनि की फाँकों को अपने मुँह में भर कर इतनी जोर से चूस लिया कि मुझे अपनी योनि का अंदरूनी भाग खिंचकर भैया के मुँह में जाता सा महसूस हुआ और मेरे मुँह से ‘इईईई. मेरा जोश बढ़ रहा था।मैंने कहा- एक बार पूरा अन्दर ले लो। उनके बाद हर औरत को मज़ा आता है और तुम्हें भी आएगा।मौसी बोलीं- तुम मेरी बात पर विश्वास करो.

सेक्स कन्नड़ तो मैंने उससे कहा- मेरा प्यार अपनाने के लिए थैंक्स। मैंने उसके हाथ को पकड़ कर मसल दिया।इसके बाद तो मैं उसे. वो भी एकदम माल लगती थीं। कोई उनको देख कर यह नहीं कह सकता कि उनकी एक 19 साल की बेटी भी है। मुझे छत पर आता देख आंटी ने मुझसे बात करने लगीं।आंटी- अरे बेटे तुम छत पर क्या कर रहे हो?मैं- आंटी मैं तो रोज छत पर टहलने आता हूँ.

आफरीन ने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेण्ड है?मैंने उससे बोला- नहीं. कम ऑन फक मी डार्लिंग!’मुझे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ, मैंने अपनी गति बढ़ा दी ‘ओहहह… याहहहह. तो आपी के बदन में झुरझुरी सी फैल जाती और वो मज़े के शदीद असर से सिसकारी भरतीं।इसी के साथ मैं उनके मज़े को दोगुना करने के लिए आपी के मम्मों को दबा कर उनकी प्यारे से खड़े हुए और सख़्त निप्पलों को अपनी चुटकी में भर कर मसल देता।अपने लण्ड को ऐसे ही रगड़ते हुए और आपी के निप्पलों से खेलते हुए मैंने अपने होंठ आपी की कमर पर रखे और उनकी कमर को चूमने और चाटने लगा।आपी ने मज़े से एक ‘आहह.

बीएफ कुत्ता और

तो वो अपने कपड़े पहन चुकी थीं।आपी मेरे पास आईं और मेरे कंधे के ज़ख़्म पर फिर से हाथ फेरा और फिर मेरे होंठों को चूम कर शरारत से कहा- सगीर याद है. आज बह गया।मैंने उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ लगाया, मेरा हाथ लगाते ही उसने ज़ोर का झटका दिया जैसे तेज करेंट लगा हो।मेरा सपना अब पूरा होने वाला था. तभी मेरे दिमाग़ में एक प्लान आ गया।मैं उस रात को दरवाजा खुला रख कर 5 बजे का अलार्म लगा कर सोया और 5 बजे जाग कर सविता चाची के नीचे झाड़ू लगाने आने का वेट किया।लेकिन आंटी 6:30 बजे तक नीचे नहीं आईं, मैंने गेट बंद कर लिया।तब तक बाकी के स्टूडेंट्स भी कोचिंग के लिए जा चुके थे। ग्राउंड फ्लोर पर मैं अकेला ही रह गया था।करीब 7 बजे मैंने चाची की पायलों की आवाज़ सुनी.

जो कि सूख कर सख्त हो गया था।भाभी ने फिर से हँसते हुए कहा- अभी देख क्या रहे हो. और मेरे कुछ बोलने से पहले ही गर्दन घुमा कर हमारी तरफ देखा और मेरे चेहरे पर नज़र जमाते हुए बोलीं- तुम्हारा भी दिल चाह रहा है क्या?मैंने चंद सेकेंड सोचा और कहा- नहीं यार.

मैंने आपी के दोनों कन्धों को पकड़ कर उन्हें अपने आपसे अलग किया और झुरझुरा कर कहा- ऊओ मेरी माँ.

वो मैं अगले भाग में बताऊँगा।आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी, नीचे कमेंट्स में और ईमेल में अपने विचार दीजियेगा।[emailprotected]. मैं इसे बाहर निकाल लूँगा।अपनी बात कह कर मैंने डिल्डो के हेड पर बहुत सारा तेल लगाया और कुछ तेल अपनी उंगली पर लगा कर आपी की चूत की अंदरूनी दीवारों पर भी लगा दिया।अब डिल्डो को हेड से ज़रा पीछे से पकड़ कर मैंने एक बार आपी को देखा।वो मेरे हाथ में पकड़े डिल्डो को देख रही थीं और उनकी आँखों में फ़िक्र मंदी के आसार साफ पढ़े जा सकते थे।मैं कुछ देर डिल्डो को ऐसे ही थामे हुए आपी के चेहरे पर नज़र जमाए रहा. वरना लेट हो जाएगी।दोस्तो, ये कैसा प्यार था जिसमें बिना चुदाई के भी सब कुछ था आपके कमेंट्स के इन्तजार में हूँ।[emailprotected].

लेकिन अपने मुँह के अन्दर टच ना होने देतीं और उसी तरह लण्ड मुँह से बाहर निकाल देतीं।आपी की गर्म-गर्म सांसें मुझे अपने लण्ड पर महसूस हो रही थीं।आपी ने 3-4 बार ऐसा ही किया. मैं वहाँ पर खाना क्या खाऊँगा?तो मम्मी बोलीं- आप जाइए मैं थोड़ी देर में आकर आपको खेत पर खाने का डिब्बा दे दूँगी।वो ‘ठीक है’ कहकर चले गए और जाते हुए मुड़कर मेरी तरफ देखकर स्माइल करने लगे. क्योंकि मैं पायल को हर्ट नहीं करना चाहता था। उसके अकेले साथ होने का कोई फायदा नहीं उठाना चाहता था।उसको मैंने फिर से बाँहों में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर चुम्बन करने लगा।पायल भी अब पहले से ज्यादा और प्यार के साथ मेरे चुम्बन का जवाब दे रही थी।कभी मैं उसके ऊपर के होंठों को चूमता.

तुम्हारे इधर ही आऊँगी।दोस्तो, अभी इतना ही कल फिर मिलते हैं।मुझे आपके ईमेल जरूर मिलते रहना चाहिए.

गैलरी सेक्सी बीएफ: वो ड्रिंक नहीं करती थी।रात को हमने खाना खाया और चुदाई के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगे।सबसे पहले उसे बिस्तर से उठाकर खड़ा कर दिया और साड़ी उतार दी. तो मैंने भाभी की गांड के नीचे दो तकिये लगा दिए, हाथ से भाभी की चूत को फैला कर लौड़ा फिट किया।मैं ऊपर ऊपर से लण्ड को चूत में रगड़ रहा था।भाभी गर्म हो चुकी थीं.

अभी मेरा सेफ टाइम है।तो 20-25 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए और बाद में मैंने अपना बचा हुआ माल उसकी चूचियों में झाड़ दिया।वो बड़े प्यार से उसको उंगली से उठा कर चाट रही थी।मैं निढाल होकर उसकी कमर को चूमने लगा. उसने झट से बोल दिया- मेरी चूत में अपना लंड डाल दो और क्या?मैंने बोला- ठीक है तो तैयार हो जाओ दर्द सहन करने के लिए।वो तैयार हो गई. मेरी बात खत्म होते ही आपी ने अपने दोनों हाथों को टाँगों के दरमियान से उठाया और अपने चेहरे को हाथों से छुपा लिया। उनकी टाँगें आपस में जुड़ी हुई थीं जिसकी वजह से सिर्फ़ उनकी टाँगों के दरमियान वाली जगह के ऊपरी बाल.

फिर बातें करते हैं।मैं टीवी लाउन्ज में जा कर बैठ गया और टीवी देखने लगा। आपी अपने काम खत्म करके आईं.

तो वो मुझे ही देख रही थी।मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?वो बोली- वह क्या था?मैंने सोचा बेटा आज किस्मत मेरे साथ है और मौका भी अच्छा है।मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या. उसने कोई जबाव नहीं दिया।फ़िर मैं उस दिन उसको ‘गुड नाइट’ बोल कर सो गया।दूसरे दिन उसका ‘गुड मॉर्निंग’ का मैसेज आया हुआ था।रात में उसका मैसेज आया- क्या कर रहे हो. मम्मों पर किस किया और फाइनली उसका ग्रीन सिग्नल मिलने पर धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा।कुछ ही धक्कों में वो कहने लगी- आह्ह.