खेत की सेक्सी बीएफ

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सेक्सी आंटी भी आज नहा धोकर हरे रंग का शरारा कुर्ती पहनकर तैयार थीं.कार्तिकेय ने मेरी बात मान ली और वो मेरी चुत चोदने ले लिए कमरे की तलाश में लग गया.

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तब मुझे पता लगा कि साली साहिबा अभी तक किसी से चुदी नहीं है इसने सिर्फ़ ऊपर ऊपर से ही मर्द के मज़े लिए हैं.

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जब अंकल थोड़े शान्त हुए … तो वो दोनों एक दूसरे को बांहों में भर कर चूमने लगे. शीना भाभी के शहद जैसे होंठों का रसपान करने में भारी आनन्द की प्राप्ति हो रही थी. जहां पर हम दोनों ने अच्छी तरह से पेस्ट वगैरह किया और चुपचाप नहा कर वापस आ गए.

उनके एक हाथ में उनकी वाइफ की फोटो थी और फोटो देख कर वो लंड हिला रहे थे. मैं एक बार को तो डरने लगा था कि मैं अन्वेषी भाभी को खुश कर भी पाऊंगा या नहीं. ये सेक्स कहानी 2 साल पहले उस वक्त की है, जब मैं रिश्तेदार के यहां शादी में जा रहा था.

मैं चित लेट गया और खड़े लंड पर अपनी चुत फंसा कर भाभी घुड़सवारी करने लगीं. हम दोनों ही समझ चुके थे कि चुदाई का मूड है, पर शुरुआत कैसे हो … ये कशमकश चल रही थी. और दूसरी लड़की की तरफ हाथ दिखा कर बोला- ये पीहू … मेरी दूसरी बहन है.

अपने लण्ड के सुपारे पर तेल की चार बूँदें टपकाकर मैंने मुमताज से कहा कि अपनी बुर के लब खोलकर मेरे लण्ड के सुपारे पर बैठ जाओ. उन्होंने अपने लंड भी खूब सारा मस्ती से तेल लगाया और मेरे पजामा को एक हाथ से खींच कर उतार दिया.

दोस्तो, सेक्स करना था मुझे रूपा भाभी से पर उनकी जवान लौंडिया मेरे साथ मस्त होने लगी थी.

सेक्स कहानी पढ़कर मैं भी पूरा गर्म था, इसलिए लौड़े को शांत करना जरूरी था.

दूसरे दिन सुबह ही मेरे पति ने जेठजी को सुबह नाश्ते के लिए कॉल किया और घर बुला लिया. मैं अक्सर रूबी आंटी को फर्श पर पौंछा मारते हुए उनके हिलते हुए मम्मों को देखता था. इस जबरदस्त लंड से और तुम जैसे दिलदार आदमी से चुदना मेरी दिली ख्वाहिश है.

हम दोनों चुदाई में इतने बेखबर हो गए थे कि ये ध्यान ही दिया कि हम दरवाजा बंद करना भूल गए थे और हमें पता नहीं चला कि कब सुमन की बड़ी बहन रूम में आ गई. फिर वो अचानक से मुझे छोड़ कर बाथरूम में गईं और अपनी चूत को अच्छे से साबुन लगा कर धोकर आ गईं. मैंने मुमताज की चूत में लण्ड डाल दिया, नाज की चूत में ऊँगली चलाने लगा और शबाना की चूचियां चूसने लगा.

तभी निशा ने भी अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसने मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसपर मुठ मारने लगी.

मैं उसके मुँह से गाली सुन थोड़ा शॉक था, पर वो सही बोली थी कि किसी की बुर में ऐसे ही लंड पेल दोगे, तो वो गाली तो देगा ही. अब आगे पड़ोसन Xxx कहानी:सरिता भाभी की जिन्दगी में रोमी, सोनू और दूध वाले की तरह एक एक करके कई मर्द आते रहे और सरिता भाभी की चुत लंड लेती रही. बहुत ही मदहोशी वाले अंदाज में हम दोनों एक दूसरे के होंठों को खा रहे थे.

उसने अपनी बांहों में मुझे जकड़ लिया और अपनी कामुक धीमी आवाज़ में बोली- भाई … ये मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा सेक्स था. लंड को वो मस्त चूस रही थी, तो मैंने झटके मारना शुरू कर दिया और उसके मुँह को मालती की चुत समझ कर चोदने लगा. दादू चोकर भरने में लग जाते थे और मैं आपकी गोद में बैठ जाती थी, आप मुझे टॉफी खिलाते थे.

चूत के अन्दर तक जीभ को पेल कर मेरी रिसती हुई चूत का स्वाद लेने लगा.

जब रघु ने श्रेया को ये सब बताया, तो श्रेया बोली- मतलब वो सेक्स करेगा, तभी रोल देगा. और 10 मिनट बाद भाभी ने कहा- चलो!अब मैं आपको भाभी के फीगर के बारे में बता दूं.

खेत की सेक्सी बीएफ आंटी की मदमस्त आहें निकलने को थीं मगर होंठ बंद थे तो बस ऊंह ऊंह करके रह गईं. मैंने लंड निकाल लिया और हम दोनों बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ करके फिर से बिस्तर पर आ गए.

खेत की सेक्सी बीएफ अलीज़ा की मादक सिसकारियां जैसे जैसे बढ़ रही थीं, मेरे लंड की स्पीड भी उतनी ही बढ़ रही थी. तो आपने ये क्यों किया?तो भाभी बोली- गुस्सा तो थी लेकिन जब तुमने सब सच्चाई बताई तो गुस्सा चला गया.

फिर उन्होंने मुझसे कहा- बेबी होटल हॉट सेक्स में मजा आया ना?मैंने उनसे कहा- आपने मेरे साथ ये अच्छा नहीं किया.

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जैसे ही उसे महसूस हुआ कि लंड से शर्बत निकल आया है … तो वो वीर्य को हाथ में लेकर उसे महसूस करने लगी, सूंघने लगी. अब तक मेरे मन में मौसी के लिए कोई ख्याल नहीं थे क्योंकि वो उम्र में मुझसे काफी बड़ी थीं और उनके एक 5 साल का पोता और 3 साल की पोती भी थी. मैंने कुछ देर आंटी के चूचे दबाए पर कुछ देर बाद आंटी ने मेरा हाथ झटके से हटा दिया और मेरी नींद खुल गई.

चूंकि हम दोनों पहले भी कई बार मिल चुके थे … तो हमारे बीच सारे पर्दे खुले हुए थे … कहीं कोई दिक्कत नहीं थी. हईई … मैम की दिलकश जवानी मेरे सिर से पांव तक 440 वोल्ट का करंट दौड़ा रही थी. कुछ देर बाद मुझे भी लंड के प्रहार अच्छे लगने लगे और मैं उसके नीचे दब कर पिसती रही.

मेरे इतना बोलते ही सुशी जी ने भी सहमति में सर हिला दिया कि आप बात तो ठीक कर रहे हो.

सभी लड़कों का जब भी मन करता था, मेरी चूचियां दबा देते थे, जिसका नतीजा ये हुआ कि एक साल में ही मेरी चूचियां काफ़ी बड़ी हो गईं. वो एकदम से सदमे में रह गयी और एक पल के लिए उसकी नजर मेरे लंड पर ठहर गयी. [emailprotected]मेरी माँ की चूत की कहानी का अगला भाग:मैंने अपनी माँ की चुदाई देखी- 2.

मैंने भी इधर-उधर देखा, कोई नहीं देख रहा था … तो मैंने अपना लोअर जांघ तक नीचे कर दिया. शादी हुई, शौहर मिला, तीन चार साल साथ में रहा और फिर छोड़कर किनारे हो गया. अब बाइक की स्पीड में आ रही हवा के झौंकों से भीगे हुए बदन पर सनसनी आने लगी.

तभी मैडम आगे बोलीं- अपने इसी मूड में मैंने आपको ऐसा जवाब दे दिया था. मैं समझ चुका था कि अब दीदी की चूत को मेरा 8 इंच का काला मोटा मूसल लंड का इंतज़ार है.

वो फिर मेरी तरफ देखने लगा, तो मैंने बोल दिया कि हां मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ. मेरी सभी सहेलियां भी जब ये पढ़ेंगी, तो वे पक्का इस सलाह को अपने बॉयफ्रेंड या पति के साथ जरूर करेंगी. अब बाइक की स्पीड में आ रही हवा के झौंकों से भीगे हुए बदन पर सनसनी आने लगी.

लंड की गर्मी से वो देसी हॉट गर्ल सेक्स के लिए तड़प उठी और बोली- अब इन्तजार नहीं होता … संजू पहले एक बार मुझे जल्दी से चोद दो बाकी खेल दूसरे राउंड में कर लेना.

मेरी क्लास में एक लेडी भी आती थी, जिसकी उम्र लगभग 40 के आस-पास रही होगी. वो बोलीं- तुमने तो कल भी किया था मगर कल खून क्यों नहीं निकला था?अंकल ने कहा- आज मैंने लंड मोटा करने की दवा खा ली थी, इसी वजह से तुम्हारी चुत से खून निकल गया है. मुझे यहां मनचाही कहानियां पढ़ने को मिल जाती हैं। यह बहुत ही लोकप्रिय साइट है और पाठकों के लिए एक परिवार के जैसी है। सभी लोग यहां पर कहानियों के माध्यम से जुड़ते हैं और अपनी अपनी बात सबके सामने रखते हैं.

अब मैंने उनसे मोबाइल छीनने की कोशिश की क्योंकि उसमें मेरे न्यूड फ़ोटो और ब्लू फिल्म थी. वैसे तो ये कॉलेज केवल लड़कियों का था, पर इधर मर्दों के रूप में खाना बनाने वाले और टीचर भी थे.

वो जब नहाकर बाथरूम से बाहर निकली, उसकी गीली जुल्फों के कारण उसकी टी-शर्ट कुछ गीली हो गई थी और उसके एकदम से टाइट चूचे थे, बिना ब्रा के साफ़ नुमाया हो रहे थे. मैं उसके पास गया और उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाया और उसकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. अब मैंने एक दो बार धक्के मारे और एकदम से अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालकर उसके मुंह के सामने कर दिया.

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मुझमें इस समय इतनी हिम्मत नहीं थी कि आशीष का इतना मोटा लंड अपनी सील पैक गांड में ले सकूँ.

मैंने उसके गले पर किस करने के साथ मम्मों की घाटी को अपनी से चाटा और चुम्बन लेने लगा. उन्होंने हमें लिटा दिया और हमारे शरारे का नाड़ा खोलकर उतार दिया, फिर हमारी पैन्टी उतार दी. आखिरकार वह घड़ी आ गई थी, जब मैं उनके लंड के नीचे आने वाला था और भाई भी तैयार थे क्योंकि मुझे भी उन्होंने इतनी अच्छी ट्रेनिंग दी थी, जिससे मैं अभी पूरी तरह से लड़की बन चुकी थी.

मगर आज मुझे लग रहा था कि नन्दिनी कि चुत मेरे लंड का कत्ल करके ही रहेगी. मैंने अमिता से पूछा- ज्यादा दर्द हुआ तो?उसने कहा- मैं सहन कर लूंगी. मुट्ठी मारने के फायदेअंकल मेरी मम्मी को पीछे से देख रहे थे और मम्मी की गांड को देख कर अंकल अपनी लुंगी के ऊपर से लंड को मसल रहे थे.

दूसरे दिन शाम को चार बजे जाना था तो मैं जल्दी घर आ गया और उसे उसी डायरेक्टर के पते पर उसके ऑफ़िस में ले गया. एकदम अचानक से मैंने ऐसे ही मैडम से पूछा- यार दीदी, ये तो मेरी समझ में ही नहीं आ रहा है.

मैंने महसूस किया कि वो अंडरवियर नहीं पहने हुए थे चूंकि अभी नहा कर आए थे. मेरी क्लास में एक लेडी भी आती थी, जिसकी उम्र लगभग 40 के आस-पास रही होगी. वैसे और दिन तो वह सामने की तरफ बैठ कर पढ़ाई करती थी, मगर आज उसकी पोजीशन दूसरी थी.

तुम कहो तो मैं तुम्हारी मालिश कर दूँ?ये बात सुनकर मुझे ये बात मालूम हो गया कि जेठ जी मुझे पसंद करते हैं. मैं सिर्फ यही कहता कि मिलो कभी, इतना चोदूंगा कि तुम्हारी चूत को भोसड़ा बना दूंगा. पर जैसे ही मैं वापस आने को हुआ तो मैंने देखा कि मेरी बीवी उसे किस कर रही थी और उसके लंड को पैंट के ऊपर से सहला रही थी.

इसी पोज में मैंने अपने हाथ की एक उंगली उस डाइवोर्सी की गांड में डाल दी.

मेरा लंड तो खुशी से फूलकर अपनी औकात में आ गया और उसकी चूत की गर्मी को महसूस करने लगा था. वह उसे एक दम लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और मैं उसकी बुर को रसगुल्ले की तरह चचोर रहा था.

अमिता- आह हहाया ईई ऊऊऊ सौरभ … आअज मजा आ रहा है … ययय एईई ऊऊईईई!फिर मैं उसको गोद में वैसे ही पकड़ कर बिस्तर पर बैठ गया. मैंने पर्दे की ओट से देखा कि विराट भी सब कुछ भूल कर अपना 8 इंच का लंड वहीं हिलाने और मसलने लगा था. इसका अर्थ ये था कि या तो इनका पति इन्हें चोदता नहीं है या वो नपुंसक है.

उसकी टाइट चूत को मैं ढीली करता जा रहा था और सोच रहा था कि समीक्षा में वो मजा नहीं आया कभी जो आज अमिता मुझे दे रही है. मैंने आंटी को बिस्तर पर अपने ऊपर ले लिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए. मैं- लव यू सेक्सी डॉल!निशा- आआहह … मसल दे साले …मैं- गंडमरी आज मैं तेरी छोटी सी इस चूत को फाड़ दूंगा.

खेत की सेक्सी बीएफ इस घर्षण से मेरे लंड के सब्र का बांध टूट चुका था और मैंने भी अपना गर्मागर्म वीर्य दीदी की चूत में भर दिया. अंकल ने मुझे अपनी बाइक की चाबी दी और कहा कि मेरे पास मूवी की दो टिकट हैं, तुम चाहो तो अपने दोस्त के साथ देखने जा सकते हो.

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उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था. एक बार की बात है, गर्मियों की छुट्टी में जेठानी जी अपने मायके गई थीं तो जेठजी खाना खाने हमारे घर आ जाते थे. दूसरे दिन ही उन्होंने मेरी गांड में अपनी दो उंगलियों में वैसलीन लगा कर ठूंस दिया था, जिससे मैं दर्द से दोहरा हो गया था.

उनके मम्मे यूं लगते थे मानो वो एक आमंत्रण दे रहे हों कि आओ और हमें दबा दबा कर हमारा दूध पी जाओ. वो मेरी इस बात से थोड़ा चौंकी … पर खुश भी थी कि उसका भाई उसी पर मरता है. দীপিকা xxxअपने होंठों को मैं दीदी के होंठों से मिलाने वाला ही था कि दीदी बोल पड़ीं- वीर अब रहा नहीं जाता … प्लीज चोद डालो मुझको!मैं भी दीदी के कान पास बोला- हां मेरी चूत की रानी, जरा अपनी टांगों को तो फैलाओ.

मैंने भी बिना कुछ बोले आंटी के एक चूचे को मुँह में दबाया और चुत में लंड की फ्रंटियर मेल दौड़ा दी.

उस दिन उनके पति जिनको मैं चाचा कहता हूँ, दुकान का सामान खरीदने के लिए भिवानी की मार्केट में गये थे. अब अर्शिया की चुत और मेरे हाथ के बीच पेटीकोट और एक पतली सी चड्डी थी.

कोमल को मैंने पीठ के बल लेटा दिया और पहले उसके होंठों को चूमने लगा. अब आगे नंगी लड़की होटल Xxx कहानी:अपने सामने कोमल को यूं देख कर मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसके तन से ब्रा और पैंटी को निकाल दिया. उसने मुझसे कहा कि कल्पना मैं तुम्हारे साथ कुछ स्पेशल शुरुआत करना चाहता हूँ.

मैडम ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पूछा- हर रोज खा सकोगे?मैंने कहा- आजमा कर देखो, फिर कुछ कहना.

आइसक्रीम खाने के बाद मैंने उससे कहा- तुम बैठो, मैं नहा कर आता हूँ … थोड़ा फ्रेश फील होगा. कुछ मिनट तक ब्लोजॉब देने के बाद मैंने मुंतज़िर को लंड से हटाया और उनके कपड़े निकालने लगा. दोस्तो, दिल्ली की लड़कियां या तो लौंडे को सिरे से खारिज कर देती हैं या लंड पसंद आ जाए, तो चुदने के लिए टांगें खोलने में कोई हील हुज्जत नहीं करती हैं.

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फ्रेंड सिस्टर सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मैंने अपने दोस्त के साथ रूम में रहता था. जैसे ही मैंने भाभी को सीने से लगाया तो उन्होंने बोला- अब देर मत करो, मेरी चूत में आग लगी है. आंटी अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियां छिपाकर हलकी सी मुस्कुराती हुई मुझे बाहर निकल जाने को कहने लगीं.

उन्होंने मेरी साड़ी को निकल दिया और उसके बाद उन्होंने मेरी ब्लाउज को निकाल दिया. मैंने कहा- क्या मतलब!वो लंड को अन्दर लेते हुए बोली- मेरी बड़ी दीदी शुरू से चुदक्कड़ है. मुझे एक तरफ चुम्मी का मजा आ रहा था और दूसरी तरफ उसके मोटे मूसल लंड का स्पर्श अपनी चुत पर बड़ा ही हॉट लग रहा था.

दीदी आह करती हुई बोलीं- चल अब देर न कर … जल्दी से लंड चुत में पेल दे और जो भी करना है … जल्दी से कर लो. हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस कर थे और एक दूसरे को फुल लिप-लॉक करके मज़े ले रहे थे, एक दूसरे के होंठों को बाईट भी कर रहे थे. सक्सेना सोफ़े पर बैठ गया और मुझसे अपनी गोद में बैठने का इशारा किया.

कुछ देर बाद उसने अपने कपड़े पहने और तैयार होकर बोली- राज मैं जाऊं … अब रात की तैयारी भी करनी सै. वो अजीब अजीब सी आवाज निकाल रही थीं- ऊह आह आह … कैसे चूस रहे हो … मैं मर गई.

मैं उनके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसता रहा और वह मुझे पागलों की तरह किस करती रहीं.

मैं अपनी बहन आरू से काफी क्लोज और अट्रैक्ट था … और कहीं न कहीं वो भी मुझे पसन्द करती थी. 2 सेक्सी सेक्सी सेक्सीहथेली की बाकी थूक उन्होंने अपने लण्ड पर मली और अपने लण्ड को मेरी बुर के होंठों पर रख दिया. देसी सेक्सी खेतों मेंरास्ते में मुझे शरारत सूझी तो मैंने लंबा और सुनसान रास्ता ले लिया और जानबूझ कर ब्रेक ले-लेकर बाइक चलाने लगा. हफ्ते में दो तीन बार सामान ले जाती थी और हर महीने हिसाब चुकता कर देती थी.

मॉम की सिसकारियां निकनने लगी, वे आह उह उफ़ आ ह मार दिया जैसी आवाजें निकाल रही थी.

तब मां ने कहा- रात को तो अमित घर पर ही होगा, आप आज मत आना … कल मैं कुछ इंतजाम करती हूं. और अब तो खुशबू बिना पानी के मछली के जैसे तड़पने लगी।मैंने उसके होठों को चूसना शुरु कर दिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा।अब फिर मौक़ा देखकर मैंने जोर से एक धक्का और लगाया तो अब मेरा लंड पूरा का पूरा खुशबू की चूत के अन्दर घुस चुका था।खुशबू दर्द और मजे के मिलेजुले प्रभाव से से मचलने लगी थी. मैंने फ़ौरन उसका वह हाथ पकड़ा, जिससे वह अपनी चूत को सहला रही थी और उसे गौर से देखने लगा.

अभी ही आ जाओ!मैंने कहा- हां यदि मेरे बस में होता तो अभी पंख लगा कर आ जाता. अब आगे मेरी रण्डी माँ की सेक्स कहानी:जब मैंने मां को खुश देखा तो मुझे भी काफी अच्छा लगा. जब वह मेरे कमरे में आया, तो आकर बैठ गया … पर सर्दी का सीजन था, तो मैंने उसको मेरी रजाई में आने को कह दिया.

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जब भी हम दोनों देर के लिए अकेले में मिलते हैं, तो चुदाई भी कर लेते हैं. पर नींद मेरी आँखों से गायब थी।इस बीच मैंने करवट बदल ली और मेरी गांड शरद की तरफ थी. मुझे यूं रोती देख, वो मुझे शांत करने लगी और मेरे रोने की वजह मुझसे पूछने लगी.

वो मेरी बात का मर्म समझ गई और बोली- कल शुक्रवार है और यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर एक जगह पर साप्ताहिक बाजार लगता है, तो मम्मी पापा वहां जरूर जाते हैं.

मैंने हम दोनों के लिए एक और पैग बनाया और वो भी मेरे काफी करीब मुझसे लिपट कर बैठ गए.

मैंने कोमल को अपने नीचे आने का इशारा किया, वो थोड़ा घबराई और बोली- अभी नहीं प्लीज … ऐसे ही ठीक है. अब आंटी बोलने लगीं- योगी बहुत हो गया … अब तू अपने इस विशाल लंड को मेरी चूत में डाल दो. आदिवासी सेक्सी सेक्सी आदिवासीपर पांच सात बार डिप्स लगाते हुए मैंने अपनी ठोड़ी से उनकी गांड को रगड़ दिया.

इतने समय नन्दिनी से बातें करते करते मेरे अन्दर भी नन्दिनी के लिए प्रेम की भावनाएं आ चुकी थीं. उनके खुले हुए मम्मे, चिकनी जांघें और गोरी चुत बहुत ही मस्त लग रही थी. कभी क्रिकेट का कोई मैच होता, तो किरणदीप और सुरजीत भी आते थे और हम चारों मिलकर मैच का आनन्द उठाते थे.

उसने मुझे बताया कि वो पैरामेडिकल की स्टूडेन्ट है और उसके अब्बू सरकारी नौकरी करते हैं. उसकी टी-शर्ट में उसके बोबों का जो उभार दिखता था, उससे ऐसा लगता था कि उसके बोबों का साइज 28 से ज्यादा नहीं था.

सिर्फ उसकी आंखें और हल्की सी मुस्कान मेरे सामने थी जिसके जवाब में मैं उस वक़्त पता नहीं क्यों … पर उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी.

उनका एक हाथ अब भी मेरी पीठ पर ही था और वो मेरे बैकलेस ब्लाउज का पूरा आनन्द ले रहे थे. जब आशीष मेरे घर के अन्दर आ गया तो मैं भी छत के रास्ते चुपके से नीचे उधर आ गयी जहां मेरी दीदी अंजली एक नीले रंग की बहुत सेक्सी सी साड़ी में थीं. थोड़ी देर में हम लोग उठे, मैंने मॉम से कहा- मॉम कुतिया बनो!मॉम ने कहा- तू मुझे मॉम क्यूं बोलता है?मैंने कहा- फिर क्या कहूं?मॉम ने कहा- तू मुझे गाली देकर बुलाया कर!मैंने कहा- ठीक है मेरी रण्डी … आ जा कुतिया बन जा! आज मैं तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा.

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उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था. मेरी जीभ को हरा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ अन्दर तक घुसा दी और मेरे मुँह के पानी को चूसना शुरू कर दिया. वो एक जीरो फिगर वाली प्यारी सी लड़की थी, उसके खुले हुए बाल हवा में लहर रहे थे.

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मैंने पूछा- क्यों?तो बहन ने कहा कि उसे कुछ पढ़ाई के बारे में बात करनी है. फिर मेरी तरफ देखते हुए बोला- दीदी तुम भी चेंज कर लो।मैं दो मिनट तक उसे देखती रही कि वो अब बाहर जाये लेकिन बेशर्म बोला – अरे दीदी, तुमने अभी तक चेंज नहीं किया?भो … गाली तो लगभग निकल ही गयी थी लेकिन अपने को काबू में करते हुए बोली – अरे तू पहले तो बाहर जा!ओह हाँ!” सकपका गया और बाहर जाने के लिये कमरे से निकला ही था कि पलट कर वापिस आ गया।क्या हुआ?” मैंने पूछा. अभी जब मैं पानी पीने उठा था … तो तेरा पेटीकोट हवा से तेरी कमर तक आ गया था.

थोड़ी देर में मेरे लंड से पिचकारी निकली और बाथरूम के फर्श पर गिर गयी. मैंने पूछा- ऐसा क्यों?उन्होंने कहा- उनका लंड लंबा होता है और स्टैमिना भी ज्यादा होता है.

निशा ने मुझे अपनी नशीली आंखों से देखा और अपने पतले और लाल होंठों से मेरे मुँह पर लगे उसकी चूत के रस को चाटने लगी.

तब भी लता को बहुत बहुत धन्यवाद, जो उसने मुझे इस तरह के आनन्द की अनुभूति करायी. इसलिए मैंने इन भाईसाब से मदद मांगी थीअंजुमन- ये तुम्हारे भाईसाब हैं?सुमोना- नहीं रे सुन तो … तुम तो कार में घुसते ही सो गई थीं. दोनों चूचियां चूसने के बाद मैंने उसके घाघरे का नाड़ा ढीला किया तो घाघरा नीचे गिर गया.

अपनी गर्लफ्रेंड मॉम को चोदने के बाद अपनी दूसरी गर्लफ्रेंड और उसकी मम्मी व मामी के साथ थ्रीसम की सेक्स कहानी पेश है. फिर कुछ देर बाद नवीन ने मेरी गांड में वीर्य छोड़ दिया और मेरी गांड चिकनी कर दी. चुदाई के बाद जब स्खलन होने को हुआ तो वो बोली- माल अन्दर नहीं निकालना.

उसका एक हाथ मेरी चूचियां दबा रहा था तो दूसरा हाथ मेरी बिना पैंटी की चुत पर लग गया था.

खेत की सेक्सी बीएफ: इतना कहते हुए अंकल ने मेरे हाथ से मेरा मोबाइल ले लिया और बोले- अगर तुम्हारा कोई अफेयर नहीं है तो मुझे अपना मोबाइल चैक करने दो. लेकिन दूसरी ओर मेरे अन्दर की औरत ये कह रही थी कि इतने समय के बाद किसी मर्द के स्पर्श से जो उत्तेजना हुई थी, उसका भी अहसास कुछ और ही था.

मेरे प्रोमोशन के ख़ुशी में उन्होंने मेरे लिए अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी भी रखी थी जहां उन्होंने बस मुझे न्यौता दिया था. थोड़ी देर तक हम दोनों अपने मोबाइल में खोए रहे और अंतत: उन्होंने केबिन के माहौल की खामोशी को तोड़ा. मैं अपने काम के सिलसिले में मुंबई, गुजरात, गोवा और कोल्हापुर बेलगांव आता-जाता रहता हूँ.

मैं आशा करती हूँ कि आपको मेरी कज़िन सिस्टर चुदाई कहानी अच्छी लगी होगी.

मैंने एक नजर उसकी छोटी सी चूत पर डाली और लौड़े पर थपकी देकर उससे कहा कि बस मेरे लौड़े … अब तू इस कमसिन चूत को फाड़ने वाला ही है. अब वो आह करने लगी तो मैंने एक कदम और आगे बढ़ कर उसकी क्लिट को उंगली से छेड़ना शुरू कर दिया. दोस्तो, दिल्ली की लड़कियां या तो लौंडे को सिरे से खारिज कर देती हैं या लंड पसंद आ जाए, तो चुदने के लिए टांगें खोलने में कोई हील हुज्जत नहीं करती हैं.