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मेरा तो यह हाल था कि मेरी चूत का पानी भी निकलने लगा था, जिसे पापाजी बड़े मजे से पी रहे थे और डकार भी नहीं ले रहे थे.अब आगे का काम बाकी थामैंने रात भर पूरे घर का जायज़ा लिया लेकिन मुझे ऐसे कोई जगह नहीं मिली जहाँ से मैं उन दोनों को देख सकूँ। यह सब मैंने कहानियों में पढ़ा था.

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वे कहती हैं कि दर्द होता है, पर मैं उनकी गाण्ड को खूब दबाता हूँ और चाट भी लेता हूँ।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी आपको, अगर कोई गलती हो गई हो तो माफ़ कर देना।कहानी का अगला भाग:जन्मदिन के तोहफे में भाभी की गाण्ड मारी. !वो मेरी गाण्ड में झटके मारने लगे और मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत के दाने को रगड़ने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी।‘उफ्फ़… ओह. !और उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।तभी मैंने एक और धक्का लगाया तो लंड आधा अन्दर घुस गया और उस के मुँह से ज़ोरदार चीख निकली- उउइईईई ममाआआआ मर गई आआआआआहह.

दीदी की मुँह से चीख निकल गई, दर्द के मारे दोहरी हो गई और आँखों में आँसू आ गए लेकिन दीदी ने कहा- प्लीज़ रुकना नहीं, डाल दो एक ही धक्के में पूरा लंड. नहा-धो कर तैयार हो जा, या मैं तुझे नहलाऊँ ! मैंने तुझे पहले भी यहाँ नंगी कर बहुत बार नहलाया है !’मैंने रामदीन की बातों पर ध्यान नहीं दिया और रोज की तरह तैयार हो गई।‘चाचा जो तूने कल किया, वो ठीक नहीं किया. !वो बोली- मुझे पता था कि तुम आज घर पे अकेले ही हो, तो मैं जानबूझ कर सभी के जाने के बाद ही पानी भरने के लिए आई.

30 बज गए थे। निखिल ने चाय पीने का पूछा तो मैंने कह दिया मुझे कोई चाय साय नहीं पीनी !ओह … यह निखिल भी एक नंबर का लोल ही है …. बहुत मस्ती करते हो! चलो, अब हम लोग चलें।’हम लोग बाजार के लिए चल दिए और बस में चढ़े।बस में बहुत भीड़ थी, सब एक-दूसरे से सट कर खड़े थे।मेरे आगे मेरे ससुर और पीछे मेरे कोई दूसरा आदमी था, जो बहुत ही मोटा और काला था, मेरी गाण्ड पर ज़ोर लगाए जा रहा था।जब भी बस के ब्रेक लगते, वो मेरे ऊपर चढ़ जाता और मैं ससुर जी के ऊपर हो जाती।‘बहू मज़े लो अपनी ज़िंदगी के. !और मैं हँसने लगी।मेरी हँसी देख कर वो अपने आंसुओं पर काबू करते हुए मुस्कुराने लगी।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।[emailprotected].

उन्होंने मुझे अचानक से रोकते हुए कहा- यह सही नहीं है रिचर्ड !मैंने कहा- सॉरी मैडम !उन्होंने कहा- यह तुमने बिल्कुल ठीक नहीं किया है. करीब 20 मिनट हो गए और मेरा लंड पानी छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था, मैं बिल्कुल थक चुका था और पसीने से भी तरबतर हो चुका था।मैंने जल्दी जल्दी झटके लगाने चाहे पर खड़े खड़े थक गया था, मैंने कहा- यार, अब नहीं होगा मुझसे ! मैं थक चुका हूँ, मैं लेट जाता हूँ, आप दोनों आकर बारी-बारी से मेरे लंड पर बैठ कर झटके लगाओ, मेरी और हिम्मत नहीं रही अब.

तो उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख कर दबा दिया।ये सब इतना जल्दी हुआ कि मुझे पता ही नहीं चला।मैं उनसे ‘सॉरी’ कह कर दूर हो गया.

ससस्स हहाअ!भाई ने मेरी अन्दर की जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया।फिर भैया ने मेरी कमसिन कच्ची कली की खुशबू सूँघी- हमम्म हा.

कई बार अकेले में आपस में मज़ाक और छेड़छाड़ करते धींगामुश्ती और लिपटा चिपटी में राजू कच्ची कली के घस्से मार कर ऊपर ऊपर से ठरक पूरी कर लेता था. दिन-रात घर में ही रहता है, ये तो लगता है कि सुहागदिन भी मना रहा है।’थोड़ी देर चुप्पी रहने के बाद…नेहा- चलो हम लोग भी करते हैं, जो शादी के बाद किया जाता है।‘कहाँ करेंगे. अब और इंतजार नहीं हो रहा मुझसे!उनकी तड़प देख कर मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया, जिससे मेरा पूरा 8 इन्च का लंड उनकी चूत में समा गया और वो दर्द से चिल्ला उठीं- उू.

कुछ समय बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने उससे पूछा- कहाँ लेगी मेरी जान?वो बोली- जान आज से पहले मुझे इतना मजा किसी ने भी नहीं दिया है. मैं उस पर बैठ गई फिर अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर कर के उसका लंड अपनी चूत के मुँह पर रखा और बोली- धीरे से डालना!यह सुन कर वो खुश हो गया. फिर मैंने उससे पीठ के बल लेटा दिया और उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधे पे रख ली और सामने से उसकी गाण्ड मारने लगी.

‘अभी तुम लोग अपने कमरे में जाकर सो जाओ… कल हम डैडी को कह कर उनका नया सीडी प्लेयर और पोर्टेबल टीवी अपने कमरे में मंगा लेंगें और फिर मेरे पास रखी पोर्न सीडी देखेंगे… सच में सीडी में गजब की क्लेअरिटी होती है।’ मैंने बात बदलते हुए कहा।‘ठीक है… कल दोपहर में हम ये वीडियो देखेंगे… जब घर में सब सो रहे होंगे… ओके.

!मैं उनका सारा सड़का पी गई।उन्होंने अब एक-एक करके मेरे कपड़े उतारना शुरू किया, पहले कुरता फिर जीन्स, फिर मेरी ब्रा-पैन्टी भी उतार दी। मैंने अपनी देह मनोज भैया को सौंप दी थी।मैं जब पूरी नंगी हो गई तो कहने लगे- साली अब तक बहुत सड़का मारा है तेरे नाम का, आज तो तेरी चूत ही फाड़ दूंगा. ‘भईया, मेरी नेलपालिश और क्या! आपने क्या समझा?’ कमीनी रीटा तिरछी निगाहों के बाण चलाती बोली और राजू की हालत पर खिलखला कर हंस पड़ी. आआअ…ह्ह्ह्ह… वो साली ही क्या जिसने अपने जीजा से मज़े ना लूटे हों!सुन कर मुझे उसके हिम्मत पर ख़ुशी हुई और आराम से उसके अंग अंग को देखते हुए चोदने लगा.

फिर मैंने उसको चुम्बन किया तो वो खुश हो गई और मुझ से लिपट गई और कहा- मैं और ज़्यादा खुद को रोक नहीं सकती हूँ।तो मैंने कहा- ठीक है इतना ही बहुत है।वैसे भी मैं भी उत्तेजित हो गया था और मेरा भी खड़ा हो गया था जो कि काफ़ी देर से शायद उसकी चूत के ऊपर उसको चुभ रहा था,इसलिए भी वो और ज़्यादा उत्तेजित हो रही थी।जब मैं जाने लगा तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर रोकते हुए कहा- मत जाओ ना. रियल सेक्स सब के सामने करना कोई मामूली बात नहीं है।रेहान- देखो तुम जल्दी फैसला करो, जूही सच में कर लेगी। अब तुम सोच लो क्या करना है?आरोही- ओके जूही से ही करवा लो, मुझे नहीं करना. पर मैं तो कभी आपसे नहीं मिला।फिर मेरे पति ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी कह दिया- मैं भी नहीं जानती!तब उसने बताया- नहीं.

उसकी चूत को दोनों हाथ से सहलाने के बाद अपना लंड पकड़ कर उसके चूत में डाला लेकिन मैं अन्नू को बड़े ही प्यार से धीरे धीरे चोदता रहा.

तू ही चूस ले… तेरी ये रंडी बीवी तो साली हरामन है… आह… ओह !’काशीरा ने मेरे कान में धीरे से पूछा- झड़ा दूं या रुक जाऊं? बहुत मस्त खड़ा है, घोड़े के लंड जैसा, अब मरवा लो, बहुत मजा आयेगा।मैंने मना कर दिया- मर जाऊँगा, एक बार झड़ जाने दो चचाजी को, फ़िर सह लूंगा।मैं धीरे से बोला।‘अब चूस डालो मेरे बच्चो. मैं किसी को भी शिकायत नहीं कर सकती थी, वो अपनी गोरी सुनक्खी बीवी का दूसरे आदमी से चुदना बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था कि इतनी सुन्दर और चिकनी बीवी को दूसरा कोई उसकी आँखों के सामने ही चोद दे.

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!उसकी आँखों में भी आँसू आ गए। फिर उसने मुझे बहुत प्यार से चुप कराया और समझाया- सोना, सिर्फ़ रात-रात की ही तो बात है। फिर कल दिन तो हमारा ही है ना.

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वो उछल-उछल पड़ती थी।मेरे होंठ बराबर उसके मम्मे चूसने के काम में जुटे थे।‘बस अब सींच दो मुझे और सह नहीं पाऊँगी. जब हम गली के सामने पहुँचे तो हमने देख़ा कि बुआ का लड़का संजू हमारे स्वागत के लिये गली के मोड़ पर ख़ड़ा है. जब मुझे लगा कि मैं आगे के झटके सह लूंगी तब मैंने पापाजी से कहा- मैं आपकी देने वाली बाकी कि सजा अब काटने को तैयार हूँ.

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।’सीमा अपनी चूत को छुपा रही थी पर वो रणजीत के लंड को ज़रूर देख रही थी।रणजीत ने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया और बिस्तर पर पटक दिया, उसके ऊपर चढ़ गया, पहले उसने उसकी चूत को चूमा फिर चाटा और फिर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।चूत की चुसाई की वजह से सीमा धनुष जैसी बन गई. बोल्ड और नेचुरल लुक सबको पसंद है… पर !मैं- पर क्या सर?मोहित- एक प्रॉब्लम है… तीन फोटो और चाहिए… एक टोपलेस, एक बैकलेस… और एक सीडकटिव !मैं- एक टोपलेस ! एक बैकलेस. मुझे खड़े हुए अभी कुछ ही देर हुई थी कि मुझे वो आती हुई दिखाई दी, उसने आज भी साड़ी पहनी थी और बिना बाहों का गहरे रंग का ब्लाऊज पहना था जिसमें मुझे उसकी चूचियों की गोलाई का साफ़ पता चल रहा था.

सम्पादक – इमरानसुबह की हल्की रोशनी चारों और फैलनी शुरू हो गई थी, मुझे काफ़ी थकान महसूस होने लगी थी… सब कुछ बहुत अच्छा हुआ था मगर बस मुझे यह पुलिस वाला मामला बिल्कुल पसंद नहीं आया था।गाड़ी चलाते हुए मैं किसी तरह अपने कॉलोनी तक पहुंचा …थैंक गॉड, अब कुछ नया नहीं हुआ था, वहाँ भी कोई नहीं था।बाहर की ओर अमित की गाड़ी भी खड़ी थी, इसका मतलब अभी तक जनाब मेरे फ्लैट में ही थे. चुंबन करते-करते मैंने अजय का पजामा निकाल दिया टी-शर्ट उसने पहले ही निकाल दी थी।अब हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपटता है।हम दोनों का चुसाई का प्रोग्राम चालू था, तभी विजय कमरे में आ गया।हम वैसे के वैसे पड़े रहे।विजय- वाह. इससे आपकी कुछ सेवा करने दीजिये पहले !’ मैंने चाची के मम्मे जोर जोर से दबाते हुए कहा।‘अच्छा कड़क है रे इमरान तेरा, लगता है जैसे वो रोटी बनाने का छोटा बेलन है… हाँ ऐसे ही दबा… मसल जोर से… और जरा ऐसे खींच ना इनको… बहुत सनसना रही हैं ये !’ चाची ने कहा और मेरी उंगलियाँ अपने निप्पलों पर लगाकर दबा कर खींचने लगीं।मैं चाची के निप्पल मसलता हुआ बोला- चाची.

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तुम्हारे मौसा जी का तो इसका आधा भी नहीं था। मैं नहीं ले पाऊँगी इतना मोटा लंड।मैंने उन्हें समझाया- कुछ नहीं होगा मौसी… अब आपको मैं असली जन्नत की सैर कराता हूँ।वो बोलीं- मैं भी बहुत प्यासी हूँ निखिल….

हेमंत ने कहा- मैं बाजार से खाना लेकर आता हूँ, तुम यहीं रमेश के पास रहो!रमेश को होश नहीं आ रहा था, वो नशे में धुत्त था, मेरे घर में केवल एक रसोई और एक बड़ा कमरा है. दरअसल…’‘क्या दरअसल?’‘दरअसल यह सब उसके डील-डौल, आनुवांशिकता (पारिवारिक पृष्ठभूमि), खानपान और रहन सहन पर निर्भर करता है। सभी की एक जैसी नहीं होती किसी के छोटे होते हैं किसी के बड़े !’‘क्या इनको बढ़ाया जा सकता है?’‘हाँ. फिर कुछ समय के बाद छत पर गया तो वह वहाँ अकेली बैठी थी और मुझे देख कर हैरान होने लगी और कहने लगी- आप यहाँ.

!और मैं वहाँ से चली आई।अब असली कहानी शुरू होती है। अब तक दस बज चुके थे और मम्मा भी एक घंटे में आ सकती थीं। तो मैं नहाने के लिए बाथरूम में पहुँची, अभी मैंने कपड़े उतार कर पानी को छूने ही जा रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई।मैंने पूछा- कौन?तो वो बोला- मैं।‘क्या काम है. इससे पहले कि वह कुछ कहें और बात ज्यादा बिगड़े, मैं उठ कर खड़ी हो गई और अंगड़ाई लेते हुए, अपने जिस्म की नुमाइश करती हुई उनके पास आकर उनके हाथों को पकड़ा और अपनी चूचियों पर रख दिए.

!फिर मैंने पूछा- दर्द ज्यादा था क्या?फिर वो चुप रही, फिर अपना हाथ अनिता के सर पे रखा और दबाने लगा तो उसको आराम मिलने लगा. ना जाने क्यूँ पर आपको जान कर शायद हैरानी होगी कि आपके बारे में सोच कर ना जाने कैसे कैसे अपने आपको शांत करता हूँ। उन्होंने ठहाका मारते हुए कहा- तुम मजाक भी तक करते हो रिचर्ड. !और फ़िर उसने मेरे चेहरे को ऊपर किया और अपना मुँह मेरे मुँह से लगा कर मुझे चूमने लगा। उसने मेरे होंठों को चूसना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद वो अपनी जुबान मेरे मुँह के अन्दर करने की कोशिश करने लगा।पहले तो मैं विरोध करने जैसा करती रही, फ़िर अपना मुँह खोल दिया। उसने अपनी जुबान मेरे जुबान से छूने की कोशिश करने लगा।कुछ देर जब उसे कामयाबी नहीं मिली, तो उसने कहा- सारिका अपनी जुबान बाहर करो.

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तुम मेरी एक ही बेटी हो और अगर तुम ऐसे ही रहोगी तो कैसे चलेगा, एक बाबा जी हैं जो तुमको ठीक कर सकते हैं। अगर तुम कहो तो कल हम उनके पास चलें !रीना- कैसा बाबा और क्या करेगा वो ! मुझे नहीं जाना इन बाबा-आबा के पास !राधा- अरे वो तेरे दिमाग़ की नसें खोल देगा.

गीली चूत की फचर-पचर, रीटा की मधुर ईस्सऽऽऽऽऽ ईस्सऽऽऽ सिसकारियाँ और बहकी बहकी बेतरतीब साँसें कमरे के वातावरण को रंगीन बनाने लगी. अभी तो बहुत उचक रही थी।मैं थोड़ा रुक गया और चूमने लगा, इसी बीच मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया।वो और जोर से चिल्लाई- ऊऊऊ ऊऊऊऊऊ मार डाला… अम्मी बचा लो. लेकिन अभी यह कहानी पूरी नहीं हुई, मेरे फोटोस देख उस कण्डोम कंपनी के साथ मेरा अगला एक्सपीरियेन्स मैं आपसे बाद में शेयर करूँगी।तब तक के लिए गुड बाय मुआह!!.

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उंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रीटा ने अपनी कसी चूत की मखमली फांकों से भींच कर टाँगों को बंद करके राजू के हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया. दोनों तरफ से एक साथ धक्का लगने के कारण एक ही बार में लंड मेरी कुंवारी चूत को चीरता हुआ लगभग आधा अंदर चला गया और मेरी चीख निकल गई, आई माँ मर गई ऊऊफ़ आह मा माँ अ आ आअ आह बहुत दर्द हो रहा है, विक्की प्लीज अ आह आ नि.

फाड़ दो मेरी चूत।मैंने उसको खड़ा किया और उसकी फुद्दी पर अपना लंड रख कर और अपने होंठ उसके होंठ रख कर जोर से धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसके अन्दर चला गया वो अन्दर ही अन्दर बहुत चिल्लाई, उसके आंसू आ गए। मैंने फिर एक धक्का और मारा अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था. भूले तो नहीं ना मुझे?तो लगी शर्तजीजा मेरे पीछे पड़ागर्मी का इलाजऔरडॉक्टर संग मस्तीआया कुछ याद?हाँ जी आपकी वही शालिनी भाभी जयपुर वाली. !मामी ने कहा- अरे यहाँ एक ही बिस्तर है!मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं तो वैसे भी सोफे पर सोने वाला हूँ।वो मान गईं। हम फिर वापस बात करने लगे वो गद्दे पर लेट कर और मैं सोफे पर!बातों-बातों में मैंने मामी से पूछा- मामा जी तो इतने इतने दिनों के बाद घर आते हैं, आपका मन कैसे लगता है?इस बात पर वो थोड़ी सी उदास सी हो गईं, उन्होंने कहा- क्या कर सकते हैं.

उमा चाची- हांह… मुझे अन्दर तक चोद… सन्जू… अहह… अपनी चाची को पूरी तरह से संतुष्ट कर दे… तुमहारे चाचा ने तुम्हारी चाची को कभी इतना मज़ा नहीं दिया है। ओह… हां… सन्जू…. पापा बोले- बेटा आराम से सुबह आ जाना और ज़्यादा देर तक बाहर नहीं घूमना।बस फिर हम लोग मेडिकल स्टोर से 10 पिक कंडोम लेकर आए और फिर खाना होटल से मंगाया।रंडी बोली- सालों सारी रात ऐसे ही निकलोगे क्या. ये का कह रही हो मैडम जी… आपके बिना अब हमार इसका दिल कहाँ लागेगा, और वो नीचे भी सभी जा रहे हैं।सलोनी- हाँ, मुझे भी उन्हीं के साथ शादी में जाना है।दूधवाला- ओह, ये तो बहुत ही बुरी खबर है हमार लिए.

दीदी ने बताया- वो तेरे जीजू के बॉस हैं, एक रात वो घर रुके थे, उन्होंने तुम्हारे जीजू को तरक्की दी थी, सो घर पर पार्टी थी.

फिर वो मेरे पास आकर बैठ गई और अपनी भौंहे हिलाकर कहने लगी- क्या कर रहे हो समीर जी?मैं बुरी तरह घबरा गया था, पूजा को क्या पता था कि मैं किस हालत में लेटा हुआ था. !उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने दूध के गोलों के ऊपर रख दिया, मैंने जैसे ही उनके गोलों को दबाया, उनकी ‘आह’ निकल गई। मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके गोलों को चूसने लगा।उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरे लंड को देखने लगीं। मैंने उनकी पैन्टी उतार दी और उनकी गुफा देखकर बोला- वाह क्या गुफा है.

तब भाई साब ने कहा- अमिता अकेली है और बच्चे भी नाना के यहाँ गए हैं एक महीने के लिये, तुम शाम को एक फ़ोन कर लेना घर पर या फ़िर घर जाकर आना।मैंने कहा- जी ठीक है!और मैं वहीं से ऑफ़िस चला गया।शाम को लौटने में देर हो गई, करीब सात बज चुके थे, अचानक सेल पर मेरी बीवी का फ़ोन आया- अरे भाभी का फ़ोन नहीं लग रहा. फिलहाल तो मेरे दिल को यही लग रहा था…तभी मैंने देखा उस आदमी ने सलोनी को कसकर बाँहों में जकड़ लिया और उसको फिर से अपनी गोद में बिठाने को नीचे कर रहा है. मैंने कहा- बस हो गया…?‘बस फ़िलहाल यहीं तक! अगर जरूरत लगेगी तो मैं बुला लूँगी! तुम रहते कितनी दूर हो…!’उन्होंने मुझे पैसे देने चाहे तो मैंने अपनी एक दिन की सेलेरी ली क्यूंकि उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ली थी।मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।आदित्य पटेल[emailprotected].

!तब मैं तौलिया लेकर कमरे में गया तो गुसलखाने के बाहर दरवाजे से उनका नंगा हाथ बाहर आया हुआ था। मैंने तौलिया पकड़ाया और साथ में उनके हाथ तो फिर छू कर वहीं खड़ा हो गया और उन्होंने थोड़ी देर बाद जैसे ही अपना हाथ पीछे खींचा, मैंने दरवाज़े को धक्का दिया और गुसलखाने में अन्दर घुस गया।मामी बोलीं- यह तुम क्या कर रहे हो. जब यहाँ मेरे सामने ही उन्होंने उसकी स्कर्ट उठा उसको नंगा कर दिया था और उसके चूतड़ और चूत सब छू रहे थे. उस समय तो मुझे उसके होंठ दिखाई दे रहे थे जिस पर उसने गुलाबी रंग की लिप्स्टिक लगा रखी थी, जो मुझे पागल किये जा रही थी.

हार्ड बीएफ सेक्सी हिंदी फिर मैं लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर दबाते गया। पूरा लण्ड अन्दर जाने पर ही मैं रुका।फिर जब पीछे खींच रहा था, तो वो बोली- रहने दो. ’ मेरे मुँह से सिर्फ़ मस्त सिसकारियाँ ही निकल रही थीं, अब मैं अपने बस में नहीं थी, मैंने अनिल को अपने पैरों से ज़कड़ लिया और कहा- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में पेल दो।अनिल ने कहा- ऐसे नहीं रानी.

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हम करीब पांच मिनट ऐसे ही पड़े रहे और मैं अपनी किस्मत को इतना लंबा मोटा और सख्त लण्ड से चुदाई के लिए सहराने लगी. तो रमेश के लंड से तो तुम मर ही जाती।एक-दो मिनट के बाद उसको भी मज़ा आना शुरू हो गया तो वो नीचे से हिलने लगी, तब मैंने भी आहिस्ता-आहिस्ता झटके देने शुरू कर दिए और उसके मुँह से ‘आआआ आआहह ऊऊऊहह और ज़ोर से. ’ सिसकार रही थी।फ़िर मैंने उसके मुँह में अपना लंड डाला वो मेरा लौड़ा चाटने लगी।बहुत मज़ा आ रहा था।इस 69 की अवस्था में हम दोनों पागल हो रहे थे।अब बारी चुदने-चुदाने की थी।वो बोली- संजू.

!ऐसा कह कर नारायण से लिपट गई। नारायण ने थोड़ी देर उसकी कानों में पता नहीं क्या बोला मधु नीचे खटिया में बैठ गई। नारायण उसके सामने खड़ा हो गया, मधु ने अपने हाथ से नारायण के पैन्ट की चैन खोल दी। नारायण ने अब अपना पैंट का बटन खोल कर अंडरवियर में आ गया। मधु ने उसका अंडरवियर नीचे कर दिया। नारायण के पूरे शरीर में बाल थे। यहाँ तक कि उसके लण्ड में भी. मैं समझ गया कि आज प्यार का सागर उमड़ गया है… आज मजा आएगा।फिर वो रुकी और बोली- जब तुमने मुझे सेन्ट्रल पार्क में पहली बार किस किया था तब मुझे नहीं लगा था कि मैं भी कभी सेक्स के लिए इतना उत्तेजित रहूंगी, लेकिन आज सारे बंधन टूटेंगे… मैं खुश हूँ कि तुमने आज तक मेरे साथ कभी जोर जबरदस्ती नहीं की, न ही मेरे खिलाफ गये… इसलिए मैंने सोचा था कि अगर मैं कभी शादी के पहले सेक्स का मजा लूंगी तो वो सिर्फ आपके साथ. सेक्सी योगा सेक्समेरे पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ गई। हम नाचते रहे और हमारे बदन पास आते गये, मैं उसकी साँसें अपने गले और कंधे पर महसूस कर रही थी।मेरा बदन गरम होने लगा और मैं सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ…मैंने देखा कि महक और राज सोफे पर बैठे थे और आपस में बातें कर रहे थे.

मैं भी अपने आपको नहीं पाई, पता नहीं क्यूँ पर मेरा भी एक बार तुम्हारे साथ सेक्स करने का मन है।मैंने बोला- तो फिर आज ही करते हैं!तो बोली- नहीं, आज मेरी ट्रेन है.

कुछ देर बाद भाभी खड़ी हुई और मेरा लंड पकड़ कर मुझे पूजा के पास ले गईं, और पूजा से मेरा लंड चूसने को कहा. रोहित भी अब मुझे चोदने को बेचैन हो रहा था, वो मेरी जांघें चौड़ी करके बीच में आ गया और अपने मोटे लण्ड का सुपारा मेरी चूत के छेद पर रख दिया.

मैं समीर आपके सामने अपनी ज़िन्दगी की एक और घटना सुनाने जा रहा हूँ, आशा है कि आप सबको पसन्द आएगी और आप इसका पूरा मजा लेंगे. !उसकी आँखों में भी आँसू आ गए। फिर उसने मुझे बहुत प्यार से चुप कराया और समझाया- सोना, सिर्फ़ रात-रात की ही तो बात है। फिर कल दिन तो हमारा ही है ना. एकदम शीशे सी चिकनी और नादान चूत की गुलाबी फांकें कच्छी से बाहर झांक रही थी और चूत एकदम से पच्च-पच्च गीली थी.

Tumko na Bhool Paunga-3मैंने उसकी चूत पर अपना लौड़ा रखा और जोर से झटका मारा तो मेरा थोड़ा सा लौड़ा उसकी चूत में घुस गया।इतने में ही सीमा की आँखों में से आँसू निकलने लगे और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- अहह… अह्ह्ह्ह… जल्दी बाहर निकालो…मैं- कुछ नहीं होगा जान.

अब हम रोज ही चुदाई करेंगे।यह सुन कर मुझे भी बहुत खुशी हुई, उसके बाद माँ गाँव से चाचा को देख कर दस दिन बाद आईं, तब तक हमारी रासलीला जारी रही।उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता मैं उसे चोद देता।एक बार मैंने उसकी गान्ड भी मारने की कोशिश की, लेकिन उसे ज्यादा ही दर्द हुआ तो मैंने उसकी गान्ड नहीं मारी।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी? मुझे जरुर मेल करें।. शायद यह लण्ड महाराज चूमने और चाटने से खुश होने वाले नहीं थे और उसे तो चुसाई चाहिए थी, इसलिए उसने हिलना शुरू कर दिया. !’उसने नीचे देखा और मुस्कुराने लगा। उसने पीछे से मुझे जफ्फी डाली और मेरी गर्दन को चूमने लगा और आगे से हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !‘हाय… यह क्या करने लगे हो.

ऑंटी सेक्स व्हिडीओ ऑंटी सेक्सी व्हिडीओवो कुछ नहीं बस कपड़े समेट रही थी… क्या हुआ?’‘वो भाभी जी आपको खाना खाने शाम को हमारे घर पर आना है और भाभी जी आपके ससुर जी कहाँ हैं?’‘वो ऊपर हैं, कुछ काम कर रहे हैं।’‘अच्छा आप जाओ. वासना का तूफान खत्म होने पर राजू के नीचे दबी रीट हाँफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली- आहऽऽऽ भईया, आप तो बड़े ही कसाई निकले! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ!’राजू रीटा की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला- बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी.

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अंदर चेक करने के लिए तो हैलमेट पहना पड़ेगा… हा हा हा… हो हो हो…दोनों पागलों की तरह हँसते हुए सलोनी को रगड़ रहे थे. ”‘पूरा अन्दर चला गया…?’ उसने फिर से दोहराया और उठ कर देखने की कोशिश करने लगी।‘हाँ… देखो न।’ मैंने उठने में उसकी मदद करते हुए कहा।‘कितना अजीब है न. अब मैं भी अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैं यह तो नहीं कहता कि मैं अन्तर्वासना की सभी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ पर ज्यादातर कहानियाँ तो मैंने पढ़ी हैं.

उसके बाद आमिर ने 2 घंटे तक अपनी खाला की चूत की चुदाई की।अगले ही दिन रूखसाना अपनी बहन आमिना से झूठ बोल कर जरूरी काम का बहाना बना कर आमिर को अपने साथ पुणे लेकर चली गई। वहाँ दोनों ने आज़ादी से एक दूसरे के साथ मज़े किये।. मैं अब से तुम्हारी दीवानी हूँ।रोहन- अरे रिया मेरी जान… तू अब ऐसे ही मेरे पास आया कर, मैं तुझे इससे भी ज्यादा मजा दूँगा।मैं- सच में आज मेरी जिन्दगी का सबसे अच्छा दिन है. मैंने कहा- जानू बच्चा चाहिए तो दर्द तो सहना ही पड़ेगा और मुझे भी जोर तो लगाना ही पड़ेगा।मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा पूरा लौड़ा उसकी चूत में चला गया और उसकी चूत में से खून आने लगा।वो रो रही थी और मैं हैरत में था कि साली अभी अनचुदी थी।मैंने कहा- चुप हो जा.

शाम को मेरा बेटा घर आया तब तक मेरी स्थिति कुछ सामान्य हुई।फिर शाम को मैं अमर से फोन पर बात की।मैंने उसे साफ़-साफ़ कड़े शब्दों में कह दिया- तुमने मेरी क्या हालत कर दी. हम दोनों के आनन्द में जब कुछ वृद्धि हुई तभी उसके कहने पर मैंने लंड को तेजी से उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा. और फिर जब देखा कि उसे भी मज़ा आ रहा है तो मैंने एक झटका और दिया और मेरा लण्ड उसकी चूत फाड़ते हुए अन्दर जाकर धंस गया…एक बार तो वो छटपटाई, फिर मैंने धीरे धीरे लण्ड ऊपर नीचे किया तो उसे अच्छा लगने लगा.

रीटा राजू के गाल पर गाल रगड़ती हुई फुसफुसाती और शर्माती बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताऊँगी और हम घर पर बिल्कुल अकेले हैं और दरवाजे और खिड़कियाँ भी तो बन्द हैं और भईया, वैसे भी अब मैं बच्ची थोड़े ही हूँ. थोड़ा ते हो रया है? पर तुस्सी चिंता ना करो कि पूरा अन्दर चला गिया?’मेरा आधा लण्ड ही अन्दर गया था पर मैं उसे यह बात नहीं बताना चाहता था। मैंने उसे गोल मोल जवाब दिया’ओह.

!’‘बोलो ना मेरी जान, दो-तीन बार क्या?’‘अच्छा बाबा, बोलती हूँ; महीने में दो-तीन बार ही तो चोदते हो… बस.

अक्षय शर्माहैलो दोस्तो, अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !मेरा नाम अक्षय है, मैं गुजरात से हूँ और सूरत का रहने वाला हूँ। मैं 23 साल का एक जवान लड़का हूँ, मेरे लण्ड की नाप 6. इंग्लिश फिल्में सेक्सी फिल्में!’यह कह कर उसने आँखों पर कपड़ा रखा और टाँगें फैला कर लेट गया। उसका लिंग अब मेरे सामने था और मेरी पहुँच में था, मैं जब चाहे उसे पकड़ सकती थी, चूम सकती थी पर मैंने ऐसा नहीं किया। जब वो लेट गया तो मैं भी लेट गई।मेरी साड़ी का पल्लू मेरी गोद में था और मेरे मम्मे मेरे लो-कट ब्लाउज से बाहर झाँक रहे थे।‘संजू, क्या तुम यहाँ कभी नहाई हो?’ उसने पूछा।‘हाँ. सेक्सी पिक्चर वीडियो में चलना चाहिएआभार तमारो’ (ओह… सर, आप कितने अच्छे हैं थैंक्यू)‘पलक…’‘हुं…’‘पर तुम्हें एक वचन देना होगा !’‘ केवू वचन?’ (कैसा वचन?)‘बस तुम शर्माना छोड़ देना और जैसा मैं समझाऊं वैसे करती रहना !’‘ऐ बधू तो ठीक छे पण तमे केवू आवशो? अने आवया पेला मने कही देजो. ’ क्या सटीक धक्का लगाया, मैं तो निहाल हुई जा रही थी, अपनी किस्मत पर नाज कर रही थी।फिर तो पिस्टन की स्पीड से रगड़ते हुए राकेश भी इस आसन से उत्तेजित होने लगा।वो पीछे से घस्से मार रहा था, मैं आगे से अपनी गांड को पीछे ठेलकर गपागप लंड को ज्यादा से ज्यादा अन्दर लेने की होड़ कर रही थी। इसके बाद उसने जो अपने लंड से मेरी चुदाई की, हाय दैया… मेरी मैया याद आ गई ओह्ह…आह्ह्ह.

मैंने अभी रिया की चूत को पांच मिनट के लिए ही चाटा था कि वह आईई… आईई… करके चिल्लाई और अपने शरीर को अकड़ाते हुए अपने कूल्हों को ऊँचा उठा कर मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया.

लेकिन अब शाम को ही आ पाऊँगी।मैं- ऐसा क्यों?रश्मि- मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है और घर का काम मुझे ही करना पड़ता है। इसलिए सुबह समय नहीं मिलता। क्या आप मेरी पढ़ाई में मदद कर सकते हैं?मैं- कैसी मदद?रश्मि- शाम के बैच की पढ़ाई के सिलेबस के बारे में।मैं- ओके. इस काम को करते हुए हमें 15 मिनट हो गए थे और वो एक बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने मुँह से लंड निकाला और उसका दूध दबाने लगा।वो बोली- भैया, अब चोद भी दो ना. बस फिर तो ऐसा लगा कि जंग जीत ली, क्योंकि पापाजी मेरी चूचियों को मसलने लगे, पर उनमें से दूध न निकलने लगे इसलिए उन्होंने डोडियों को नहीं मसला.

ओह आआह्ह्ह…’ की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।मैंने ऐसा थोड़ी देर ही किया था कि उसने कहा- अर्पित मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है. ’लेकिन उसने जवाब नहीं दिया तो मैंने सोचा कि लगता है ‘इसका खड़ा नहीं होता होगा।’मुझे अपनी जिन्दगी में पहली बार ऐसा बंदा मिला जिससे मुझे लौटना पड़ा।रात को चाय वाला आया, मैंने मना कर दिया कि आज नहीं मरवाऊँगा, पर उस साले ने ज़बरदस्ती मुझे नंगा किया, बिस्तर पर धकेल कर ऊपर सवार हो गया।लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस दिया।‘साली बाग़ में जाती हो. एक दिन मेरे दोस्त ने कहा- मार्केट से आते समय कंडोम लेकर आना!मुझे बहुत आश्चर्य हुआ- बात क्या है?उसने कहा- शाम को बताऊँगा.

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मेरे चूसने से अमर अब बेकाबू से हो गए थे और मैं तो पहले से काफी गर्म थी, सो मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए. मुझे पागल कर रहे थे!मेरा लंड खड़ा हो गया था, दिल कर रहा था कि अभी घुसा दूँ अपना लंड उनके मुँह में और कहूँ कि चूस साली कुतिया. बृजेश सिंहमेरा नाम बृजेश सिंह है, जोधपुर का रहने वाला हूँ, मेरे लंड का आकार 6 इंच का है। मैं सांवला हूँ और शरीर से हृष्ट-पुष्ट हूँ।हमारे परिवार में मेरे अलावा सिर्फ मम्मी-पापा ही हैं। मैं जोधपुर कंप्यूटर खाता-बही का काम करता हूँ।यह मेरे जीवन की सच्ची कहानी है। आप इसे कोई मनघड़न्त कहानी मत समझना।मैं तब बी.

तब आएगा असली मज़ा…मेरी बात दोनों को पसन्द आई और मैं शुरू हो गई। कभी अजय का लौड़ा चूसती तो कभी विजय का कभी दोनों लौड़ों को एक साथ नज़दीक करके जीभ से चाटती.

आंटी मेरे पीछे एक प्लेट लेकर आई और खड़ी हो गईं।उनके हाथों में एक प्लेट में चार गुलाब जामुन थे और ढेर सारा रस था। मैंने वो देख कर हल्के से मुस्कुरा दिया और आंटी से कहा- आंटी मैंने तो खा लिया है….

मैं दर्द से कराहती हुई उठी तो अपनी योनि को हाथ लगा कर देखा, उसमें से वीर्य में सना खून मुझे दिखाई दिया।मैं डर गई और एक तरफ हो कर देखा तो बिस्तर पर भी खून का दाग लगा था, वैसे तो पूरा बिस्तर गन्दा हो गया था, जहाँ-तहाँ वीर्य. पर उसने बताया कि बड़ा मजा आ रहा है और अब मैं लंड को कतई बाहर ना निकालूँ।अब मैंने फिर जोर देना शुरू किया और लंड आहिस्ता-आहिस्ता घुसने लगा, आधे से ज्यादा घुस चुका था।अचानक मुझे लगा कि अन्दर चूत में कोई दीवार सी है जो अब लंड को अन्दर घुसने से रोक रही है।‘ओहह्ह…कौमार्यझिल्ली…’ मैंने मन में कहा।‘रिंकी थोड़ा सा यह झटका सह लेना बस. ब्लू पिक्चर सेक्सी छोटी लड़की!उसे देखते ही मेरा लंड टाइट हो गया था। बस उस दिन से उसे चोदने का मन बना लिया था, पर बदनसीबी से कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।एक दिन मैं टीवी देख रहा था, तभी मेरी मम्मी ने आवाज़ लगाई कि काली (उसका नाम) को खेत में से चारा लाने के लिए उसकी मदद करो। मैं उसके पीछे-पीछे चलने लगा उसकी मटकती गाण्ड देख कर मेरा लंड टाइट हो गया और चलते-चलते मेरे पैर से ना जाने क्या टकराया.

अंतत: वह मान गई।मैंने तुरन्त अपने मित्र के अपार्टमेन्ट की ओर गाड़ी मोड़ दी।अमित के अपार्टमेन्ट के पहले वाले मोड़ पर मैंने अन्नू को उतार दिया और कहा- दो-चार मिनट के बाद उस अपार्टमेन्ट में सेकेंड फ्लोर की तरफ सीढ़ी से चली आना। वहाँ पर मैं तुम्हें मिल जाऊंगा. अब मैं कुँवारी नहीं रही !’ मैंने नाश्ता करते हुए कहा।‘बिटुआ अगर हम कल उस वक़्त नहीं पहुँचते तो तेरा अंकल तुझे ज़रूर चोद देता. अब तुम वही करो जो मैंने तुम्हारे साथ किया।मेघा- क्या… मैं इसे अपने मुँह में नहीं ले सकती हूँ।मैं- क्यूँ?मेघा- छि:… कितना गंदा है.

मैं तुम्हें अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ…यह सुन कर मेरे लिंग में एक अजीब सी कठोरता आ गई… और मैं अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ने लगा. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं हार गयी हूँ कि सायरा खान जो कभी भी किसी भी चीज में नहीं हारी, हमेशा ही जीतने वाली सायरा खान आज एक छोटी सी प्रतियोगिता में अपनी सहेली से हार गई.

!’और उन्होंने मेरे कपड़े निकालने शुरू कर दिए और फिर उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू किया।इससे पहले किसी औरत ने मेरा लण्ड नहीं चूसा था, मेरे मुँह से आह निकल गई- आआ.

छोटी सी चूत बड़े से बड़े आदमी को कुत्ता बना देती है, अब ये तीनों बाप बेटे मेरे गुलाम बनने वाले थे।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।. का रहने वाला हूँ। मेरे घर में मैं अपने माता-पापा और एक छोटी बहन के साथ रहता हूँ।पापा चंडीगढ़ में बहुदेशीय कंपनी में मैंनेजर की पोस्ट पर जॉब करते हैं। मेरी छोटी बहन जो 21 साल की है। उसका फिगर 34-26-34 है, वो एम. मैं खाने के लिए बाहर गया और उन दोनों के लिए भी भरपूर मात्रा में खाना पैक करवाया और दो बोतल बियर और एक पैकेट सिगरेट ले लिया.

भोजपुरी सेक्सी पूरा मैं हाँ कहने के अलावा और कहता क्या ! वैसे भी आज तो सपने पूरे हो रहे थे… तभी मैंने उनके बाल जोर से पकड़े और उन्हें अपनी तरफ खींचा उनको चूमते हुए उनके चूचे दबाये… फिर उनके जब मैंने निप्पल चूसे तो वो आह आह के अलावा कुछ नही बोल रही थी। उन्होंने मेरा सर अपनी गीली चूत की तरफ़ धकेला, मैंने अपनी जीभ से उसे चाटना चालू किया… उनकी चूत गीली थी. पहले जब भी कभी वह सासू माँ के साथ हमारे पास आकर रहते थे तो मेरी पड़ोसनें उन्हें मेरे पति के बड़े भाई ही समझती थी.

? पर कहाँ?’‘अरे ऊपर, बैन्क़इट हॉल के ऊपर के सब कमरे में मेहमानों के लिए बुक, किसी में भी घुस जाएँगे, कोई ना कोई तो खाली मिल ही जाएगा. ?तो उसने ‘हाँ’ कहा और मैंने उसे रसोई में ले गया।उसने स्लिम फिट साड़ी पहन रखी थी। क्या माल लग रही थी। मेरी तो हालत खराब हो गई। वो चाय बनाने लगी, मैं उसके साथ खड़ा हो कर बातें करने लगा।अचानक उसका पल्लू सरक गया तो उनके मम्मों की दरार दिखने लगी, मैं तो आँखें फाड़ कर देखता ही रह गया।गजब के थे यार 34 तो होंगे ही. मैं भाभी से अलग हुआ- क्या कर रही हो यार? खा जाओगी क्या मेरे होंठों को!तो भाभी मेरी तरफ देखकर हंसने लगीं.

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अब मैं उसको अपने पूरे जोश से चोदने लगा, वो भी अपनी गांड को पीछे की तरफ़ हिला हिला के मेरे हर एक धक्के का जवाब दे रही थी और अपनी गांड की गहराइयों में मेरे लंड का स्वागत कर रही थी. 5 इन्च के शेर के साथ उसके सामने था।वो मेरा लण्ड पकड़ कर ऊपर-नीचे कर रही थी और मज़े ले रही थी।मैंने उससे कहा- डर तो नहीं लग रहा है?तो बोली- जब प्यार किया तो डरना क्या. और जिस तरह की घटना का मैंने जिक्र अपनी कहानियों में किया था, तो लड़कों के इस तरह के पत्र स्वाभाविक भी थे, लेकिन मेरे लिए आश्चर्यजनक बात यह थी कि लड़कियों के भी बहुत ज्यादा इमेल आये, जो दोस्ती करना चाहती थी और उनमें से कुछ मेरी मित्र भी बन गई फेसबुक पर, दो तीन लड़कियों से फोन पर बात भी हुई और उन्होंने मुझसे फोन पर ही उत्तेजक कहानियों की फरमाइश भी की जिसे मैंने पूरा भी किया.

वो बोली- यह कहाँ ले आये?मैंने कहा- नीलू, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।तो वो बोली- वो तो तुम घर पर भी कर सकते थे, यहाँ क्यों लाये हो?मैंने कहा- नहीं, यह बात मैं यहीं करना चाहता हूँ।तो वो बोली- हाँ, बोलो?मैंने डरते डरते उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मेरी चुदाई की इच्छा पूरी हुई थी इसलिए मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं आगे क्या करूँ.

!!!लण्ड देखा नहीं चूत को चुदाई का मन हो चला।यही बात मेरे लौड़े की कि चूत देखी और मचल गया, मैंने भाभी को हाँ में मस्तक हिला के जवाब दिया।भाभी ने फोन किया और वो जो बोली उससे मेरा लण्ड और भी उठ गया.

दीदी की ज़ोर से आवाज़ निकली तो उसने पूछा- दर्द हो रहा है क्या?तो दीदी ने ‘हाँ’ बोला लेकिन बोली- तुम रुकना मत, पूरा लंड चूत में डालो. बहादुर ने एक झटके से ही अपना लोकी सा लण्ड पारो की फूलगोभी सी चूत में घुसेड़ दिया तो पारो कराह कर बोली- आहऽऽऽ! अरे मेरे यार, तेरा लण्ड है या कुतबमीनार! हायऽऽऽ चोद मेरे माईया चोद उफ रेए, आज किसी मादरचोद से पाला पड़ा है, सीईईई ले राजा पाड़ के रख दे अपनी पारो को!यह कह कर पारो अदा से अपने पांव के अंगूठे पकड़ लिये. मजे से राजू ने रीटा को इस कदर बाहों में दबाया, तो रीटा को लगा कि उसके ऊपर से बुलड़ोज़र निकल गया हो और हड्डियाँ जैसे चरमरा सी उठी.

अब धीरे-धीरे मैं उसको चूमता हुआ नीचे की तरफ़ बढ़ा और मैंने एक ही झटके में उसका पेटीकोट निकाल कर उससे अलग कर दिया, जैसा मुझे यकीन था उसने काली रंग की जालीदार चड्डी पहनी थी, मैं यह देखकर हैरान था कि उसकी चड्डी पूरी तरह से उसकी चूत के रस में भीगी हुई थी और कमरे की लाल रोशनी में गजब की चमक रही थी. ’ करते-करते उसके मुँह को अपने कामरस से भरने लगा।उसने पूरा का पूरा कामरस गुटक लिया और जब तक मैंने मुँह से निकालने को नहीं कहा. कभी भी बारिश हो सकती है।मैंने कहा- ठीक है… हम जल्दी ही वापस आ जायेंगे।कॉलेज से निकलने के बाद हम 4-5 बड़े रिटेल शोरूम पर गए और अपने फील्ड प्रोजेक्ट के लिए जानकारी ली।उसके बाद जब हम वापस जाने लगे तो बादल और घने हो गए थे, लेकिन बारिश शुरू नहीं हुई थी तो मैंने सुमन से कहा- हम वापस कॉलेज चलते हैं, अभी बारिश शुरू नहीं हुई है।तो सुमन कहा- हाँ.

!उसने अब अपना हाथ मेरे नितम्बों पर रख दिया। मुझे अपनी और कसके खींच लिया और अपनी कमर को घुमाने लगा। मैंने महसूस किया कि सलवार के ऊपर से ही उसका लिंग मेरी योनि से लग रहा है।हम काफी देर इस अवस्था में एक-दूसरे से चिपके आलिंगन करते रहे।तभी अमर ने कहा- अब अन्दर चलो, मुझसे रहा नहीं जा रहा है, मैं अपने लिंग को तुम्हारी योनि के अन्दर डालना चाहता हूँ.

हार्ड बीएफ सेक्सी हिंदी: मैंने वहीं पैन्ट की चैन खोली और चालू हो गया।आंटी मेरे लंड को देख रही थी और वो बोली- इसकी साइज़ क्या है?मैं बोला- खुद ही नाप लो. मैंने अपनी मौसी की चुदाई करके चुदाई करना शुरू किया था, वो मेरी मम्मी की सहेली थी, मैं उन्हें मौसी कहता था.

ऊपर से रीटा नेलपालिश की टचिंग करती हुई अश्लील गाना गाने लगी- हाय जागी बदन में ज्वाला, सईयाँ तूने ये क्या कर डाला!रीटा की चूत का चीरा एकदम चकुंदर सा सुर्ख और झिलमिला रहा था. सोनिया मेरी तरफ देखकर बोली- अब तू फिर से मुझसे माफ़ी मांगेगी लेकिन इस बार घुटनों पर गिरकर, मेरे पैरों को चाट कर और मेरे पैरों को चूमेगी. !मैंने खीसे दिखाते हुए हेमा को कहा- तू चुपचाप चुदा, मुझे कुछ नहीं हुआ।मैंने कृपा को पकड़ कर अपनी और खींचा और अपनी टाँगें उसके जाँघों के ऊपर रख दिया और कहा- चोदो.

मौका पाकर रीटा राजू से गलत-गलत सवाल पूछती, तो राजू के पसीने छूट जाते, जैसे– लड़के खड़े होकर पिशाब क्यूँ करते हैं?– क्या लड़कियाँ लड़कों का दैहिक शोषण नहीं कर सकती?– लड़के अपने दुधू क्यों नहीं छुपाते?– सुहागरात में लड़का लड़की क्या करते हैं?– ब्लयू फ़िल्म क्या होती है?– सैक्सी का क्या मतलब है?– क्या मैं सैक्सी हूँ?रीटा के उलटे-सीधे सवालों पर राजू बगलें झांकने लगता और रीटा को डाँट कर चुप करवा देता.

हम नहीं जानते कि हम दोनों इस तरह एक दूसरे के होंठों के रसपान का आनन्द कितनी देर तक लेते रहे, पर हाँ हम दोनों एक दूसरे के होंठों के रसपान का आनन्द तब तक लेते रहे जब तक मेरा मुँह नहीं दुखने लग गया. काश मेरे रसभरे होंठों में किसी बहनचोद का मोटा फौलादी लन हो गले तक सटक के, आँखों में आँखे डाल कर चुसड़ चुसड़ कर मैं उसके लण्ड की झड़न के साथ, चूस कर ट्टटे भी पी जाऊँ. रह रह कर उस नन्ही नवयौवना के सुकोमल अंगों में तनाव व कसाव आ जाता और कोरी फुद्दी किसी फड़फड़ाते लण्ड को गपकने के लिये कुलबुला उठती थी.