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सम्पादक जूजाआपी ने मेरे लण्ड को चूस कर मेरा माल अपनी छाती पर गिराया और फिर मेरे लण्ड के जूस को काफ़ी सारी मिक़दार अपनी उंगली पर उठा कर अपने मुँह चखा और मुझे आँख मार कर आँखें गोल गोल घुमा कर कहा- उम्म्म यूम्मय्ययई.नई चुदक्कड़ लड़कियों और सेक्सी लण्ड की भूखी आंटियों को मेरा नमस्कार। मैं अनंत विक्रम सिंह एक बार फिर आपके पास अपनी एक नई और ताज़ी कहानी लेकर आया हूँ।पहले मैं आप सबका शुक्रिया अदा करना चाहूँगा.

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जब सिमरन थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। अब सिमरन को भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।मैंने धक्कों की गति तेज कर दी।पूरे कमरे में सिमरन की ‘आहें. अपनी मम्मी के साथ ऐसा करेगा?मेरा यह जवाब सुनकर वो रोने लगा और बोला- मम्मी मुझे ऑपरेशन नहीं कराना. जबकि आपी वगैरह सब अपने कमरों में ही थे।मैंने खाना खाया और इस दौरान अब्बू से बातें भी करता रहा.

वो निकाली और एक टाइमिंग वाली गोली खुद खा ली और आई-पिल आपी को खिला दी।मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैं अंडरवियर पहने हुए ही आपी के ऊपर आ गया और आपी की सलवार खींच कर नीचे को उतार कर सोफे पर फेंक दी।फिर आपी को हल्का सा ऊपर उठा कर उनकी कमीज़ भी उतार दी।आपी बस ब्रा में थीं. शायद उनको रूपा भाभी के इरादों का अंदाजा था।उन्हीं में से एक भाभी मुझसे बोलीं- क्यों देवर जी, कैसी लगी हमारी बहती हुई नदी?वो धीमे-धीमे हँसने लगीं. मैं उसको हॉस्टल छोड़ने जाया करता था और लॉन्ग ड्राइव के दौरान लिप किस करने के साथ-साथ गोलाइयों को भी प्यार कर लिया करता.

अब तो हाथ हटा लोजिये और आपके प्यार की कुछ बूँदें मेरी ईमेल पर भी डाल दीजिएगा।[emailprotected]. कि मेरा लण्ड जिस चूत में पहली दफ़ा जाए वो मेरी अपनी सग़ी बहन की चूत हो. जब मैं 12 वीं क्लास में था। मैं महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में पढ़ता था।हमारे पड़ोस में एक बड़ा परिवार रहने के लिए आया था, उस परिवार में बहुत लोग थे।दो भाई.

मगर फिर भी उनके चेहरे की भाव भंगिमाओं को देख कर पता चल रहा था कि उन्हें भी आनन्द आ रहा है।जब मैं उनके उरोज को जोर से मसलता तो दर्द के कारण भाभी के होंठ थोड़ा भिंच जाते और जब हल्के से सहलाता तो उनका मुख आनन्द से ‘आह. रंग गोरा है।मैं कानपुर से हूँ पर पिछले 4 साल से दिल्ली में रह रहा हूँ!मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैंने अन्तर्वासना पर कई सेक्स कहानियाँ पढ़ी हैं.

पागल हो गए हो क्या?मैंने आपी का हाथ पकड़ा और अपने ट्राउज़र के ऊपर से ही अपने खड़े लण्ड पर रख कर कहा- आपी ये देखो मेरा बुरा हाल है.

और इतना बोलते ही वो रोने लगी।मैंने उठ कर उसको कंधे से पकड़ कर खड़ा कर दिया और चुप कराने के बहाने उसकी पीठ और कमर पर हाथ फेरने लगा।जब उसने कोई विरोध नहीं किया.

तो उन्होंने बताया- दादी माँ सो गई हैं।उस दिन भाभी को ऊपर की सफाई के अलावा मेरा रूम भी पोंछना था. उन्होंने हँसते हुए फिर से चूत पसार दी मैंने उनकी दोनों टांगों को कन्धे पर रखकर फिर उन्हें दबा कर चोदा और एक बार फिर उनकी चूत तर कर दी।उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहनने शुरू किए और वापस बारात में आ गए।यहाँ आकर देखा सब नार्मल था. अब नहीं रूक सकती मैं… मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी ही हूँ और हमेशा तुम्हारी ही रहूँगी।’फ़िर शायद हमने किसी के आने की आवाज़ सुनी.

उन पलों को रोचक और इस मंच के पाठकों की पसंद के अनुसार तड़का अवश्य लगाया है।यह मेरे और पायल के बीच के पहले सम्भोग की गाथा है। आज भी जब उन पलों को याद करता हूँ. मैं उन्हें इस हालत में देखने में इतना खो गया कि ना जाने कब मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया और मैं मुठ मारने लगा. तो पूरा लण्ड उसकी चूत में समा गया।उसकी इस बार चीख निकली तो शायद पूरे होटल ने सुनी होगी।मेरा लण्ड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।फिर मैं तेजी सी आगे-पीछे करने लगा और वो भी एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह मेरे हर शॉट का जवाब उछल-उछल कर दे रही थी।पूरी पिच हमारे रस से गीली हो चुकी थी।लम्बी और अकल्पनीय चुदाई के बाद हम दोनों झड़ने को हुए.

एक दिन मैं बिना यूनिफॉर्म के स्कूल गया। मुझे याद नहीं है किस कारण से मैं बिना यूनिफॉर्म के स्कूल गया था।उसी दिन स्कूल का डायरेक्टर और मैंनेजमेंट आया हुआ था। सभी की बहुत पिटाई और फाइन लग रहा था।मैं बहुत डर गया था।क्लास-क्लास में जाकर जो विदाउट यूनिफॉर्म में थे.

अपनी पिछ्ली रात के बारे में सोच रहा था। मेरी आँखें आईशा को ढ़ूँढ रही थीं।उतने में मामा ने मुझे कैमरा देते हुए कहा- आज अपना घर बहुत सुंदर लग रहा है. मैं सो जाऊँगा सोफे पर।फिर हम दोनों सो गए।सोफे पर मुझे बहुत प्रॉब्लम हो रही थी तो मेरी बेचैनी देख कर उन्होंने बोला- तुम भी बिस्तर पर ही आ जाओ।मैं भी बिस्तर पर ही जाकर सो गया।कुछ समय बाद. एक भी दाग नहीं था।उसकी पैंटी उसके रस से पूरी भीगी थी बड़ा सा गीलापन का धब्बा साफ महसूस हो रहा था।पायल पूरी तरह से उत्तेजना में थी। उसका एक हाथ मेरे लण्ड को सहला रहा था.

ऐसा देख कर बेचारे के लण्ड से पानी निकल रहा होगा।उनकी बात भी सही थी, शायद वो ज्यादा अनुभवी जो थीं. ’मैंने भी गति बढ़ा दी और रगड़ कर उनकी चूत पेलाई करने लगा।फिर मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा और खुद बिस्तर पर लेट गया। वो मेरे खड़े लौड़े पर बैठ गईं और कमर उछाल-उछाल कर चुदने लगीं।‘हाय हाय मर गई. जिससे आंटी की चूत चुदने की पोजीशन पर आ गई।अब मैंने अपना लण्ड आंटी की चूत पर रखा और लण्ड फिराने लगा।तभी आंटी बोलीं- अब और मत तड़पा मेरे राजा चोद मुझे.

नमस्कार मित्रो, मेरा नाम परीक्षित कुमार है।जो मैं जो लिख रहा हूँ, यह मेरे एक मित्र की समस्या है, सुनिए उन्ही के मुख से-मेरा नाम अनुज है, उम्र 27 वर्ष है शादीशुदा हूँ, शादी को 4 साल हो चुके हैं.

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’‘देखो मौसी तुम्हें मज़ा आ रहा है और मुझे भी ऐसी जवान और खूबसूरत औरत की चूत से अपना उद्घाटन करने का मौका मिला है और पहली बार आप जैसी रसीले बदन वाली औरत को चोदने का मौका मिला.

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बल्ब की रोशनी भी बंद कर दी। मैंने धीमी वाली लाईट ऑन कर दी और आपी का इन्तजार करने लगा।तभी आपी की आवाज़ आई- सगीर. तुम एक बार बाहर जाओ मुझे कपड़े बदलने हैं।मैंने मजाक में कह दिया- ऐसे ही बदल लो ना. और मेरी सिसकारी निकल जाती।दोस्तो, इस बार पायल ने मेरे लौड़े को अपने मुँह में स्थान दे दिया है और मुझे पूरा विश्वास है कि इसका स्वाद पाकर वो जल्द ही अपनी चूत में भी मेरे लवड़े को जगह दे देगी।आप मुझे ईमेल लिखना न भूलें।कहानी जारी है।[emailprotected].

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’ निकल गई, वो और भी मदहोश और दीवानी होती जा रही थी।वो मेरा लण्ड ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी और कहने लगी- साले हरामी. अब आज करूँगी।’आपी ने ये कहा और पजामे को घुटनों तक पहुँचा दिया।मैंने नज़र भर के आपी की चूत को देखा।टाँगों के बंद होने की वजह से सिर्फ़ चूत का ऊपरी हिस्सा ही दिख रहा था।मैंने अपना हाथ बारी-बारी आपी की खूबसूरत रानों पर फेरा और अपना अंगूठा चूत से थोड़ा ऊपर रख कर चूत को ऊपर की तरफ खींचते हुए आपी से कहा- आपी टाँगें खोलो ना थोड़ी सी.

वैसे भी दिन में 12 से 4 इंस्टिट्यूट क्लोज़ रहता है और उस टाइम पर मैं घर पर ही रहूँगी।मैंने कहा- ठीक है. तो मेरे तरीक़े से मुझे संभालने दें ना।‘अरे मैंने तो वैसे ही मज़ाक़ में कह दिया था. उसके जिस्म को अच्छे से साफ किया, उसकी चूत को अच्छे से धो दिया, टॉवेल से चूत की सिकाई भी कर दी।पायल अब कुछ तरोताज़ा महसूस कर रही थी पर उसकी आँखों की हया बार-बार दिख रही थी।मैं जिस तरह से उसका ख्याल रख रहा था.

फिर 5 मिनट बाद सर की वाइफ आ गईं।वे मुझे दूर से देख कर ही मंद-मंद हँसने लगीं।शायद वो मेरी इंटेन्शन समझ रही थीं।हम अन्दर गए. कोई अच्छी लड़की मिली ही नहीं।कोमल- क्यों सब बुरी और बदसूरत हैं क्या?मैं- अगर आप जैसी सुन्दर और सेक्सी लड़की मिल जाए. जो आज तक किसी को नहीं बताई है। मेरी गर्लफ्रेंड रचना (परिवर्तित नाम) जो मेरे पड़ोस में रहती है, इस घटना के समय वो 18 साल की थी और आज 21 साल की मस्त माल बन गई है। उसका फिगर 32-34-28 का है।उसी के साथ मेरी कहानी आज से तीन साल पहले की है.

पर जब फिल्म स्टार्ट हुई तो हॉल में बिल्कुल अंधेरा हो गया था। हॉल में हमारे आगे की सीटों पर कुछ गिने-चुने ही लोग थे।हम फिल्म देख रहे थे.

मेरे अपने मुँह से ये अल्फ़ाज़ अदा हुए तो मुझ पर इसका असर भी बड़ा शदीद ही हुआ और मैंने जैसे अपना होश खोकर बहुत तेज-तेज झटके मारना शुरू कर दिए।मेरे इन तेज झटकों की वजह से आपी के मुँह से ज़रा तेज सिसकारियाँ निकलीं और वो अपने जिस्म को ज़रा अकड़ा कर घुटी-घुटी आवाज़ में बोलीं- आह नहीं सगीर. तो मेरा लण्ड उनके कूल्हे से लगा हुआ था और धीरे-धीरे टाइट हो रहा था।अब मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो चुका था। शायद दीदी ने उसे महसूस कर लिया था.

’अब मैं भी ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा, चुदाई की कामुक आवाजें लगातार गूंज रही थीं।फिर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया और उसके पीछे से झटके मारने लगा।मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़ लिए और ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा।मैं पहले नहीं झड़ा था. उसके बाद फिर से एक बार चोदा।मैं वहाँ 2 दिन तक रुका और पूजा की चूत खूब बजाई।अब जब भी जाता हूँ तो नींद की गोलियां लेकर जाता हूँ और पूजा की चूत का खूब बाजा बजाता हूँ।मेरी साली की ठुकाई कैसी लगी. मुझे माफ कर देना। मैं अपने आपको रोक नहीं पाई।मैंने कहा- मौसी मेरी जान.

उसके बाद फ्रेंड के घर जाऊँगी।बस मैं चुदने के लिए निकल गई।फिर मैं राज से मिली और फिर हम दोनों उसके फ्रेंड के घर गए।उसके फ्रेंड के घर पर कोई नहीं था। वो अन्दर जाते ही मुझे एक कमरे में ले गया और जाते ही मुझे किस करना शुरू कर दिया और मेरी गाण्ड दबाने लगा।मैंने कहा- रुक तो. क्योंकि आज वो सुहागरात वाली दुल्हन की तरह सजी थीं।दोस्तों क्या बताऊँ. जो कालेज की तरफ आ रहा था।उसमें से एक दम्पति उतरे तो मैंने भी देख कर नजरें फिरा लीं।परन्तु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, मैंने न चाहते हुए भी फिर उधर देख लिया।उसमें से एक चाँद से मुखड़े वाली गुलाबी होंठों वाली.

देसी लड़कियों की चुदाई बीएफ सुबह तुम्हें स्कूल भी जाना है।हम दोनों ही बिस्तर पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगे।सुबह मैं देर से ही उठा था. मैं क्या करूँ?उनकी इस तरह की बेबाक बात सुनकर मैं पहले तो बड़ा चकराया।फिर मैंने उन्हें कहा- भाभी मेरे लायक कोई ‘सेवा’ हो तो जरूर बताएँ.

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बड़े बदमाश हो।मैंने अपना हाथ पीठ से हटा कर उसकी बाईं चूची पर रख दिया और चूची को दबा दिया.

आज तुमने मेरे ऊपर जादू सा कर दिया है।मेरा दूसरा हाथ उसकी जांघों को सहलाता हुआ पैंटी पर आ कर रुक गया।पायल ने अपनी जांघें जोर से भींच लीं और मेरा हाथ पकड़ लिया- राहुल प्लीज वहाँ नहीं. वैसे हमें ज़िन्दगी एक बार मिली है और इसे खुल कर बढ़िया दोस्त बना कर उनके साथ ज़िन्दगी जीना भी चाहिए। ख़ास तौर पर सेक्स के मामले में हम बाकी देशों से बहुत ज्यादा पीछे हैं।अर्श- जी सर.

फिर धीरे से झुक कर अपने मुँह में ले लिया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, बहुत देर तक उन्होंने मेरा लंड चूसा।कुछ ही पलों बाद मुझे लगा अब मैं झड़ने वाला हूँ. मैं उसके होंठों पर टूट पड़ा और ज़ोर-ज़ोर से स्मूच करने लगा।वो भी आँख बंद करके मज़े लेने लगी।इस स्थिति में हम लोगों ने कुछ मिनट गुजारे।अब मैंने उसके चूचों को मसलना चालू कर दिया. जैसे कि किसी गुब्बारे को चूस रहा हूँ।मैं उसके निप्पलों को दाँतों से काट रहा था।फिर वो और जोर से सीत्कारने लगी और बोली- ओहहह.

इतने ज़ोर से काटा है।आपी ने खिलखिला कर हँसते हुए कहा- याद रखना बेटा.

प्लीज़ रो मत।आपी ने गुस्से से कहा- फिर क्या करूँ? मर जाऊँ क्या?तो मैंने आपी को पकड़ के ज़ोर से उठाया और झिझोड़ कर कहा- आपी होश में आओ. वरना मुझे अकेले बोर फील होगा।तब मैंने भाभी से कहा- दादी माँ को क्या जवाब दूँ?पर फिर इसकी भी तरकीब उनके पास थी. क्या अब इन्हें निचोड़ ही डालेगा?पर वो नहीं रुका और फिर वो मेरी चूचियों को चूसने लगा। वो मेरे निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा और उन पर काटने लगा.

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सच बताओ।मैंने कहा- मैं इस टाइम पॉर्न मूवी देख रहा हूँ।चूंकि हम सेक्स के टॉपिक पर अक्सर बात करते थे. प्लीज़ आपी माफ़ कर दो मुझे।यह कह कर मैंने आपी को फिर बाँहों में लेना चाहा. मैं समझ चुका था कि उसका यह ज़िंदगी का पहला ऑर्गेस्म हुआ है।वो अभी भी मेरी बाँहों में थी.

शायद इसलिए वो ठंडी हो गई है। भला कौन अपनी चूत को भुरता बनाना चाहेगी। गजब की ट्रिक है तुम्हारी. तभी ये जल्दी सो गए।मैं उसको लेकर उसके कमरे में चला गया और बातें करने लगे।मैंने नॉनवेज बातें शुरू कर दीं।उधर दवाई अपना असर दिखा रही थी।इसी बीच मैंने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगा।फिर मैंने अपने दिल में दबे प्यार का उससे इजहार किया. रूको मैं पानी ले कर आता हूँ।मैं उठने लगा तो आपी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक कर बोलीं- सगीर तुमने खुद तो कहा था कि मैं आपको अपने प्यार में पागल कर देना चाहता हूँ.

तो सामने से आपी भी अपनी चूत को मेरी तरफ दबातीं और मेरी कमर पर अपने पाँव की गिरफ्त को भी एक झटके से मज़बूत करके फिर लूज कर देतीं और उनके मुँह से ‘आह. मुझे देर हो रही है।मैंने जल्दी से भाभी को नीचे घुटने के बल बैठा दिया और लण्ड को नेहा को चूसने को कहा. होटल में मुझे अपनी पुरानी पहचान वाली मिल गई थी उसके पति के साथ मैंने उसे चोदा और उसकी इच्छानुसार बहुत सारे लौड़ों से चुदने की उसकी इच्छा के लिए व्यवस्था बनानी शुरू कर दी.

चिंकी मैं और हमारा एक दोस्त सन्नी।हमारी सबकी दोस्ती अच्छी चलने लगी।बात है. मेरा दावा है कि वो जगह देख कर तुरंत मुठ मारने लगेगा।मेरी और कोमल भाभी की खूब बनती थी। हम हँसी-मजाक करते थे.

मोनू चिहुंक पड़ा।जैसे ही उसके लंड की खुशबू मेरे नाक में गई, मैं मदहोश हो गई।कितने दिन बाद लंड की खुशबू सूँघी थी।उसका सुपारा एकदम चमक रहा था और बहुत बड़ा था।मोनू का सुपारा मेरे पति के सुपारे से कहीं ज़्यादा बड़ा था।मैंने अपनी जीभ सुपारे पर फिरानी शुरू की।मोनू ने मेरे सर के बाल पकड़ लिए और बुदबुदाने लगा- ओह आह.

जिससे मेरा शरीर मम्मों से लेकर जांघों तक पूरा ढक गया।जब मैं नहाकर बाथरूम से बाहर निकल रही थी. बीएफ फिल्म अंग्रेजीबहुत तंग करता है।इसी बहाने से मैंने बेबी को हँसाने के लिए उसके चेहरे पर हाथ लगाया और धीरे से आंटी के मम्मे को हल्का सा टच किया। आंटी को शायद पता नहीं चला कि ये मेरा हाथ है या बेबी का मुँह है।अब मैं टीवी की तरफ़ देखता हुआ आंटी के मम्मों को धीरे-धीरे टच करने लगा। कुछ मिनट बाद मुझसे कन्ट्रोल नहीं हो रहा था। मैं उठ कर बाथरूम में गया और मुठ मार कर मैंने अपना माल निकाल दिया।बाहर आ कर देखा. किन्नर का सेक्सी वीडियो बीएफलेकिन मैं मज़े को फील नहीं कर पा रहा था और वो बात ही नहीं थी जो चूत में लण्ड डालने से होनी चाहिए थी। शायद इसकी वजह यह थी कि मैंने आपी की मर्ज़ी के बगैर उनकी चूत में लण्ड डाला था।शायद आपी की नाराज़गी का डर था. आई रियली लव यू।फिर मैंने आपी को आँख मारी और शैतानी से मुस्कुराते हुए कहा- अब ये मेरा रोज़ सुबह-सुबह का नाश्ता हुआ करेगा.

लगातार मुझे मसल रहे थे और मेरे कपड़े भी उतारने लगे।अब मैं गर्म हो चुकी थी, यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था.

जिसमें से उसका लंड किसी मिसाइल की तरह दिखाई दे रहा था।वो मेरे मुँह के पास आकर खड़ा हो गया और बोला- चाची जी, मेरा मुन्ना आपको देखना चाहता है।उसके इतना बोलते ही मैंने उसके लण्ड को उसकी चड्डी से बाहर निकाल दिया और उसे अपने हाथों से सहलाने लगी।आलोक- चाची अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा. लेना है क्या?मैंने हाँ में सिर हिला दिया।वो फिर बोला- कोई जगह है आस-पास?मैंने ना में सिर हिला दिया।तो उसने कहा- ठीक है, मेरे पीछे पीछे आओ, मैं ले चलता हूँ तुम्हें!उसने अपना खड़ा लंड मुश्किल से एडजस्ट करते हुए पैंट की चेन में अंदर धकेला और शर्ट से उसको ढकते हुए मूत्रालय के बाहर निकल गया. आपके सामने भी वो मुझे छोड़ने को तैयार नहीं था। अच्छा हुआ आप वक़्त पर आ गईं.

तो मेरा हौसला बढ़ता चला गया और फिर मैंने उनके ब्लाउज के सभी बटन खोल दिए।उन्होंने अपने ऊपर शाल को ठीक से ओढ़ लिया ताकि अगर कोई आए भी तो पता नहीं चल सके कि हम वह क्या कर रहे थे।फिर मैं अपना हाथ उनके साये में घुसा कर बुर को सहलाने लगा. तो मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा।वो लपक कर मेरे लण्ड को पकड़ कर चूत पर रख कर बैठ गई और तेज़-तेज़ गांड हिलाने लगी।मैं उसके दूधों के साथ खेलने का मज़ा ले रहा था।दोस्तो, मेरा अपना अनुभव है जो मज़ा एक नई लड़की नहीं देती. मेरा उधर से जाने का बिल्कुल मन नहीं था। मेरे मन में सिर्फ छाया ही बसी थी। परन्तु मजबूरी में मुझे उधर से वापस आना पड़ा।शाम को जब मैं अपने घर के बाहर बैठा था, उस वक्त छाया ने मेरे करीब आकर मुझे चिढ़ाने के अंदाज में मुझसे कहा- मनुजी.

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और मुझे अपने उन सेक्स से भरे चूचों के दर्शन करवातीं।आख़िर एक दिन मैंने ये तय कर लिया कि किसी ना किसी तरह भाभी के सेक्सी जवानी को चखना ही है. आपी ने अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए और उनका जिस्म एकदम अकड़ गया और चंद लम्हों बाद ही उनके जिस्म ने 3-4 शदीद झटके खाए और मुझ साफ महसूस हुआ कि जैसे आपी की चूत मेरी ज़ुबान को भींच रही हो।मैंने ज़ुबान अन्दर-बाहर करना जारी रखी. रोहन टीवी देखने लगा।तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया कि क्यों ना मंजू के साथ शराब पीने का प्लान बनाया जाए।मैंने मंजू से कहा- आप मेरे साथ शराब पीना पसंद करेंगी।मंजू ने कहा- वैसे तो मैं शराब नहीं पीती हूँ.

तभी तो वो मेरे पास इन कपड़ों में आकर सोई हैं।यह बात मेरे दिमाग में आते ही मेरी ना जाने मुझमें कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैंने भाभी के ब्लाउज के बचे हुए बटन भी खोल दिए और बटन के खुलते ही भाभी के उरोज स्वतः ही बाहर आ गए.

जो उसके किसी और नाम से था।मैंने वो ईमेल नोट कर ली और भी उसमें भी बहुत सारी सेक्सी स्टोरीज की इमेल्स थीं, जो उसने अपनी दूसरी मेल पर सैंड की हुई थीं।इसके अलावा मैंने उसके दोनों गूगल प्लस एकाउंट्स को अपने गूगल प्लस में ऐड कर लिया।दूसरे दिन मुझे उसकी कॉल आई। उसने ‘नमस्ते’ बोलने के बाद मुझसे कहा- सर अपने मुझे कॉल करने को कहा था.

मैंने पीछे से चुदाई करते हुए एक उंगली उसकी गांड में डाल दी जिससे वो एकदम चिहुँक पड़ी और बोली- आज सिर्फ चूत को सुकून दो, गांड अगली बार फाड़ना।मैं लण्ड को उसकी चूत में पूरा बाहर लेकर एकदम से अंदर डाल रहा था, जिससे उसको मजा आ रहा था।हमारे शरीर आपस में टकराने से फच्च फच्च फच्च…. तो वो अन्दर चली गईं।मैं भी अपने कमरे में वापस आया तो फरहान सो चुका था. ब्लू हॉट बीएफइसलिए उस दिन रात दस बजे तुम मेरे घर आ जाना।उसने मुझे अपना एड्रेस दे दिया।मंगलवार आने में दो दिन बाक़ी थे, अगला दिन और रात में मैंने उससे कॉल करने की कोशिश की और मैसेज भी किए.

तो किसी और के आने की कोई गुंजाईश नहीं थी।आते ही उसने मेरे कमरे के साफ-सुथरेपन की तारीफ की।मैंने उसे एक गिलास पानी दिया।वो सफेद रंग के टॉप में गजब लग रही थी। उसके अन्दर आते ही टल्कम पावडर की हल्की सी खुशबू पूरे कमरे में छा गई।हमने 5-10 मिनट यहाँ-वहाँ की बातें की. पर भाई का लण्ड मेरी चूत से फिसल गया और मेरे पेट पर आ गया।मेरे मुँह से ‘आहह’ निकल गई।भाई ने फिर से अपना लण्ड मेरी चूत पर रखा और एक हल्का सा धक्का मारा।इस बार भैया के लण्ड का सुपारा मेरी चूत में घुस गया और मेरी चूत में दर्द होने लगा. ये काम भी तो जरूरी ही था।अपना काम खत्म करने के बाद मैं भी सोने के लिए लेट गया और आगे का सोचने लगा कि अब बात को आगे कैसे चलाया जाए और इसी सोच में जाने कब नींद ने तमाम सोचों से बेगाना कर दिया।मेरी बहन को भी अब इस सब खेल में मज़ा आने लगा था और उनकी झिझक काफ़ी हद तक खत्म हो गई थी।मैं हमेशा यह सोचता था कि लड़कियाँ.

मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसे चूमने लगा।उसने कहा- इतनी भी क्या जल्दी है. जिससे आपी को दर्द हुआ।मैं खुद भी आपी की चूत के पर्दे को डिल्डो से फाड़ना नहीं चाहता था। बल्कि मैं चाहता था कि मेरी बहन की चूत का परदा मेरे लण्ड की ताकत से फटे.

आओ मुझे चूसो।होंठ के साइड की मुलायम दीवारें जो कि एकदम चिकनी दिख रही थीं.

कभी उनके टट्टों को भी मुँह में भर के चूस लेती थी।उनकी झांटों की महक ने मुझे पागल बना दिया था।मैंने सोचा साली रंजना देख तेरी किस्मत एक ट्रक वाले से चुद कर तुझे कितने अमीर लोगों के पास लाई है। ये सब तेरा हुनर ही है. तो उसकी वो मैक्सी गाण्ड की दरारी में फंस जाती थी।उसकी चाल में चुदने की कुलबुलाहट थी. क्यूंकि उसका मोबाइल नम्बर अभी भी मेरे पास था।दिल्ली आकर वही अपनी सिगरेट, किताब और पोर्न मैगज़ीन वाली जिन्दगी में मैं भावना को कब भूल गया.

बंगला सेक्सी बीएफ अम्मी ने सुस्ती से एक जम्हाई ली और कहा- तो तुम और तुम्हारे बाबा ही हो ना. तो उन्होंने मना कर दिया।मैंने खुद वहाँ आने का इशारा किया तो उन्होंने गर्दन हिला दी।मैंने अपने कमरे की लाईट बंद की और दरवाजे को ऐसे ही उड़का दिया.

मैं सो नहीं पाता था, हर जगह मुझे सिर्फ नंगी तिलोत्तमा भाभी नज़र आतीं।लेकिन उनसे मिलने की हिम्मत नहीं होती थी।एक दिन शाम को मैं अपने घर की छत पर टहल रहा था. मुझसे और सहन नहीं होता।तो मैंने बिना देर किए उसे फर्श पर लिटाया और उसकी चूत पर अपने लंड का सुपारा रगड़ने लगा।वो कहने लगी- प्लीज़ जल्दी अन्दर डाल दो ना. जिससे आपी के मुँह में बचे हुए दूध की धार बाहर आपी के होंठों से होती हुई आपी के बूब्स के अन्दर जाने लगी।आपी के गर्दन गीली हो गई।कुछ सेकेंड किस करके आपी बोलीं- सगीर तुम पागल कर दोगे मुझे.

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मानो राजू उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हो। लेकिन राजू पर उसके चिल्लाने. उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और जीजू ने अपने अंडरवियर को उठाया और मेरी चूत को साफ करने के बाद चूत को चूमने लगे।कुछ देर के बाद जीजू ने मुझे घोड़ी बनने को कहा. उसने कहा- कांच का टूटना शुभ होता है।मैंने कहा- ऐसा कैसे शुभ हो सकता है?पूनम ने जवाब दिया- अरे होता है।मैंने जल्दी से अपने होंठों से उसके होंठों को चूमते हुए कहा- ऐसे?उसने शर्मा कर आँखें नीचे झुका लीं और कुछ नहीं कहा।मेरा हौंसला और बढ़ गया, मैं उससे सट कर बैठ गया.

आज तू और मैं मिलकर कल रात की सारी कसर को पूरा कर लेंगे।मेरे इतना बोलते ही उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और फिर हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतार दिए और फिर रोहन ने उस दिन लगातार तीन बार मुझे चोदा।आपको यह कहानी कैसी लगी, आप अपने विचार मुझे भेज सकते हैं।[emailprotected]. उसके चूतड़ उछले और वो शांत हो गई, चूत का गर्म कामरस मुझे लण्ड पर महसूस हुआ, चूत की जकड़न भी महसूस हुई.

धीरे-धीरे उनके पूरे जिस्म को चूमने लगा या कहो कि चाटने लगा था।हम दोनों का जिस्म गर्म हो चुका था और पसीना भी निकल रहा था।चूमते चाटते मैं उनकी नाभि पर पहुँचा। मुझे किसी भी औरत में उसकी नाभि सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है।मैं नाभि पर आराम से चुम्बन करने लगा।मामी थोड़ा सिहरने लगीं.

कोई 18 साल की कमसिन लड़की की चूत हो।फिर भी मैंने उसकी चूत के मुहाने पर तेल लगा दिया. पर मेरा बस एक पर ही दिल आ गया था, मैं उसको बस देखता ही रह गया और मन ही मन चाहने लगा।शायद वो भी यह बात जान गई थी. सबको जाने दे, हम दोनों सबके बाद चलेंगे।वो मेरी आँखों में देखने लगी। शायद वो भी इसी तरह का कुछ एक्सपेक्ट कर रही थी।वो भी एक स्माइल देते हुए बोली- क्यों क्या इरादा है?मैंने बोला- रुक जा ना.

तो वे मुझे सही से नहीं दिख रही थीं।मैंने कहा- चलो सब बातें करते हैं. तो उसने लण्ड का रसपान करने में हल्की से भी कोताही नहीं की और घुमा-घुमा कर हर तरफ से गोरे लण्ड का आनन्द लेना शुरू कर दिया।वो भी धीरे-धीरे अपने असली रूप में प्रकट होता जा रहा था। अब मेरे हाथों ने भी अपना काम शुरू कर दिया और लण्ड को घुमा-घुमा के अन्दर घुसवाने लगी।जैसे-जैसे वो बाहर से अन्दर जाता. लेकिन अभी नहीं।फिर उसने किसी से कुछ फ़ोन पर बात की और बोला- अब थोड़ा रुक के.

तुम्हारी आपी की चूत के जूस के चंद क़तरे हाज़िर हैं।आपी के इस अंदाज़ ने मेरे मूड की सारी खराबी को गायब कर दिया और बेसाख्ता ही मुझे हँसी आ गई।मैंने आपी को अपनी तरफ खींच कर उनको सीने से लगाया और अपने बाजुओं में भींचते हुए कहा- आई लव यू आपी.

देसी लड़कियों की चुदाई बीएफ: मेरे इस तरह बोलने से फरहान डर कर फ़ौरन उठते हुए बोला- अच्छा भाई सॉरी. मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गई। उस दिन मैंने उस से 2 घंटे फोन पर बात की और अगले दिन उसको अपने यहाँ कॉफी पर इन्वाइट किया।अपार्टमेंट कल्चर ऐसा होता है कि कौन किसके यहाँ जा रहा है.

इसलिए मैं भी तुम से जुदा नहीं होना चाहती हूँ।मैंने आपी से कहा- आपी आप परेशान ना हों. ’ कहते हुए वो मेरी गांड को पेल रहा था।पांच मिनट तक चुदाई चलती रही और उसकी स्पीड एकाएक बढ़ने लगी. तो आज कुछ निशानी देती जा।उसने पूछा- बोल क्या चाहिए?मैंने बोला- वो चीज़ जो हमेशा तेरे बदन को छूके रखती है.

आंटी मेरी मम्मी के साथ बात करते-करते मेरी तरफ़ देख रही थीं।मैं वहाँ से उठ कर अपने कमरे में जा कर आंटी के बारे में सोचने लगा.

फिर 5 मिनट बाद सर की वाइफ आ गईं।वे मुझे दूर से देख कर ही मंद-मंद हँसने लगीं।शायद वो मेरी इंटेन्शन समझ रही थीं।हम अन्दर गए. जैसे खुद ही आपी की चूत में घुसना चाह रहा हो।उसका हाथ अपने लण्ड पर तेजी से आगे-पीछे हो रहा था।आपी का जिस्म अकड़ना शुरू हुआ. जो मेरे लण्ड को आराम से चूत में ले सकती थी।मैंने उसके दर्द की परवाह किए बगैर उंगली से चोदना चालू कर दिया, थोड़ी देर में उसको भी मज़ा आने लगा।चूत का रस और जैली का कमाल था कि उसकी चूत का छेद बड़ा हो कर सटासट उंगली को अन्दर-बाहर कर रहा था।फिर दूसरी उंगली भी धीरे-धीरे करके उसकी चूत में डाल दी।‘आह्ह्ह्ह.