गर्ल्स हॉस्टल की बीएफ

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दोस्तो, मैं आलोक, एक न्यू इंडियन गर्म स्टोरी के साथ आपके सामने फिर से हाजिर हूँ.अब मेरी ब्रा बिल्कुल साफ साफ दिख रही थी और स्कर्ट को थोड़ा ऊपर ऐसे कर दिया कि मैं बैठूँ तो मेरी पैंटी दिख जाए.

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थोड़ी देर बाद गेट को किसी ने बजाया तो मेरे रूम पार्ट्नर ने दरवाज़ा खोला. अब भाभी की चुदाई का वक्त आ गया था, मैं उनको उठा कर बेड पे ले गया और उनको बोला कि आप मेरे ऊपर आ जाओ. कुछ देर तक भाभी ने मेरा साथ दिया और फिर मुझे अलग करके बोलने लगीं- यह क्या कर रहे हो.

वो गुस्से में बोली- क्या है?तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा. थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे और जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैं फिर से धक्के लगाने लगा. फिर मैंने डिसाइड किया कि अब मैं पैदल ही कुछ दूर चलती हूँ, शायद आगे कोई ऑटो रिक्शा मिल जाए.

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थोड़ी देर बाद जब कॉफ़ी तैयार हो गयी तो उन्होंने मुझे पीछे से हटाया और दो कप में कॉफ़ी डाल कर बाहर लेकर चलने लगी और मैं भी उनके साथ बाहर आ गया।हम दोनों सोफे पर बैठ गए।हम दोनों ने जल्दी से कॉफ़ी ख़त्म की और मैंने फिर से प्रीति को अपनी बांहों में ले लिया उनके होठों पर अपने होंठ रख कर किस करने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी. अब रोहण ने मुझे आगे से उठा लिया और मेरी चूत पर पैंटी के ऊपर से ही किस कर दी. फिर देर तक उसकी चूत के ऊपर घुमाने पर एक उंगली को मैंने चूत के अन्दर घुसा दिया.

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मैं बोली- क्या?वर्षा बोली- तुम कैसे अपनी गांड मरवा रही थीं, आराम से सोते हुए.

मैंने हथेली का एक कप सा बनाया जिस में मेरी उंगलियाँ नीचे की ओर थी और उससे प्रिया की योनि को पूरा ढाँप लिया. मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. फिर मैं धीरे धीरे अपने हाथ को उनकी चूचियों की तरफ़ बढ़ाने लगा और चुची तक आकर अपने हाथ को रोक दिया, फिर हिम्मत करके उनकी चूचियों को सहलाने लगा.

मैंने कहा कि ये क्या कर रही हो?तो बोलीं- तुम इसे ज़ोर से सहलाओ मुझे बहुत अच्छा लगेगा. फिर मैं उनकी चूत पे आ गया और मैं भी चूत को कस कस के काटने और चूसने लगा. फिर मैं भाग कर अपने रूम में आ गया और भाभी की चुदाई के सपने देखने लगा, जिससे मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने बाथरूम में जा कर भाभी के नाम की मुठ मार ली.

मैंने उसकी चूत का हर हिस्सा अच्छे से चूसा था। कुछ देर में उसका चिकना पानी मेरे मुँह में भर गया और मैं भी उसे पूरा चाट गया।चूत के दाने पर ही मैं बहुत देर तक डटा रहा था।मेरा औसत से बड़ा लण्ड देखकर उसने कहा- प्लीज इसे अन्दर मत डालना। मुझे अभी अपना कौमार्य भंग नहीं करवाना है।मैंने भी उसे प्रॉमिस किया- जब तक तुम खुद नहीं चाहोगी.

मैंने उससे उसकी नौकरी से सम्बन्धित बातें पूछी, उसने घर परिवार के बारे में पूछा. आह… और मेरा बेटा… चूस ले, निचोड़ दे अपनी माँ की चूत को!मेरे पूरे चेहरे पे मेरी माँ की चूत का पानी लग गया था.

गर्ल्स हॉस्टल की बीएफ करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने उसको कहा- क्या पसंद करोगी?इस पर रुबीना ने मुस्कुराते हुए अपने जिस्म पर आँखें लगा दीं, मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारते हुए अपना सारा पानी उसके पेट, सीने और मुँह पर गिरा दिया. चूत की फचफच और ट्रेन चलने की आवाज एक दूसरे में मिल कर मस्त समां बांध रहीं थीं.

गर्ल्स हॉस्टल की बीएफ मुझे लगा जैसे मेरी वीडियो बना रहे हैं या फोटो खींच रहे हैं।तभी भाभी के पापा ने अपने दोस्त को बोला- राजेंद्र देख, आरती की हेल्प कर, क्या चाहिए उसे।वो दौड़ कर आये और बोले- आरती, मैं राजेंद्र मिश्रा, मैं तुम्हारी भाभी के पापा का भाई भी हूँ दोस्त भी तुम बुरा मत मानना, एक बात बोलूं तुम बहुत खूबसूरत हो! मैंने आज तक इतनी सुन्दर लड़की नहीं देखी है।मैंने कहा- थैंक्स अंकल!और थोड़ा मुस्कुरा दी. तो बात करीब दो साल पहले की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मई का महीना था, मेरे पेपर को टाइम था तो मैंने सोचा घर जाना चाहिये तो कपड़े पैक किये चल पड़ा रेलवे स्टेशन और वहां बैठा ट्रेन की राह देख रहा था.

मैंने उन्हें बेड पर चित किया और उनके मम्मों पर फिर से टूट पड़ा, जिससे मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

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तत्काल प्रिया अपनी उंगलियाँ मेरे लिंग के शिश्नमुंड पर फेरने लगी और मुठी में ले कर अपनी उँगलियों से मेरे लिंग की लम्बाई नापने लगी. मेरा बहुत मन कर रहा था कि मैं भाभी को नहाते हुए देखूं, लेकिन मन मसोस कर रह गया. इस बार भी भाभी ने दूर होने की कोशिश की, पर इस बार मैंने भाभी को नहीं छोड़ा और उनके गले पर किस करने लगा.

लगभग आधे घंटे यूं ही रोने में और एक दूसरे को संभालने में निकल गये, फिर मैंने उनका ध्यान भटकाने के लिए पूछा बाथरूम किधर है. किसी कारण से वो स्कूल बंद हो गया तो उसने अपना प्ले वे स्कूल खोल लिया लेकिन वो कुछ ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा था. उसने कहा- पुणे जा रही हूँ।मेरा मुंह उतर गया था, मैंने उसे कहा- ठीक है, जाओ.

फिर उसने अपना एक हाथ निकाला और वही हाथ ऊपर की तरफ से डाल कर अन्दर वाला निकाला.

मैं उन्हें होटल ले गया और उनसे कहा कि मैं नीचे लॉबी में वेट करता हूँ, आप फ्रेश हो कर आ जाइए, फिर रेस्टोरेंट में लंच करते हैं और वहीं बात भी कर लेंगे. बोली- क्या करने का विचार है?मैंने बोला- जो बातें करते हैं वो ही…वो हंसने लगी और बोली- सही टाइम आने दो. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

मैं बोला- मधु तुम बहुत सुन्दर हो और तुम्हारा नंगा जिस्म पाकर मैं धन्य हो गया।उसने बस हूँ” कहा और चुप हो गई।मैं बोला- अब रोज तुम्हें अपने लण्ड से चोदूँगा. मैं चिल्ला उठी और बोली- प्लीज छोड़ दो, मैं मर जाऊंगी!मेरे आंसू निकल रहे थे पर वो चोदना बंद नहीं किए बल्कि मुझे गाली दे रहे थे, बोले- आरती तुम तो फ्रेश माल हो, आज से छिनाल बनी हो साली रण्डी, अब बिना लंड के तू एक दिन भी नहीं रह पायेगी।और मैं लगातार रोती रही इतना दर्द तो पहली बार जब करवायी थी, मेरी सील टूटी थी तब भी नहीं हुआ था। करीब बीस मिनट तक वो दोनों चोदते रहे और मैं रोती रही. मैंने भी कहा- क्यों नहीं ज़रूर मिलेगी, बोलिए क्या चाहिए आपको?तो उन्होंने कहा कि पहले घूमना फिर मूवी और फिर एक अच्छे से रेस्तरां में डिनर.

अवी ने मुझे गले से लगाया और मेरे पूरे चेहरे पर पागलों की तरह किस करने लगा. कई दिनों से मैंने अपनी पासबुक में एंट्री नहीं करवाई थीं और बैंक में कुछ और भी काम था, तो मैं घर से लगभग 10 बजे बैंक के लिए निकल गई.

मैंने भी ये मौका न गंवाना सही समझा, जल्दी से मैं उसके टॉप को साफ़ करने के बहाने उसके मम्मों को सहलाने लगा. कुछ अच्छे कुछ बुरे, जो भी हो अच्छा लगा इसलिए अपनी आगे की कहानी आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ. तो उसने कहा- मेरा एक लड़के के साथ चक्कर है और हमारा सब कुछ हो गया है.

ये तेरा ही दोस्त है कि नहीं?इरशाद ने आगे बढ़ कर शाकिर की पैन्ट खोल दी, अंडरवियर नीचे खिसका दिया और उसके चूतड़ चूम लिए.

चाची तुरंत आईं और मुझको सिर्फ़ तौलिया में देख कर कुछ पल के लिए मुझको प्यासी नज़रों से ऊपर से नीचे तक देखने लगीं. किधर मिला जाए, जब इस पर बात हुई तो उसने कहा कि मूवी देखने चलते हैं. माया ने अंकित का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और अंकित के टट्टों को अपने मुँह में भर लिया.

थोड़ी देर बाद महेश ने मुझे सीधा किया और मेरे पैरों को मोड़ कर बीच में बैठ गया. मैंने अपने हाथ उसके वक्ष पर रख दिए और सीमा के छोटे छोटे उभारों को सहलाने लगा, हम दोनों की वासना उफान लेने लगी तो फिर प्यार में डूब कर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े उतार दिए।मैंने सीमा को मेरा लंड चूसने को कहा तो उसने कहा कि वो चूस लेगी लेकिन सेक्स नहीं करेगी.

दीदी अपने सर को इधर उधर हिला कर मुझे मना कर रही थी कि मैं ऐसा ना करूँ लेकिन मैं उनकी कोई बात नहीं मान रहा था. फिर मैंने पूरे दिन इस बात के बारे में सोचा पर मेरा मन नहीं मान रहा था।रात को राजीव घर आ गए, रोज की भान्ति हम दोनों ने डिनर किया और फिर हम लेट गए।मैं पूरी रात काल बॉय के बारे में सोचती रही। सुबह हो गयी पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।फिर हम फ्रेश हुए और राजीव ऑफिस चले गए. कुछ देर बाद ही उसने फिर से मेरा सर पकड़ा और मेरे सर को अपने बुर में दबाने लगी.

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सुरेश ने काजल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी जुबान उसके मुँह में डाल कर चलाने लगा.

फिर कुछ महीनों बाद मेरी भाभी भैया के साथ भोपाल आईं, भैया को कुछ ज़रूरी काम था तो भैया भाभी को मेरे कमरे पर छोड़ कर चले गए. मैंने जब इंजीनियरिंग कॉलेज में एड्मिशन लिया था तब मेरी उम्र 18 साल थी. मैं जाकर बोतल ले आया, जिसमें पिंकी और रोशनी की जूस का मिक्सचर भरा था.

जैसे ही हम बेडरूम में पहुँचे, उन्होंने मेरा लंड छोड़ कर मुझे बेड पर पटक दिया और मुझे किस करने लगीं. मानवी भाभी ने मुझे खाना खिलाया और पूछने लगी- खाना कैसा बना है?मैं मस्का लगाते हुए बोला- भाभी बहुत टेस्टी खाना है, मैंने आज तक इतना अच्छा खाना नहीं खाया. सेक्सी नंगे दिखाइएमेरी चाची ने खुद को काफ़ी मेंटेन किया हुआ है, उनका मस्त बदन की क्या बताऊं आपको.

दीदी की चल ऎसी है जैसे कोई सेना का अफसर चल रहा हो!पिछले 3-4 महीने से दीदी अक्सर देर से घर आती थीं. सलवार थोड़ा सा ही नीचे हुई थी की ममता जी ने तुरन्त मेरे हाथ को पकड़ लिया और… नहीं… ये सब नहीं… अब बस्स…” कहते हुए मुझे अपने ऊपर से धकेल कर अलग कर दिया.

इतना जोश चढ़ रहा था कि मैं अब उन सभी अंकल को नाम से पुकारते हुए गन्दी गन्दी बातें और गालियां देने लगी। सच में ये मैंने जिया है इतना एक्साइटेड मैं पहले कभी नहीं हुई. बहूरानी की ब्रा के हुक को मैंने ऐसे ही थोड़ा सा दबा दिया तो मेरी मंशा जान कर बहूरानी का जिस्म सिहर उठा. क्या न करूँ?” दिनेश उसके साथ खेल रहा था, वो उससे गन्दी बातें बुलवाना चाहता था क्योंकि एक औरत सिर्फ उससे ही खुलती है जिसका लन्ड उसकी फुद्दी को खोलता है।यही जो… आप कर रहे हो.

अब मैंने चॉकलेट उठाई और उसका रैपर फाड़ते हुए चॉकलेट अपने लंड पर लगाई और थोड़ी सी उनकी चूत पर लगा दी. इतने मैं उस आदमी ने मुझे हिलाया और हंसते हुए कहा- कहाँ खो गए करण? मैं विनोद. उसके बाद कमल लंड को उसी जगह पर अन्दर बाहर करके मेरी चूत में जगह बनाने लगा.

बाथरूम में जाकर उन्होंने मुझ पर पानी डालना शुरू कर दिया, तो मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था, मैं भी शुरू हो गया.

मैं समझ गया कि मैं पूरी तरह अपनी बीवी के चक्रव्यूह में फंस गया हूँ. बुआ की उम्र लगभग 42 साल है, उनकी एक बेटी अंजलि जिसकी उम्र लगभग 20 साल और एक बेटा माणिक है जो करीब 23 साल का है.

कुछ मिनट तक भाभी के मम्मों को चूस कर मैं नीचे भाभी की चूत की ओर बढ़ने लगा. फिर उसने कुछ कहा तो मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैंने उसे कहा- क्या?और उसने कहा- आपको नहीं!अरे माफ़ करना दोस्तो, मैंने उसका तो नाम ही नहीं बताया, उसका नाम उसने पूनम बताया था मुझे बाद में!उसकी उम्र भी मेरे जितनी ही थी, 19 साल और वो पुणे अपने भाई से मिलने जा रही थी. वो- कैसे निकालूँ? मेरा तो निकल ही नहीं रहा, खुद तो 4-5 बार झड़ के मजा ले चुकी हो पर मेरा क्या होगा?अकीरा- लाओ, मैं इसे थोड़ा प्यार करती हूँ, शायद इस अजगर को मेरी गिलहरी पे कुछ दया आ जाये.

मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करता रहा, कुछ देर बाद चाची से मैंने पूछा- अब कैसा लग रहा है. सपना ने सीट से खड़ी होकर अपना जैकेट निकाल दिया और मुझसे लिपट कर बैठ गई. मैंने पूरी पैंटी उतार दी और उसकी नंगी चूत पर अपना नाक लगा कर सूंघने लगा.

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फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ. उसने आगे जारी रखते हुए कहा- अगर ये बात घर में पता चल जाए ना, तो मम्मी पापा तुझे मार मार के घर से निकाल देंगे. कुछ देर बाद फूफा जी हाँफने लगे और आआह की आवाज के साथ झड़ गए और मम्मी के बगल में लेट गए.

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इसके बाद उसने मेरे कपड़ों को एक एक करके मेरे शरीर से निकल फेंका और खुद भी नंगा हो गया.

उन्होंने कहा- जान बाहर मत निकालना… अन्दर ही कर दो… अपना गरम पानी मेरी चुत में भर दो. मैंने पूछा तो भाभी ने बताया कि तेरे भैया आज रात के लिए बाहर गए हैं, वो अब कल सुबह ही आएंगे.

धीरे धीरे सारे हूक खुल गए तो उन्होंने मेरी ब्रा को भी खोल दिया। मेरे दोनों कबूतर खुली हवा में आ गये. और जोर से चोदने की मांग करते हुए मेरी पीठ में अपने नाखून चुभाने लगी. पर कमल को क्या पता कि इस उसकी प्यारी रानी सरिता कितनी बार लंड ले चुकी है.

मैंने भी अब दीदी की पूरी तरह नंगी पीठ को प्यार से सहलाना शुरू कर दिया.

बहूरानी, एक गिलास पानी ले आ… और फिर चाय बना दे जल्दी से!” प्रत्यक्षतः मैंने कहा. भाभी ने बोला- आह… क्या कर रहे हो जान… आराम से करो ना… मैं कहीं भाग थोड़े रही हूँ. बस अगले दस मिनट तक मेरी चमड़ी लाल हो गई लेकिन मजे की बात ये थी कि मुझे इस खेल में मजा रहा था.

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दो मिनट बाद फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया जिससे थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से तैयार हो गया तो मैंने उसे उल्टा घुटने के बल किया यानि उसे घोड़ी बना दिया, पीछे से उसकी चूत पर लंड रख कर उसकी चूची पकड़ उन्हें दबाने लगा और लंड चूत में घुसा कर चोदने लगा, अब वो मेरा लंड आराम से चूत में ले रही थी, उसके मुंह से सिर्फ मादक आवाज आ रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’मैं उसे जम कर चोदा. उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं, मैंने उसकी आँखों को चूमा और अपने हाथों से उसकी आँखें खोल कर उसे अपने आगोश में भर लिया. फिर मैंने थोड़ा स्पीड को बढ़ाया तो उसके कंठ से आवाज निकलने लगी- आअहह आअन्न चोद दो.

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इन डेढ़ सालों में उसके जिस्म में आश्चर्यजनक बदलाव मैंने नोट किया; वो पहले से और भी छरहरी हो गयी थी उसका सुतवां जिस्म और भी सांचे में ढल गया था. चाची तो पूरी पागल हुए जा रही थी, वे मुँह से अजीब सी आवाजें निकाल रही थीं- अह्ह. ड्रिंक की वजह से अब हिम्मत भी थी और मैं समझ गया था कि मीना जी ने ब्रा निकाल कर हरा सिग्नल दे दिया है.

मैंने धीरे से उनकी गांड उठाई और एक बार में भाभी की पैंटी अलग कर दी. तभी उसने बोला- यार चीकू मेरे से शादी करेगा?मैं एकदम से चौंक गया और मुझे ऐसा लगा जैसे बिना माँगे सब कुछ मिल गया हो.

फिर मैं बॉस की बांहों से निकल कर चेयर पर बैठ गई और बॉस मेरे सामने टेबल पर बैठ गए.

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ससुराल छोड़ कर आने के बाद माधुरी ने पढ़ाई की और किसी स्कूल में नौकरी करने लगी.

तो पापा बोले- आरती, मुझे डार्लिंग या राजा बोलो!मैं बोली- आई लव यू मेरे राजा!और पापा से चिपक गई. सुरेंदर मुझे सन्डे की शाम को चाय पर बुलाते और तब भाभी से भी कुछ बात हो जाती थी. मैंने भी हंसकर कोई बात नहीं कह दिया, चाहता तो मैं उस समय बता सकता था कि मैं कविता(तनु) का पति नहीं हूं, पर मुझे भी उनकी नोंकझोंक अच्छी लग रही थी।और प्रेरणा पहले कैसी थी, मुझे नहीं पता.

कुछ देर सांस लेने के बाद मैंने आँख खोली तो उन पाँचों को अपनी तरफ ही देखता पाया।मैं जैसे तैसे उठ कर बैठी, सबसे पहले मैंने अपने बूट निकाल कर फेंक दिये, बगल में पड़ी बोतल उठा कर तीन चार तगड़े घूंट भरे, शराब गले से लेकर पेट टेक सब कुछ जलती हुई अंदर गयी. मैंने मेरा एक हाथ शॉल में से अन्दर डाला और मेरी तरफ वाला संतरा दबाने लगा. तब उसने मुझसे कहा- तो जो तुम्हें ठीक लगे, कर लो!और मैं उसकी चूत को चाटने लगा, मैंने अपनी ज़बान उसकी चूत के ऊपरी खाल पर लगायी तो वो खलबला उठी और अपने हाथों से मेरे सर को दबाने लगी और बोलने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह डू इट… इट्स मेक मी हॉर्नी आह अआह ओह्ह्ह उफ्फ्फ.

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मैं ज्यादा कुछ बोलती, उससे पहले तो संजय ने मेरा हाथ खींच कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया. इस बार उसने मुझे अपने ऊपर लेकर चोदा और शाम चार बजे तक संजय ने मुझे 3 बार बेड पर चोदा. मैं उसको दूसरे कमरे में सुला आया और आकर प्रिया भाभी से बात करने लगा.

कुछ देर बाद भाभी ने कहा- आज तुम्हारे भाई को काम है इसलिए वो आज नहीं आने वाले हैं.

साथ में उस गुलाम की बीवी भी थी, जो बैठ के इस तमाशे को देख कर खुश हो रही थीं.

इतनी ड्रेस मिलीं और मोबाइल भी, अरे यार ये देखो, साइलेंट मोड पे मोबाइल है, तो कहां से सुनोगी. इसके बाद अगले दिन उसके मम्मी पापा चले गए और हम उसी होटल में रुक गए ताकि दूसरे दिन उसका प्रोजेक्ट पूरा हो जाए. राजस्थान को सेक्सीशहजाद- नसीम तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी ना संजय के यहां रहने से?मैं- नहीं ऐसा कुछ नहीं है, वो तो बस एक गैर मज़हबी लड़के को साथ रखना कुछ अच्छा नहीं लग रहा था, इसलिए आपसे कहा था, पर अभी ठीक है.

मैंने कहा- ये गुस्सा बिस्तर पे दिखा तो मैं जानू!वो खिड़की बंद करने लगी तो मैंने कहा- सोच कर देखो एक बात, मैं तो घर का ही हूँ… बाहर बात नहीं जायेगी. उसने भी मेरे किस का स्वागत किया तो मैंने उसके लबों पर अपने लब रख दिए और उसे पागलों की तरह चूमने लगा. जैसे ही मैंने पीछे से उनकी गदराई हुई गांड को ठुमकते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए.

फिर मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा है, मैंने उसको नहीं बताया. संजय ने अपने दोनों हाथों को मेरे बालों में डालते हुए मेरे कांपते हुए होंठों पे अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया.

फिर भाभी ने मेरे सारे वस्त्र उतार कर मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को पकड़ लिया.

एक दिन मैं उसी के साथ अपने कमरे में बैठी थी कि मैंने उससे कहा- यार कहीं घुमाओगी नहीं. मैंने अन्तर्वासना की बहुत सी रियल कहानी पढ़ी हैं मुझे इधर की चुदाई की कहानी पढ़ कर बहुत मजा भी आया. बहन की साँस फूल गई थीं, उसकी वजह से बहन के मम्मे ऊपर नीचे हो रहे थे.

देसी सेक्सी एचडी वीडियो डाउनलोड जब कुछ देर बाद खून बहना बंद हो गया, तब जा कर उन्होंने मुझे एक क्रीम ला कर लगाने को दी. कुछ पल बाद मयूरी दरवाजे को ठीक से अन्दर से बंद करने के बाद वापिस मोहन लाल के पास आई, उसने दुपट्टे का एक भाग अपने सर पर रखा और उसके पैर छूती हुई बोली.

विवेक बेड के नीचे नंगा खड़ा हो गया और कामिनी की गांड के बल उसको एक झटके में अपनी गोद में उठा लिया. जैसे ही लंड पे चुत का पानी लग गया, मैंने लंड भाभी के चुत में डाल दिया. थोड़ी देर में बाथरूम का दरवाजा खुला, मेरी नज़र उधर चली गई और जो देखा वो देख कर मैं हैरान रह गया.

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मेरा लंड पिस्टन की तरह उसकी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था और वो उचक उचक कर मज़े से मेरा लड़ खा रही थी. मैंने मानवी भाभी के मुँह पर एक चपत लगाई और उसके मुँह में अपना औज़ार जबरदस्ती डाल दिया. दिव्या- यार ये मोबाइल 20000 का होगा और ये सारी ड्रेस 15000 की होंगी, तू तो बहुत चालू निकली.

मैंने बात नहीं की, तो तू भी मुझसे नहीं बोला?मैंने बताया- दीदी मैं बहुत डरा हुआ था, इसलिए मैंने आपसे नहीं बात की. फिर जीजू ने धीरे से मेरे होंठों को काट लिया तो मैंने आईई… की आवाज निकाली.

अगले दिन हम होटल से निकल गए और एयरपोर्ट आ गए वहां से हमने फ्लाइट ली और घर आ गए।हमारी जिंदगी अच्छी चल रही थी।फिर अगले दिन करवा चौथ था, मैं रोहण के लिये व्रत रखना चाहती थी, मैंने रोहण को बताया, वो खुश हो गए.

दोस्तो, मैं एक बार फिर से आप लोगों के सामने अपनी एक और नई चोदन कहानी लेकर हाज़िर हूँ. फिर भी लण्ड अंदर डालने में फिसल रहा था, शायद हम उत्तेजना से, उत्साह से काँप रहे थे इसलिए मुश्किल ज्यादा हुई।मैंने हाथ से चूत का छेद थोड़ा खोला और लण्ड का टोपा अंदर डाल दिया. कुछ देर बाद चीखना चिल्लाना बन्द हुआ और उन्होंने अपने आपको खुला छोड़ दिया.

10 12 धक्के लगा कर चूत में उंगली कर के चूत का छेद खोल दिया और अचानक से लन्ड चूत में डाल दिया. मैंने अपना लंड चाची के मुँह में दे दिया और अपना सारा रस अपनी चाची के मुँह में निकाल दिया. अब सुरेश और मयूरी भी दरवाजे की तरफ खड़े अपने पिता और ससुर को देखने लगे.

फिर हम दोनों हंसने लगे, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा ली और ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा.

गर्ल्स हॉस्टल की बीएफ: मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करता रहा, कुछ देर बाद चाची से मैंने पूछा- अब कैसा लग रहा है. पता लगता था तो सुन कर कोफ़्त तो बहुत होती थी लेकिन हम क्या कर सकते थे.

बुरे समय में ही तो पड़ोसी काम आते हैं और आप तो मुझे भाई की तरह मानते हैं. उस टाइम हमारी कोई बात नहीं हुई, हम दोनों क्लास में आए, लेक्चर स्टार्ट हो गया था. इधर मेरे दोनों हाथ सुकुमारी भौजी की चूचियों पर, उधर सुकुमारी भौजी का एक हाथ उनकी चूत की रगड़ में और दूसरा हाथ मेरे बालों को खींचते हुए मचल रहे थे.

राज लेकिन तभी उन्हीं दिनों में पड़ोस की एक लड़की मेरी अच्छी दोस्त बन गई। मैं उससे कहती कि यार समय नहीं कटता.

दोस्तो, मैं आलोक, एक न्यू इंडियन गर्म स्टोरी के साथ आपके सामने फिर से हाजिर हूँ. और वो थोड़ी देर बाद ही फिर से रेडी हो गया, उसका लंड फिर से उसी तरह अपना सर उठाये खड़ा था पर मैं रेडी नहीं थी। मैं दोबारा चुदाई के लिए मना कर रही थी पर संजना मुझ पर दोबारा चुदाने के लिए जोर डालने लगी तो मैं तैयार हो गयी. मैंने भी अब धीरे धीरे कंधों को दबाना शुरू कर दिया और फिर बांहों की भी मालिश करना शुरू कर दी.