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बहादुर के मोटे घीये जैसे लण्ड ने रीटा की चूत के बखीये उधेड़ के रख दिये, हिचकोले खाती नन्ही रीटा किसी छिपकली सी बहादुर से चिपकी और बहादुर के कन्धे में दांत गड़ाये अपनी चीखों को दबा कर बहादुर के लण्ड की पिटाई की पीड़ा पी गई. देहाती सेक्सी ब्लू पिक्चरतभी शालू अमिता के मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठ गई और अमिता उसकी झांटों वाली गुलाबी चूत को चाटने लगी.

”मैंने देखा कि इतनी गर्म चूत तो दोनों बहनों की भी नहीं थी !छोटी छोटी झांटें हाथ में चुभ रही थी और एक मोटा सा दाना भी स्पर्श हो रहा था, मैंने कहा, पारुल जान, यह क्या है?”वो बोली,”यही तो सबसे बड़ी क़यामत है …. मोटी गांड की चुदाई वीडियोऔर तो और वो समझेंगे भी नहीं कि यह सिर्फ दोस्ती है… और इससे ज्यादा कुछ नहीं…मैं इस बात से परेशान नहीं थी की घरवालों को पता चला तो क्या होगा.

अगले दिन यानि 16 जनवरी, 2010 को मैं भाभी के घर गया। वहाँ पहले से उनकी दो सहेलियाँ बैठी थी जो मेरा ही इंतजार कर रही थी ….बीएफ देसी हिंदी फिल्म: मेरा पजामा उतार दो ना और ये टॉप… खीच दो ऊपर… मुझे नंगी करके चोद दो… हाय…”कहानी का दूसरा भाग :समझदार बहू-2.

मेरी रांड बहन बोली- कोई भाई ऐसा भी करता है?तो मैंने उससे कहा- मेरी रांड! चूत और लौड़े का कोई रिश्ता नहीं होता!फिर मैंने उसे अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़वाई, जिन्हें पढ़ कर उसे अच्छा लगा कि और दुनिया में और भी भाई हैं जो अपनी बहन को रंडी बना कर चोदते हैं.मैंने कहा- ठीक है! और उसके पैसे वापिस दे कर बोला- मैं तुम्हारी फ्रेंड से पैसे ले लूंगा पर तुमसे नहीं!वो मना करने लगी तो मैंने कहा- अगर तुम ये पैसे वापिस नहीं लोगी तो मैं फिर नहीं आंऊगा!तब उसने पैसे वापस ले लिए और मैं उसके होंठों पर किस कर के चला आया.

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हम्म्म आआअ…जो मुझ में और जोश जगाने लगी, मेरी स्पीड बढ़ने लगी और मैं जोर जोर से उसकी चूत में धक्के लगाने लगा।फिर उसने मुझे थोड़ा धक्का दिया और मुझे बेड पर सीधा लेटा कर मेरे ऊपर बैठ गई…तो मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर रखे और नीचे से धक्के मारने लगा.अगले दिन मैं दिए पते पर पहुँच गया!दरवाजा खुला, आज आकांक्षा कल से ज्यादा स्मार्ट लग रही थी!उसने मुझे चाय के लिए पूछा, मैंने मना कर दिया.

थोड़ी देर मैं उसकी चूत इसी पोजिशन में मारता रहा फिर मैंने उसको पेट के बल लिटाया और उसके घुटने मोड़ के उसको घोड़ी बनाया. बीएफ देसी हिंदी फिल्म बाकी चार लोग पीछे ही रुके थे जो भागने वालों पर नज़र रखने के लिए थे।दरवाजे के करीब पहुँचते ही एक सिपाही ने जोर से पैर से धक्का मारकर दरवाजा खोल दिया और अंदर जाते ही सोनिया बोली- कोई चालाकी नहीं… जो जहाँ है वो वहीं खड़ा रहेगा… तुम को पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया है !गुंडों ने उनकी एक नहीं सुनी और अपने हथियार निकालकर फायर शुरू कर दिया….

रीटा समझ गई कि बहादुर जाल में तो फंस गया है पर बहादुर का डर को दूर करने के लिये कुछ करना पड़ेगा.

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जब मेरी ऊँगली से टकरा कर टिकेट और अन्दर घुस गया तो मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा- सॉरी. तभी ज्योति मुझसे बोली- तुम मेरे साथ सेक्स करने की फीस नहीं दोगे?तो मैंने भी कह दिया- जो चाहे मांग लो मेरी जान!ज्योति ने एक सिगरेट मेरी तरफ बढ़ा दी, वो पहली बार था जब मैंने सिगरेट पी थी. आज हम दूर हो गए और कई लड़कियाँ मेरे बिस्तर पर आ चुकी हैं पर मोना और उसकी दीदी के साथ गुजरे सेक्स के वो पल और उन बहनों के नंगे जिस्म मुझको बहुत याद आते हैं.

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और पंद्रह मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे. एक हाथ से उसके एक स्तन को ब्रा कर ऊपर से ही दबाने लगा, दूसरे से उसके दूसरे स्तन को पकड़ कर चूस ही रहा था. यह कह कर वो मेरे लौड़े को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और अपने हाथों से मेरा मुठ मारने लगी.

मैं बस गेट खोल कर उसको देखता रहा तो वो मुस्कुरा गई और बोली- आज आप अंदर आने दोगे या बाहर से वापस भेजने का इरादा है?तो मैं शरमा गया- नहीं. ’भच्च’ की आवाज़ हुई और लंड का सुपारा गांड में घुस गया और रागिनी चीख कर छूटने का प्रयास करने लगी. ?पर क्या ???सिर्फ मेरे चाहने से क्या होता है ?मेरे पास आ जाओ या मुझे बुला लो !अभी नहीं मुझे थोड़ा समय दो फिर करवा लूंगी, अभी तो अपनी ही अंगुली से काम चला रही हूँ आईईईइ ….

मेरे दोस्त के बगल वाले घर में एक लड़की रहती थी, उसका नाम कविता था, 18 साल की उम्र होगी, छोटे-छोटे चूचे, मस्त गांड और गोरा बदन!जब से मैं गया था वो मुझे देखती रहती थी. ‘चाची, बस एक बार चुदा लो!’‘राजू, ऐसी बात ना कर!ऊँह, भला यह कैसी चाची है, मर्दों का तो कबाड़ा कर देती है पर खुद को हाथ ही नहीं लगाने देती है.

वह शरमाई तो मैंने देर नहीं की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी बाहों में भर लिया.

तस्वीरों में जो सुकून उन लड़कियों के चेहरे पर नज़र आता था जब वो किसी मर्द का लण्ड लिए होतीं थी, अब वही सुकून मेरी मंज़िल था जिस पर मुझे जाना था। लेकिन मेरे पास रास्ता ना था.

क्योंकि आप सभी लोग इतने समझदार तो है कि क्या क्या मैंने उसको समझाया होगा…जब उससे नहीं रहा गया तो मेरा लंड पकड़ कर खुद ही चूत में अपने अन्दर डालने की कोशिश करने लगी और मै उसको होंठों को चूमते हुए उसकी चूचियों को दबा रहा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।वो बोली- जान, अन्दर करो ना … मेरे नीचे आग से लग रही है…. मैंने कहा- आंटी, मेरे मुंह में ही झरो!इतना कहने पर आंटी की चूत से बहुत सारा पानी निकला और मैंने वो सारा का सारा पानी पी लिया. !”मैं दर्द के मारे कसमसाने लगी थी पर वो मेरी कमर पकड़े रहा और 2-3 धक्के और लगा दिए।मैं तो बिलबिलाती ही रह गई !आधा लण्ड अंदर चला गया था। उसने मुझे कस कर पकड़े रखा।ओह… जस्सी बहुत दर्द हो रहा है.

अगले दिन जब मैं, वो उसकी बेटी सब एक साथ बैठे थे, तो उसने सेब निकाले और सब को काट कर खिलाने लगी. मैंने भी दरवाजा बजाना ठीक नहीं समझा क्योंकि इससे मम्मी पापा जग सकते थे, मैं अपने कमरे में वापिस आ गया मगर एक सवाल मुझे बार बार परेशान कर रहा था कि भाभी किससे बात कर रही थी और मैं यही सोचते सोचते सो गया. ”हमने 20 मिनट सामान रखने में और संवारने में बिताए, अंत में मैं दोपहर के भोजन पूर्व एक ठंडी बीयर लेने और बरामदे पर ठंडक लेने के लिए चला गया।करेन ने छोटे रसोईघर से मुझे देखा,”ठीक है, मुझे लगता है कि मैं अपने कमरे में जाऊँ और कपड़े बदल लूँ और मुझे लगता है तुम भी….

तुमने तो ए सी और डी सी दोनो ही सही कर दिए… पर हवा-पानी बदलने के लिए कल फिर आना पड़ेगा !”कोई गल नई जी, मैं कल फेर आ के ठीक कर जावाँगा जी !”जस्सी अगले दिन फ़िर आने का वादा करके चला गया और मैं एक बार फिर से बाथरूम में चली गई।आपको मेरी यह गाण्ड चुदाई कैसी लगी?मुझे और प्रेम गुरु को ज़रूर बताना !आपकी नीरू बेन (प्रेम गुरु की मैना).

और तुझे तो पता है कि मैं थोड़ी शर्मीली हूँ इसलिए उन्हें फिर से लाने को नहीं कह सकती, और वो हैं कि कुछ समझते ही नहीं. एक झटके से जाने क्या हुआ मुझे अपनी दोनों जांघों के बीच कुछ गर्म-गर्म रिसता हुआ सा महसूस हुआ…… मेरे मुँह से आनन्द भरी आहें निकलने लगी… बंद आँखें जब खुली तो वो मेरे ऊपर था और लम्बी लम्बी सांसें ले रहा था…उसकी गर्म-गर्म सांसें मेरे पसीने से गीले बदन को ठंडक पहुँचा रहीं थी…मैंने उसे उसकी गर्दन पर एक चुम्बन किया… और कुछ देर हम उसी तरह लेटे रहे…कुछ देर बाद. मैंने उसे धीरे से आंख मारी।महिमा हंस पड़ी और पूछने लगी- मैम ! मैं भी कल पढ़ने आऊं?’0451.

और अगली बार मैं कोशिश करूंगी कि मैं तुम्हें ना देखूं !”तो तुमने कल रात को मुझे देखा?”हाँ, लेकिन अचानक ! जानबूझ कर नहीं !” उसने बताया,”उस समय मैं कमरे से बाहर पानी लेने के लिए आ रही थी और तुम वहाँ …. मैं तो देख कर ही पागल हो गया, मैंने अमिता के होंठों को चूम लिया और उनका रस पीने लगा. तभी अचानक मैंने देखा कि अनीता दीदी ने नेहा की टी-शर्ट के अन्दर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी.

तब तक में भी उसके पयजामे से उसका लण्ड बाहर निकाल चुकी थी… वो मुझे अपनी उंगलियों से काफी देर तक तड़पाता रहा… कभी अन्दर डालकर घुमा देता.

अब मैंने भी आगे कदम उठाया और अंकिता को अपनी बाहों में जकड़ लिया।मै धीरे धीरे दीदी के गालों को चूमने लगा………. मगर मैंने अपने आप को संभाला और बोला- हाय! माय नेम इस अमित!फिर उसने अपना नाम तान्या बताया, श्यामलाल ने अगले दिन से ही पढ़ाने की लिए कहा.

बीएफ देसी हिंदी फिल्म क्योंकि अंदर से दरवाजा बंद था इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था, मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोलते हुए अपना लण्ड प्रिया भाभी की तरफ किया और एक बार चूसने को बोला. मेरा भाई-भाभी भी जॉब पर चले जाते थे और घर में मैं और चित्रा बचते थे मगर फिर भी मेरी चित्रा से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि तब मैं थोड़ा शर्मीला था.

बीएफ देसी हिंदी फिल्म वैसलीन लगाई ! मैंने अपने आधे लंड को उसकी चूत में घुसाया ही था कि वो तेजी से चिल्लाने लगी, उसकी चूत खून से लथपथ हो गई, मेरा जोश और बढ़ गया और मैंने धमाधम चुदाई शुरू कर दी ……. लोग गले तक जितने पानी में तैरने का मज़ा इस तरह उठाते हैं जैसे सागर तट उठाया जाता है।मैं भी बह चला….

बहरहाल पीछे के दरवाजे से कमरे में घुसा तो देखता हूँ कि नीना है ही नहीं और दोनों बच्चे सो रहे हैं.

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हम दोनों लगभग दो घण्टे तक अलग ही घूमते रहे और उसके बाद हम धर्मशाला में वापिस आ गए. लड़कों से बातचीत करके मैं ज़ाहिरा के टेंट में गया तो देखा वो गाउन पहने लेटी हुई थी. फिर हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे, बातें करते-करते हम दोनों को ही नींद आ गई.

इसके विपरीत बॉबी एक चुलबुला, शरारती युवक था, लड़कियों में दिलचस्पी रखने वाला लड़का था. ‘ करते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।मैंने अपनी जीभ उसी चूत पर फेरते हुए गांड से ऊँगली निकाल ली और फ़िर उसकी चूत का पानी उसकी गांड पर लगाने लगा. तभी अंकल ने चूचियाँ दबाते दबाते मम्मी के लहंगे के अन्दर हाथ डाल दिया और उनकी बुर को छूने लगे.

और वो दर्द और मज़े में चीखे ज़ा रही थी और मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ चोद रहा था… कह सकता हूँ कि खूब बेरहमी से चोद रहा था.

मैं राधा को सब्जी मण्डी से सब्जी दिलवा कर लौट रहा था तो एक अच्छे रेस्तराँ में उसने मुझे रोक दिया कि मैं उसके लिए इतना काम करता हूँ, बस एक कॉफ़ी पिला कर मुझे जाने देगी. उसके मुँह से फिर एक चीख निकल पड़ी- आय हाय पापा… फ़ाड़ ही डालोगे क्या?”सॉरी… पर लण्ड तो पूरा घुसाये बिना मजा नहीं आता है ना”सॉरी… चोदो पापा… आपका लण्ड तो पुराना पापी लगता है…” और हंस पड़ी. अरे फिर क्या हुआ सभी मर्द अपनी औरतों की गांड मारते ही हैं इसमें बुराई क्या है ?पर मैं ऐसा नहीं हूँ।आर यू श्योर ?ओह आप बड़ी बे-शर्म हैं ?एक बात पूछूं सच बताना ?क्या ?तुम ने कभी उसकी गांड मारने की कोशिश नहीं की ?नहीं ?ऐसा कैसे हो सकता है ?क्या मतलब ?इतने मस्त कूल्हे देखकर तो किसी नामर्द का भी लौड़ा उठ खडा होता है फिर तुम कैसे कह सकते हो की तुमने उसकी गांड मारने की कोशिश नहीं की ?वो.

मैंने धीरे धीरे जोर लगाना शुरू किया, उनको थोड़ा दर्द हुआ पर जल्द ही मेरा लौड़ा उनकी चूत में उतर गया. बाद में मोना ने पूछा- क्या हुआ था?तो मैंने उसको चूम कर कहा- तुम चिंता मत करो! अब हमको कोई चिंता नहीं!और मोना को बिस्तर पर पटक कर उस पर चढ़ गया. मैं तड़पने लगी लेकिन उसको इससे क्या!उसने तो धक्के मारने शुरू किये तो रुका ही नहीं! दे दनादन! दे दनादन!मेरी नाजुक कमसिन चूत की धज्जियाँ उड़ गई- फच फच फच फच से पूरा कमरा गूंज उठा.

जब मैं घर पहुंचा तो शैली नहा रही थी, उसने दरवाजे की चिटकनी नहीं लगाई थी क्योंकि घर में कोई नहीं था. धूर्त बहादुर अपने खड़े लौड़े की टोटनी को अंगूठे और उंगली में रगड़ता हाथ को रीटा की नमकीन व चांदी सी चपडगंजी चूत को मुट्ठी में जोर से भींचता बोला- बेबी अब कुछ आराम आया?रीटा अब बोलने वाली हालत में नहीं थी- ओर जोर से बहादुर सीऽऽऽ ऊईऽऽऽ सीऽऽऽऽ.

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मुझे पीछे से पकड़ कर अपनी कमर कुत्ते की तरह से हिलाने लगा जैसे कि मुझे वो चोद रहा हो… मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया.

और मुँह भी खुल गया था… चूत थोड़ी फूल भी गई थी। मैं उसके वक्ष को अब हल्के से सहला रहा था. बहुत सालों तक मरियल लण्ड से घिस घिस कर परेशान हो रही थी और वो गोमती बेचारी, उसे तो सालो से लण्ड नसीब ही नहीं हुआ था. पर आजकल तो प्यार को सिर्फ जिस्मानी मिलन का रूप दे दिया है…उसकी रश्मि वाली बात सुन कर मुझे उसकी कोई बात सुनाई नहीं दे रही थी … मन ही मन मैं रश्मि को कोस रही थी.

आखिर लण्ड और उंगलियों में कुछ तो फर्क होगा, तभी तो सब औरतें लण्ड की दीवानी होती हैं… वरना उँगलियाँ तो औरतों के पास भी हैं…!!!मैंने उसे कहा- तुम लेट जाओ. जब कालू खाना लेने आया तब उसे यह नहीं मालूम था कि मैं अन्दर अकेली उसका उन्ताजार कर रही हूँ। मैं चाहती थी कि वो आये और आज मुझे औरत बनने का सुख दे।मेरे मन में आज कुछ अजीब सी उथल पुथल चल रही थी।कालू जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा, उसने हमेशा की तरह मेरी कलाई पकड़ ली।मैंने अपने दूसरे हाथ से उसकी बांह पकड़ कर उसको अन्दर खींच लिया और कहा- आ भी जा मेरे कालू….

अब रीता और साहिल की सिस्कारियां बढती जा रही थी, जो राहुल और कामिनी के शरीर में आग भरने का काम कर रही थी. मगर भाई! तुम ही बताओ कि ऐसा कभी संभव है?क्या 18 साल की लौंडिया चोदने को मिले और कोई छोड़ देगा, भरपूर चुदाई किये बिना ही?नहीं ना?फिर नीना की चूत को अगले तीन साल तक विनोद अगरबत्ती दिखाता रहा?हाँ, नीना ने ईमानदारी के साथ एक बात जरूर बताई क़ि विनोद का लण्ड देखकर वह डर गई थी. 5 इंच मोटा है, कसरती बदन है, रंग साफ और इंजीनियरिंग का छात्र हूँ।मैं आज आपके सामने अपनी पहली कहानी पेश करने जा रहा हूँ।बात उस समय की है जब मेरे बड़े भाई की नई-नई शादी हुई थी। जब मैंने भाभी को पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। मेरी भाभी का फिगर 34-30-36 है। वो बहुत अधिक सेक्सी लगती हैं। मगर कभी कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई.

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चुदती चूत ने ठेर सारा पानी उगल दिया, तो लण्ड बिना तकलीफ अंदर बाहर घचर पचर की मीठी मीठी आवाज के साथ चूत में अन्दर बाहर फिसलने लगा.

अमित को नंगा होते देख नीना मुझे प्यार से डांट पिलाने लगी और बोली- और तुम अपने लौड़े का अचार डालोगे क्या?बस सिग्नल मिलने की ही तो देरी थी. मैं और उछल उछल कर अपनी चूत में उसका लण्ड घुसवाने लगी… फिर मेरा लावा छुट गया और मैं बेहाल होकर उसके सामने लेटी रही. उसने डरते डरते मेरे लंड को पजामे के ऊपर हाथ में लिया तो मैं समझ गया कि वो पहली बार कर रही है और डर भी रही है…तो मैंने पजामा उतार के उसके हाथ को अपने से पकड़ के लौड़े को कस कस के मसलने लगा तो वो डर के बोली- इतनी ज़ोर से?तो मैंने कहा- मजा तो आ रहा है ना…?मैंने उसको बोला- चाँदनी, देख मैं तेरे सामने बिना कपड़ों के नंगा पड़ा हूँ तो तू भी तो कपड़े उतार के दिखा.

उसने मुझे कहा,”यह था तुम्हारा जन्मदिन का तोहफा…” ” जन्म रात बहुत बहुत मुबारक हो… ”कुछ देर तो मैं एकटक खड़ी सोचती रही. फिर मैंने बिना देर किये उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और फिर हम प्रगाढ़ चुम्बन करने लगे। करीब दस मिनट तक तक हम एक दूसरे को चूमते रहे। चूमते चूमते मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और धीरे धीरे अपना हाथ उसकी चूत के ऊपर रख दिया और उसको दबाने लगा। उसकी चूत काफी फूली हुई लग रही थी ऊपर से।ऐसा करने से उसकी साँसें और तेज़ होने लगी और वो मुझे और जोर जोर से चूमने लगी. தமிழ் ஆன்ட்டிகள் செக்ஸ் வீடியோ!?’मैं उसके चूतड़ सहला रहा था, उन्हें दबा रहा था। फ़िर दोनों चूतड़ों को दो हाथ से फैलाया.

बोरीवली स्टेशन पर उतरने के बाद वो लोग ऑटो में चले गए, मैं उन्हें जाता देखता रहा पर अफ़सोस अनु से मैं उसका फोन नंबर नहीं ले पाया. अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार और ढेर सारा प्यार! कहानी के बारे में जानने के लिए कहानी के पिछले भाग जरूर पढ़िए, मैं उम्मीद करता हूँ कि आप मित्रों और लड़कियों को मेरी कहानी जरूर पसंद आएगी.

और वो दोनों भी मुझसे बहुत प्यार करते हैं… बस रहते अलग अलग जगह हैं…इतने में बस आ गई… बात अधूरी रह गई. प्रवीण, मेरे पति एक सीधे साधे इन्सान थे, मृदु, और सरल स्वभाव के, सदा मुस्कराते रहने वाले व्यक्ति थे. कंडोम के बिना नहीं!मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, मैं तुरंत उठा, कपड़े पहने और होटल के बाहर एक दुकान से ‘बनाना फ़लेवर’ का कंडोम लिया और एक दाढ़ी बनाने वाला रेज़र क्योंकि मैंने अपनी झांट नहीं बनाई थी.

बाजी सिसकारी भरने लगी- ऊओह्ह्ह्ह आऽऽऽह आऽऽऽईऽऽय!!!बाज़ी ने राज का सर अपनी चूचियों के बीच में दबाया और बोली- साले! और तेज़ी से दबा! पी मेरा दूध! साले बहुत दिनों के बाद आज किसी ने मेरी चूची को दबाया है! मेरी चूची में बहुत दूध भरा हुआ है! जल्दी जल्दी से चूस मेरी चूची को!घबरा मत! आज तेरी चूची का सारा रस निचोड़ कर पी जायेंगे!उसके बाद राज अंकल बाजी की चूची को जोर जोर से पीने लगे. अब हमारे सहपाठियों को और मौका मिल गया बोलने का… अब कक्षा में हमारे अलग होने की चर्चा होने लगी. क्योंकि मैं गुस्से में था इसलिए भाभी ने मुझे अकेले नहीं जाने दिया और मेरे साथ चल दी.

जबकि माँ का अस्तित्व भ्रूण के बनने से लेकर आजीवन रहता है…मैं अपने मन के द्वंद्व में खो गई थी.

एक तो कंटाप माल और उसकी कसी चूत… ऊपर से मेरा मूसल सा लंड…फिर दबा कर चुदाई होनी ही थी… मैं चोदता रहा और रानी चिल्लाती रही. तब लण्ड रीटा के दाने को रगड़ता हुआ रीटा की बच्चेदानी से टकरा कर रीटा को गुदगुदा जाता तो हरामी रीटा मजे से दोहरी हो प्यार में अपने चूचों को राजू के सीने से रगड़ कर राजू के मुँह पर चुम्बन जड़ देती.

मैंने भी अपना सर झटका और तेजी से सीढ़ियां उतरता हुआ अपने घर आ गया।दिन भर इस घटना को याद करके मुझ में उत्तेजना भरती रही…. सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई. मैंने धीरे धीरे लण्ड मसल पर पिचकारियों का दौर समाप्त किया और अन्तिम बून्द तक लण्ड से निचोड़ डाली.

इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया. कि अनिरुद्ध का एक्सिडेंट हो गया है…अनिरुद्ध के हाथ पाँव टूट चुके थे उस दिन के बाद तीन महीने तक वो कॉलेज़ नहीं आया…!!!अब मेरा और वेदांत के रिश्ते में भी स्पष्टता आ गई… आखिर उसने अपने प्यार का इज़हार जो कर दिया था. मन्ने तो आप कोई जादूगर लगे हो… फिर से कहो तो…”आपका जिस्म जैसे तराशा हुआ है… कोई कलाकर की कृति हो, ईश्वर ने तुम्हें लाखो में एक बनाया है!”हाय छैलू! इक दाण फ़ेर कहो, म्हारे सीने में गुदगुदी होवै है.

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अन्तिम समय में बहादुर ने सांस रोक कर गाड़ी फुल स्पीड पर छोड़ दी- छकाछक! छकाछक! फिर चरम सीमा पर पहुँच कर बहादुर का लण्ड और भी फूल गया और भचाक भचाक से गर्म पानी के रेले छोड़ने लगा. ब्रा और पेंटी में मदमस्त नीना की इस अदा पर अमित का लंड कुछ ऐसे जोर मारने लगा, जैसे हरी घास देखकर सांड फुफकारने लगता है. ह…मैंने अपनी पिचकारी छोड़ी और उधर वो भी मुझे जोर से कसती हुए अपनी आँखें बंद करके बड़बड़ाने लगी- आ.

वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. झड़ने ही वाला था… तभी चौकीदार ने सर के चूतड़ों पर ज़बरदस्त डंडे बरसाए… सर का लण्ड बाहर निकल गया. कुंवारी लड़की का सेक्सआख़िर एक दिन मुझ को एक इमेल मिली जिसमें एक कहानी थी। मैं कहानियाँ नहीं पढ़ा करती थी, सिर्फ़ तस्वीरें देखने की शौक़ीन थी.

कि अचानक दरवाजे की घण्टी बजी।मैंने दरवाजा खोला तो सामने चार आदमी खड़े थे, एकदम तंदरुस्त और चौड़ी छातियाँ !फिर पीछे से पापा की आवाज आई- ओये मेरे जिगरी यारो, आज कैसे रास्ता भूल गये?वो भी हंसते हुए अन्दर आ गये और पापा को मिलने लगे…पापा ने बताया कि हम सब आर्मी में इकट्ठे ही थे.

पर रात भर मैं अपनी बहन की चुदाई के बारे में ही सोचता रहा कि वो कौन खुशनसीब होगा जिसे मेरी बहन की चूत को फाड़ने का मौका मिलेगा. मैं उन के वक्ष को सहलाते सहलाते उन्हें चूमने लगा, उनके गोरे गालों पर, गले पर हर जगह! माँ भी मेरा पूरी तरह साथ दे रही थी, वो भी मुझे चूमने लगी.

उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला। अब मैंने उसके चेहरे की तरफ़ अपना चेहरा किया और उसके थरथराते लाल रसीले लरज़ते होंठो पर अपने होंठ रख दिए। मैंने बहुत हल्के से उसके होंठों पर ‘चु. मैं बिहार प्रान्त के हाजीपुर जिले का रहने वाला हूँ। उम्र 25 साल होगी…काम के सिलसिले में लुधियाना अक्सर जाना रहता था! वहीं कुकरेजा साहब को नौकर की ज़रूरत थी तो सोचा क्यों न मैं ही लग जाऊँ! साहब का बड़ा कारोबार था! वो अक्सर विलायत में रहते थे और मेमसाहब हमेशा पार्टी क्लब में रहती थी! उनकी एक बेटी थी. उस चीज के लगते ही उसके मुँह से एक जोर की सिसकारी- ईईईईईईए आआआआआम्मं स्स्स्सीईईई निकल गई.

मनीषा वैसे तो बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी मगर उसमें बाकी लड़कियों की तरह घमंड बिल्कुल भी नहीं था.

मैंने तैराकी सीखने का मन बनाया और वेदांत ने कराटे… उसका कराटे सीखने का शौक तो एक ही हफ्ते में फुस्स हो गया. मैंने दोनों से बदला लेने की कसम खा ली।उसी शाम की बात है मैं छत पर गई तो उसी कमरे से सोमा के हँसने की आवाज आई…मैं फिर दबे पांव वहाँ पहुंची तो कमल की आवाज भी आई। मैंने खिड़की से झाँका तो मजा आ गया।सोमा ने अपने लहंगे को कमर तक चढ़ा रखा था और कमल खड़े खड़े अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था। दोनों मेरे बारे में बातें कर रहे थे।साली को मारने में बहुत मजा आता है” …स्स्स्स …. थोड़ी देर के बाद मैंने भाभी से पूछा- आपने कल ऐसा क्यों कहा कि कोई देख लेगा? क्या आपको इस पर ऐतराज नहीं था?तो वो बोली- मुझे पता है कि तुम और स्वाति पहले सेक्स कर चुके हो.

चूत में लंड वाली वीडियोभयंकर ऐतिहासिक चुदाई के बाद रीटा की प्यासी जवानी तरोतर हो उठी और वह कली फूल बन गई. मैंने कहा- आंटी, ऐसा मत करना!आंटी ने कहा- ठीक है, तो मुझे बताओ कि वो कौन है?मैंने कहा- वो मेरे कॉलेज में पढ़ती है!फिर मैंने कहा- आंटी, यह बात किसी को मत बताना!तो आंटी ने कहा- नहीं बताऊँगी पर तुमको मेरा एक काम करना पड़ेगा!मैंने कहा- कैसा काम? बोलो!आंटी ने कहा- जो तुमने उसके साथ किया है, वो मेरे साथ भी करने पड़ेगा.

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देखो ऑफ़िस के बाद जरूर आना, मैं इन्तज़ार करूंगी!” राधा ने अपनी विशिष्ठ शैली से इतरा कर कहा. ‘मेरा लण्ड भी तो प्यासा है कब से… प्यारी सी सोनू मिली है, प्यारी सी चूत के साथ…आह्ह्हऽऽऽ!’‘मैया री… लगा… और जोर से… हाय चोद डाल ना…मेरी चूची मरोड़ दे आह्ह्ह!’मैं उससे लिपट पड़ा और कस लिया लण्ड तेजी से फ़चा फ़च चलने लगा. प्रेम गुरु की कलम से …मैं जानता हूँ कोई भी लड़की हो या फिर औरत पहली बार गांड मरवाने में बड़े नखरे करती है और कभी भी आसानी से गांड मरवाने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होती। और फिर बुंदेलखंड की औरतें तो गांड मरवाने के लिए बड़ी मुश्किल से राज़ी होती हैं। खैर….

‘तो छबीली… अब चार पांच दिन आराम करो… दोनों के दरवाजे तो खुल गये है, फिर जोरदार चुदाई करेंगे. उसके बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और सोनम को एक बेड पर लिटा दिया और वो किया जो मैंने टी. फिर मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा तो उन्हें भी मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी.

पिस्स्स्स ! करती लगभग डेढ़ या दो फ़ुट तो जरूर लम्बी होगी।कम से कम दो मिनट तक वो बैठी सू-सू करती रही। पिस्स्स्स…. एक बार रात को मैं बाथरूम जाने के लिए उठी तो देखा मम्मी पापा के कमरे की लाईट जल जल रही थी, उत्सुकता से खिड़की की झिर्री से देखा कि मम्मी नंगी लेटी हुई हैं और पापा अपने लंड पर कंडोम चढ़ा रहे थे. )दीदी बोली- इसको बोलो, अपनी रानी को दर्द न दे, प्यार से धीरे धीरे करे न, तो रानी भी पूरा आराम से करने देगी।अभी भी मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि क्या दीदी अपनी योनि में जावेद का नौ इंची लिंग पूरा ले पाएगी? मुझे लगा शायद उत्तेजना की वजह से वो जावेद से ऐसी सेक्सी बातें कर रही होगी.

मैं उसकी तांगों के बीच में बैठ गया और उसकी चूत को चूमा और लंड को उसकी चूत पर रख दिया …. उसने चित्रा को बाहों में लेकर उसे बिस्तर पर लिटा दिया तो चित्रा बोली- अभी मैं थक गई हूँ!मगर योगी ने उसकी एक नहीं सुनी और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो वो दर्द के मारे चिल्ला उठी.

मैं जाते ही प्रिया भाभी के कूल्हों पर हाथ फेरने लगा तो प्रिया भाभी ने उसका जवाब हँसते हुए दिया और सीधा होकर मुझसे बातें करने लगी.

जिस वक़्त के वाकियात मैं आपको सुनाने जा रही हूँ उस वक़्त मेरी उम्र 20 साल की होने वाली थी यानि अपनी जवानी के इंतहाई हसीन मोड़ पर थी मैं, जब उमंगें जवान होती हैं, जब मन में किसी का डर नहीं होता और मुझ पर तो जवानी भी टूट कर आई थी. বেঙ্গলি হট সেক্স ভিডিওकाफी देर तक चोदने के बाद मैं सोनम की चूत में ही झड़ गया और सारा पानी चूत में ही निकल गया, थकान के मारे मैंने अपना मुँह सोनम के वक्ष पर रख दिया. సెక్స్.videosभाभी की चूत कुँवारी नहीं थी मगर फिर भी भाभी चिल्ला उठी और उनकी चूत से खून आने लगा. मैंने सोचा कि मुकेश ऐसे नहीं मानेगा, मैंने उसको जोर से धक्का दिया और नीचे गिरा दिया, अब मैं उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत को उसके लौड़े पर टिका अन्दर घुसा लिया.

?बहुत अच्छी लग रही हो ! तुम्हारे इस रूप को हमेशा के लिए अपनी आँखों में बसा लेना चाहता हूँ.

रंडी कह या सासू माँ, या चाची कह कर पुकार…मैंने तो जो सचाई थी तेरे सामने रख दी। एक रिश्ते से तो मैं तेरी सास ही हुई और दूसरे रिश्ते से तेरी सौत भी हुई। तू जो रिश्ता मेरे साथ निभाना चाहे तू निभा सकती है…. मैं बिस्तर के ऊपर चढ़ आया और चाची को बिना छुये हाथों के बल उनके ऊपर लण्ड तान कर उनके ऊपर बिना छुए निशाने पर आ गया. ठीक तीन साल पहले मैंने जवानी में बिल्कुल नया नया पैर रखा था, तभी से मेरा दाना फड़कने लगा था, जिस का कारण था केबल, हॉट वेब साइट्स अथवा अपनी उम्र से बड़ी लड़कियों के साथ मेरी दोस्ती! उनके घर जाती तो वो कंप्यूटर पर ब्लू फिल्में देख देख एक दूसरी की चूतें मसलती, मम्मे दबाती!दसवीं क्लास में मेरा पहला एफेयर बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले बबलू नाम के लड़के के साथ चला.

मुझे अब होश कहाँ! मैंने उसके चूतड़ अपने दोनों हाथों से दबा लिये और खुशी के मारे सिसकने लगी. ओफ़ सच्ची, बहुत गरम चूत है! उफ़ कितनी चिकनी है छोटी सी चूत! सच्ची बहुत तरसी हूँ इस प्यारी चूत के लिये मैं! दे दो न प्लीज अलीशा ये हसीन छोटी सी चूत मुझे!हाय कामिनी! मैं जल रही हूँ! प्लीज! आह! मैं क्या करूँ!मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था और मैंने कामिनी के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो वो तड़प उठी- ऊ. आज मैं आपको वो दास्तान सुनाने जा रही हूँ जो अपने अंदर और कई दास्तां छुपाए हुए है। मैंने अपनी ज़िंदगी में जो कुछ किया, जो पाया, जो खोया सब आपके सामने रखूंगी। यह मत समझिएगा कि यह कोई गमगीन दास्तान है.

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दैया री, इतना मोटा… मम्मी तो बहुत खुश हो जायेगी, देखना! और ये काली काली झांटें!” गौरी लण्ड को सहलाकर बोल उठी. वो अकेली है और रिवॉल्वर भी उसके पास नहीं दिख रहा ! वो साड़ी में है।मुस्तफा- अबे तू इन कमीनी पुलिस वालियों को नहीं जानता ! साली पैंटी में रिवॉल्वर रखती हैं ! चल एक काम कर ! अपने आदमियों से बोल की बीच सड़क पर मोना और उस दूसरी लड़की को नंगा करके उनका देह शोषण करके मेरे पास लेकर आओ।अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर आते रहिए … और मुझे मेल करें।. । झंडे बेटा, मैं पिछले छः सालों से किसी मर्द के लंड की भूखी हूँ। आज तेरा लंड पाकर तेरी चाची धन्य हो गई….

रीटा के गोरेपन और जवानी के कसाव कटाव से रीटा की पुष्ट उरोजों में गुलाबी और नीली गुलाबी नसें साफ दिखाई दे रही थी.

जिस तरह पहले उसने मेरा दिल तोड़ा था उसका भी टूटा… उस लड़की ने उसे साफ़ साफ़ कह दिया कि इस उम्र में भले ही एक आकर्षण मात्र.

कर रही थी, वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।मैंने उसको पूरी नंगी कर दिया वो बहुत ही सुन्दर दिख रही थी।मैंने उसके चूचों को चूसना चालू किया तो उसे और भी मजा आने लगा था। थोड़ी देर बाद वो बोली- मुझे तुम्हारा लंड चूसना है।मैंने तुरंत ही उसे 69 की अवस्था में आने को कहा वो तुरंत ही आ गई, वो मेरा लंड और मैं उसकी चूत चाटने लगा।उसके मुँह से फिर से सिसकारियाँ निकलने लगी- आ…ऊ…. मैंने देखा कि अंकल मम्मी को चूम रहे हैं और मम्मी उनको अपनी बाहों में लेकर किस करवा रही हैं. सेक्सी नंगी में?”तो तू कोई उपहार नहीं ला सकता था?”क्या इससे बेहतर कोई और उपहार हो सकता था तेरे लिए.

रात के तीन बज़े तक उधर संगीत चला, इधर चुदाई!इतने में उसने मुझे तीन बार चोदा, पहली चुदाई में ही तीन बार चुदी. मोना कहने लगी- हैरी, मुझे मालूम है कि तू उस समय भी जग रहा था जब मैं तेरा लण्ड चूस रही थी, फिर यह नखरा क्यों?मैंने कहा- पर आंटी!मोना ने कहा- पर-वर कुछ नहीं! मजे कर! मैंने भी बहुत दिनों से चुदवाया नहीं है, तुझे तो मालूम है तेरे अंकल इंडिया आते हैं, तभी वो चोदते हैं. वो थोड़ा सा चिल्लाई, मगर फिर अपने आपको सँभालते हुए उनके हाथों ने मेरे चूतडों को दबाना शुरू किया!उनकी इस हरक़त से मुझे काफी जोश मिला और मैंने झटके लगाने और तेज़ कर दिए.

करीब 10 मिनट बाद मैंने कहा- आंटी, मेरा निकलने वाला है!तो आंटी ने कहा- मेरे मुंह में झरो!तो मैंने अपना सारा पानी आंटी के मुंह में डाल दिया, आंटी सारा पानी पी गई और मेरे लंड को पूरी तरह से साफ़ कर दिया. मैं अपने आप को उनसे छुड़ाने का स्वांग करने लगी… क्या करूँ! करना पड़ता है ना… लोकलाज़ भी तो कोई चीज़ है ना! अह्ह्ह्ह वास्तव में नहीं… वास्तव में तो मैं चाह रही थी कि वो मेरा अंग अंग मसल डालें… मेरे ऊपर चढ़ जायें और मुझे चोद दें… पर हाय रे… इतनी हिम्मत कहाँ से लाऊँ… कि जीजू को ये सब कह सकूँ.

मैंने कहा- क्यों?उसने कहा- ऊपर से चाहे जो कर लो, पर अंदर नहीं!मैंने पूछा- क्यों? अंदर क्यों नहीं?तो उसने कहा- बस ऐसे ही!मैं ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने उसे कहा- मेरा लण्ड तो पकड़ ले!उसने पजामे के ऊपर से ही लण्ड पकड़ कर सहलाया.

तान्या ने मुझे कुछ देर इन्तजार करने के लिए कहा जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा मगर और कोई रास्ता ना होने के कारण मैंने इन्तजार करना ही ठीक समझा, मैंने सोचा चलो एक दिन की ही बात है. सामने वो खड़ा था… उसके हाथ में कुछ नहीं था… मेरा चेहरा थोड़ा उदास जरूर हुआ पर उसे करीब देख कर फिर भी मन में संतुष्टि थी…कहाँ है मेरा तोहफा?” मैंने आंखें बंद कर उसके सामने हाथ बढ़ा दिया…उसने मेरा हाथ हाथों में भर लिया. तो वो बोली- निकालो-निकालो! मैं मर जाऊँगी…तो मैंने कहा- चाँदनी, जब सब हो गया तो अब निकालने का क्या मतलब, अब तो तुम वो फिल्म वाली जैसे मज़े लो!और मैंने उठ कर उसको उसकी चूत में घुसा मेरा लौड़ा दिखाया तो उसको विश्वास नहीं हुआ कि मेरा पूरा का पूरा लौड़ा घुस चुका है.

देहाती लड़की की ब्लू फिल्म राहुल अंकल ने कहा- तेरी चूत से बहुत पानी निकला!हाँ मेरे राजा! बहुत दिनों से पानी नहीं निकला था! इसलिए आज बहुत पानी निकला! तू भी चाट ना मेरी बुर का पानी!इतना सुनते ही राहुल अंकल भी अपनी जुबान से बाजी की बुर का पानी चाटने लगे. ?’‘जी…वो…वो हम वॉल-पेंटिंग करते हैं।’‘तो…?’ उसने बेहद रूखे लहजे में जवाब दिया।‘आपके घर की यह दीवार पर हम लोग अपनी कम्पनी की पेंटिंग करना चाहते है अगर आपकी इजाज़त हो तो.

अब तो मुकेश के हाथो में मेरे दोनों बोबे आ गए वो उनको और जोर से मसलने लगा और बीच बीच में मेरे चुचूकों को नोचने लगा. कोमल ही एक स्त्री के रूप में मेरे सामने थी, वही धीरे धीरे मेरे मन में छाने लगी थी. वी पर स्टार माक्स पर एक इंग्लिश मूवी आ रही थी उसमें हीरो हिरोइन को चूम रहा था। तभी भाभी आ गई, उनको देख कर मैंने एकदम टी.

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चित्रा के साथ सेक्स करते हुए पकड़े जाने के बाद दीदी की आग शांत करने की जिमेदारी मेरे मजबूत लौड़े पर आ गई. मैंने उसे कहा कि मैं भी इसी समय ऑफिस से निकलता हूँ अगर आपकी फिर कभी बस मिस हो जाए तो मुझे कॉल कर दीजिएगा, अगर मैं ऑफिस में रहा तो आपको ले लूँगा. पूछने पर पता चला कि मनीषा और बुआ आज हमारे घर आ रहे थे क्योंकि मनीषा को लड़के वाले देखने आने वाले थे इसलिए भाभी ने छुट्टी ले ली थी.

मम्मी अपनी बात जारी रखते हुए : बेटा कौन से स्कूल में पढ़ते हो? कहीं ट्यूशन भी लगा रखी है क्या. जैसे ही वो कमरे में आई मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और बोला- कब से तुम्हरे लिए तड़प रहा था !उसने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया और चूमने लगी….

उसके स्तन देख कर सुनील के तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई … अब वो सोनिया के स्तनों ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था और सोनिया के मुँह से मादक कराह निकल रही थी … सोनिया अपना सर पलंग के दोनों तरफ मार रही थी.

यह प्रैक्टिस तो सिर्फ़ इसलिए कि तू शो में खुलकर एक्टिंग कर सके… अब चलो दो दिन तक मन लगा कर खान अंकल से एक्टिंग सीखो … बायखान सर- चलो अब तुम सुमित इसे ज़मीन में गिराकर एक ज़ोरदार किस करो!सुमित मुझे जमीन पर लिटा कर मेरे गालों को चूमता है …खान सर- साले किस मतलब जानता है…? होंठों पर दे चुम्बन … ठहर, मैं दिखाता हूँ. मामी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है!”मामी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”हाँ मामी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”मामी ने अपना काम चालू कर दिया था. 30 बजे अनारकली चुपचाप बिना कॉल बेल दबाये अन्दर आ गई और दरवाजा बंद कर दिया। मैं तो ड्राइंग रूम में उसका इन्तजार ही कर रहा था। एक भीनी सी कुंवारी खुशबू से सारा ड्राइंग रूम भर उठा।उसके आते ही मैं दौड़ कर उससे लिपट गया और दो तीन चुम्बन उसके गालों होंठो पर तड़ा तड़ ले लिए। वो घबराई सी मुझे बस देखती ही रह गई।‘ओह.

एक साथ दो लड़कों से चुदाई, आह्… कभी सपने में भी नहीं सोचा था, कि ऐसा स्वर्गिक आनन्द भरा सुख मुझे नसीब होगा. तभी मुझे माँ ने कहा- तेरी दीदी पेट से है और अब उसकी तारीख भी नज़दीक आती जा रही है, उधर समधन जी की घुटनों की तकलीफ बढ़ रही है, बेचारी अकेली क्या-क्या करेगी, तू ऐसा कर कि जितने दिन फ्री है, दीदी के घर चली जा!मैं पहले भी कभी-कभी वहाँ रुक लेती थी लेकिन अब मैं उस स्टेज में थी जहाँ अब मुझे जाना थोड़ा अजीब सा लगता था. जल्दी ही अपनी नई कहानी में बताऊँगा कि कैसे मैंने अपनी रंडी बहन को अपने दोस्तों का बिस्तर गर्म करने के लिए भेजा.

कुछ समय बाद मम्मी खाना पकाने के बाद आई और मुझसे कहा- घर पर ही रहना! मैं पड़ोस में जाकर आ रही हूँ!और वो घर से चली गई.

बीएफ देसी हिंदी फिल्म: अपना लंबा सा लण्ड मेरी चूत में डाले और मैं तस्वीरों वाली लड़कियों की तरह मज़े से उनसे चुदवाऊँ. बड़ी कड़क बनती थी? एक मिनट भी नहीं लगा नंगी होने में।मोना- तुझे अपने आदमियों पर बहुत गर्व है ना….

आंटी उठी और मेरी पैंट को उतार कर मेरे लंड को सहलाने लगी और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी. ”मेरा लौड़ा अब चोदने को बेताब हो उठा था लेकिन मुझे कुछ नहीं करना पड़ा, चाची ने मेरा एक हाथ पकड़कर नीचे रख दिया और कहा,” बेटा इसको सहला दे इसमें बहुत खुजली है !”तब मैंने कहा,” चाची जी यह तो बहुत गर्म है।”तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,”मुझे चाची मत बोल … या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो …. कुर्सी से बिस्तर तक जाते हुए लंड उसकी चूत में ही था। बेड के किनारे पर उसे लिटाकर उसके पैर मेरे कंधे पर लिए और फ़िर तो मैंने दस मिनट तक उसकी चूत का बुरा हाल किया.

मैंने अपने बाएँ हाथ की तरफ उसे लिटा लिया और उसके गाउन की डोरी खोल कर उसके गुम्बदों को बाहर निकाल लिया.

मैं उसकी गांड को दबाते हुए उसके होंठो पर झुका और उससे कहा- रागिनी मेरा होने वाला है. मरर गई… जान मैं…मैंने भी अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए और जोर जोर से हांफ़ने लगा…वो भी चिल्ला रही थी…हम दोनों को सर्दियों में पसीना आने लगा…करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर से उठ गया…मैंने कहा- जान मज़ा ही आ गया !वो बोली- अब तो और आएगा. कि अनिरुद्ध का एक्सिडेंट हो गया है…अनिरुद्ध के हाथ पाँव टूट चुके थे उस दिन के बाद तीन महीने तक वो कॉलेज़ नहीं आया…!!!अब मेरा और वेदांत के रिश्ते में भी स्पष्टता आ गई… आखिर उसने अपने प्यार का इज़हार जो कर दिया था.