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कुछ ही मिनट में वह दूसरी बार झड़ गई और वैसी की वैसी पलंग पर गिर गई।अबकी बारी मेरी थी. राजस्थानी हॉट सेक्स’मैंने इस मौके का फ़ायदा उठा कर फ़ौरन अपना हाथ आपी की गर्दन पर रखा और गर्दन जकड़ते हुए उनको थोड़ा और ऊपर को उठा दिया।आपी के ऊपर उठने से उनके सीने के नर्मोनाज़ुक लेकिन खड़े उभार मेरे सामने आ गए।मैंने एक लम्हा ज़ाया किए बगैर अपना सिर उठाया और उनके लेफ्ट उभार को अपने मुँह में भर कर अपने दाँतों से दबा दिया।आपी ने तड़फ कर एक अज़ीयतजदा ‘आअहह.

तो बड़ी गर्म जोशी से ‘हाय-हैलो’ होती थी।कुछ दिन बाद उनके पति अपने बिजनेस के काम से दुबई चले गए, वो बहुत अकेली हो गई थीं।अब जब भी वो बोर होतीं. कोटा कॉल गर्लऔर अपना नीचे वाला होंठ आपी के नीचे वाले होंठ से नीचे रख कर आपी के दोनों होंठों को अपने होंठों में पकड़ लिया और चूसने लगा।आपी के होंठ चूसने में इतना मज़ा आता था कि मैं घन्टों तक सिर्फ़ उनके होंठ ही चूसता रहूं.

आपके पास भी तो था न?रूपा भाभी- ये मैं तुम्हें सरप्राइज देने वाली थी और वैसे भी इस बहाने आपको दूसरी औरत के बोबे का मजा भी देना चाहती थी।मैं- भाभी.बीएफ पिक्चर सेक्सी वीडियो हिंदी: उसके दो रसीले आम देखकर मैं उन्हें मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा।साथ ही अपने एक हाथ से उसकी चूत को रगड़ने लगा।वो सिसकारियाँ लेने लगी।फिर उसने मेरी अंडरवियर उतारी और मेरे लण्ड को देखकर बोली- हाएए.

इसलिए इस बार देर तक बमफाड़ चुदाई के बावजूद मैं नहीं झड़ा था।नेहा दो बार और झड़ गई.वो आपको अगले भाग में लिखूँगा, आपके ईमेल का स्वागत है।कहानी जारी है।[emailprotected].

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फ्राइडे था। उस दिन का काम खत्म करने के बाद सुनीता मेरे आई और उसने शनिवार और रविवार की छुट्टी का आवेदन मुझको दिया।फाइव डे वीक होने के कारण शनि और रवि तो छुट्टी थी.और ये दुनिया थम सी जाए।थोड़ी देर में मेरा वीर्य भाभी की योनि में दौड़ रहा था!भाभी भी निढाल सी होकर लेट गईं।फिर भाभी ने कहा- बुझी आपकी प्यास?मैंने कहा- अभी तो बुझ गई.

आपी मुँह में लो ना प्लीज़।लण्ड छोड़ कर आपी ने ट्राउज़र को पकड़ा और नीचे करके फरहान के पाँव से निकाल दिया और फिर से फरहान का लण्ड हाथ में पकड़ कर खड़े होते हो बोलीं- अन्दर तो चलो ना. बीएफ पिक्चर सेक्सी वीडियो हिंदी आपको यकीन आए या ना आए पर है एकदम सच्ची।आपके विचारों का स्वागत है।मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी.

इससे ज्यादा मज़ा आएगा।आपी ने एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली और फिर फरहान को देखते हुए मुँह चढ़ा कर तंज़िया लहजे में उसकी नकल उतारते हुए बोली- आपी ऊपाल आ जाएं बाअला मज़ा आएगा.

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वो कमरे में आया। मैंने उससे बोला- हम लोग अभी ही डॉक्टर के पास चल रहे हैं. वो वहीं लेटा हुआ तड़पने लगा और अचानक मेरे सिर को पकड़ कर लंड मेरे मुंह में दे दियाऔर पूरा गले में घुसा दिया. मगर फ़िर भी मैं पूछने के लिए भाभी के पास किचन में चला गया।भाभी ने बताया- इतना सामान कमरे में नहीं आएगा.

मेरे साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करो और फ़ालतू के प्यार-व्यार के चक्कर में मत पड़ो।सोनिया- पर ऐसी लड़कियों को तो लड़के गलत कहते हैं?मैं- मैं नहीं मानता, हर किसी की शरीर की जरूरत होती है और उसे पूरा करने में कोई बुराई नहीं है।सोनिया- पर लड़के बड़े गंदे होते हैं. अब तो सिर्फ़ 2 पेपर बचे हैं।फरहान ने कहा तो आहिस्ता आवाज़ में ही था. तो मैंने उन्हें हटाया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चूत पर अपना लण्ड रख कर डालने लगा।मेरा लण्ड तुरंत उनकी चूत में चला गया और मैं उन्हें पोजीशन बदल-बदल कर चोदने लगा।देर तक की चुदाई के बाद मैं झड़ गया.

तो में भी अपना लण्ड आपी की रानों के दरमियान अन्दर तक ले जाता और फरहान लण्ड बाहर निकालता. पहले ही बता रही हूँ।यह बात कहते हो आपी की आँखें उस टाइम बिल्कुल बिल्ली से मुशबाह हो गई थीं और उन आँखों में बगावत का तूफान था. उन्हें क्या हुआ कि वो अपनी जगह से उठ कर हमारे पास आईं और अपने एक हाथ से डिल्डो को पकड़ा और दूसरा हाथ से मेरे कूल्हों को खोलते हुए डिल्डो का सिरा मेरी गाण्ड के सुराख पर रख कर अन्दर दबाने लगीं।आपी का हाथ छूते ही मेरे मुँह से एक ‘आहह.

जैसे मक्खन में छुरी। लंड अन्दर जाते ही उसने आराम की साँस ली।मैं लंड डालकर ऐसे ही उसके गुलाबी होंठों को चूसता गया और हाथों से उसके मम्मों की सहलाता रहा और निप्पल के साथ छेड़खानी करता रहा।कुछ मिनट में वो सामान्य हो गई और अपनी कमर हिलाने लगी, अपने नाखूनों से उसने मेरी पीठ में निशान भी कर दिए थे।थोड़ी देर में उसकी चूत इतना पानी छोड़ने लगी. तो मैंने और फरहान ने एक साथ ही आईने में देखा और बेसाख्ता ही मेरे मुँह से निकाला- ववऊओ.

तो मैंने उसे अपनी कसम दे दी कि आज वो मुझे अपनी चूत में लंड घुसाने दे।पहले तो वो बोली- दर्द होगा.

पहले आपट्रेन में मिली अंजान लड़की संग मस्तीऔरजबलपुर की ममता की अतृप्त वासनापढ़ चुके हैं।आप सबके सामने एक नई कहानी ले कर प्रस्तुत हूँ। दरअसल बात कुछ साल पहले की कुंवारे राहुल और कुंवारी कन्या पायल के बीच की है.

मेरी बात सुन कर आपी ने मेरी कमर पर मुक्का मारा और सीने पर हल्का सा काट लिया।आपी का एक हाथ मेरी कमर पर था और दूसरा हाथ हम दोनों के जिस्मों के दरमियान. मैं सीत्कार करते हुए चुदवा रही थी, मुझे दर्द के साथ मजा भी मिल रहा था।इस लम्बी चुदाई में मैं दो बार झड़ चुकी थी. तुम्हारा क्या पियूँगी।मैंने कहा- चुपचाप पीलो नहीं तो चूत में वापस डाल दूँगा और अन्दर ही पानी छोड़ दूँगा।उसने कहा- छोड़ दो अन्दर ही.

नहा लेने दे। रात में अपनी आग बुझा लेना।तो मैंने उनको छोड़ दिया और रात होने का इंतज़ार करते-करते उसी ब्रा में दो बार मुट्ठ मारी।रात में जब सब लोग सो गए तो एक बजे चाची धीरे से उठ कर मेरे कमरे में आ गईं. मेरे हाथों ने उसकी चूचियों को ग्रिप में ले कर दबाना-मसलना शुरू कर दिया।माधुरी की आवाज़ भी बढ़ने लगी- ओह्ह आअह्ह. चोदेगा मुझे?वो बोला- जैसी आपकी मर्ज़ी।मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। उसका शरीर दुबला-पतला था।मुझे बहुत उत्सुकता हो रही थी कि इतने दुबले-पतले लड़के का लंड इतना बड़ा कैसे हो सकता है।मैं उसके होंठों पर किस करने लगी। फिर मैंने उसके निप्पल पर किस किया।अब मैं धीरे-धीरे उसके बरमूडे तक पहुँच गई और उसका बरमूडा उतार दिया।उसका लंड उछल कर बाहर आ गया।मेरी आँखें हैरानी से चौड़ी हो गईं।आह्ह.

आपको कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताएं। मैं आगे भी कहानियाँ लिखता रहूँगा।आपका अपना निखिल शर्मा[emailprotected].

आज बहुत दिन हो गए हैं मैंने तुम लोगों को ये करते नहीं देखा।मैंने आपी की बात सुनी तो वहीं खड़ा हो गया और मुस्कुरा कर आपी को देखते हुए कहा ‘वो’ क्या आपी. आप समझ सकते हो।उसके आम ब्रा से बाहर आने को बेताब थे।मैंने उनको कैद से आजाद किया और अपने मुँह में डाल लिए।इधर मैं आम चूसे जा रहा था उधर उसकी गर्म सांसें तेजी से चल रही थीं।उसके बाद मैंने उसकी पैन्टी उतार फेंकी और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए।उसने आँखें बन्द कर रखी थीं और वो मेरा लण्ड देखना नहीं चाहती थी।फिर देर ना करते हुए मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने का प्रयास किया. उसने मेरा तौलिया भी उतार दिया। उसने एक हाथ से मुझे जकड़े रखा था और दूसरे हाथ से मेरा लण्ड सहला रहा था.

और आपी एकदम झटके से ऊपर को उठीं और फिर नीचे लेट गईं।उन्होंने मुझे रुकने का इशारा किया. मैं कम्प्यूटर पर ब्लू फ़िल्में देखता था।वो सब देख-देख कर उन दिनों मुझे सेक्स करने की इच्छा बहुत होती थी।जिस भी लड़की. हम दोनों बात करने लगे।फिर मैंने उसे किस करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे अपने हाथ उसके मम्मों तक ले गया।पहले हल्का सहलाने के बाद मैं थोड़ा ज़ोर से मसलने लगा।तो वो बोली- जनाब के इरादे नेक नहीं लग रहे हैं।मैंने कहा- जान.

फिर मैंने चूत का दाना अपने मुँह में डाला और किसी टॉफ़ी तरह चूसने लगा।क्या बताऊँ.

वो और मदहोश होती जा रही थी। मैं उसकी गर्दन पर चाटने लगा, वो जल-बिन मछली की तरह मचल रही थी और ऐसे ही मैं उसके बदन को साड़ी के ऊपर से चूमता रहा।तब मैंने उसकी साड़ी निकाल दी, अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी, क्या गजब लग रही थी।उसकी नाभि देखकर लग रहा था कि खा जाऊँ उसे!मैंने उसका पेट चूसना शुरू किया, मेरे स्पर्श मात्र से ही वो आहें भरने लगी थी।क्या कमाल का अनुभव था।जैसे ही मैंने उसकी नाभि को स्पर्श किया. लेकिन मैं कामदेव का नाम ले कर उसके चूचे पर हाथ रख ही दिया।भावना ने इस बार हँसी से मेरी तरफ देखा।मैं समझ गया कि भाई दाल काली है यहाँ पर.

बीएफ पिक्चर सेक्सी वीडियो हिंदी अब मैं क्या-क्या करता हूँ।वो कुछ नहीं बोली और देखती रही कि मैं क्या कर रहा था।अब उसे भी मजा आ रहा था। वह मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी थी।कुछ मिनट तक मैं उन्हें ऐसे ही चूसता रहा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसके बाद मैंने उसे लेटने को कहा वो लेट गई।मैंने उसकी चूत को देखा. ब्यान नहीं किया जा सकता।आपी की चूत अन्दर से इतनी गर्म हो रही थी कि मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैंने किसी तंदूर में अपना लण्ड डाला हुआ हो।उनकी चूत ने मेरे लण्ड को हर तरफ से बहुत मज़बूती से जकड़ रखा था।चंद लम्हें मज़ीद इसी तरह गुज़र गए.

बीएफ पिक्चर सेक्सी वीडियो हिंदी एक-दूसरे को ऐसा छूना क्या सही है? क्या हम दोनों को आगे बढ़ना चाहिए?मैं- देखो तुमको जो आनन्द मिला वो कैसा था. दोस्तो, आज मैं अपनी पहली कहानी लेकर आया हूँ। कहानी कहने या लिखने का कोई ज्यादा अनुभव तो नहीं है.

और मैं ऐसे ही लेटा रहा। मुझे डर लग रहा था कि कहीं भाभी मेरी शिकायत मम्मी पापा से ना कर दें। यही सोचते-सोचते पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।दिन के करीब बारह बजे भाभी ने मुझे जगाया और कहा- अब क्या सारा दिन ही सोते रहोगे? रात को तो ना तुम खुद सोते हो और ना ही मुझे सोने देते हो।तभी मुझे रात की घटना याद आने लगी.

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बस उनकी आँखों में शरारत नाच रही थी। आपी मेरी आँखों में ही देखते हो अपना मुँह खोल के मेरे लण्ड को मुँह में डालतीं. लगता है आजकल पूरा फिटनेस पर ध्यान दे रही हो।‘बस थोड़ा वजन कम किया है. ’ की आवाज़ के साथ अपने चरम को पा लिया।जहाँ एक तरफ पायल निढाल हो कर मेरी बाँहों में झूल गई.

यह बोल के मैं मॉम के पास गया और बोला- दोस्त की बहन मालिनी रात में अकेले जाने से डर रही है. उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।इस पोज़िशन में चोदते हुए कुछ समय हो गया था. मुझे अजीब सा लगा।मुझे पता नहीं क्या हुआ मैंने भी उसकी तरफ स्माइल दी।पर यह भी ज्यादा देर नहीं रहा, छुट्टी होते-होते हमारा वही पहले वाला झगड़ा शुरू हो गया।ऐसा ही चलता रहा.

और अपनी आँखें बंद कर लीं।मैंने धीरे से उनके गाउन के बटन खोले वो एकदम जन्नत की हूर लग रही थीं।पहले मुझे उनकी गुलाबी चूत के दर्शन हुए, उनकी गुलाबी चूत पर एक भी बाल नहीं था।फिर उनकी चूचियों के दर्शन हुए.

और फिर आहिस्तगी से उनका हाथ दोबारा अपने लण्ड पर रख दिया।आपी ने फिर हाथ हटाने की कोशिश की. पर ना जाने क्यों मीठा लग रहा था।वो मेरे मुँह को चोदे जा रहे थे और कुछ मिनट के बाद वो झड़ गए। मुझे अपने मुँह में उनका वीर्य एकदम मीठा लगा जैसे मैं लस्सी पी रही होऊँ।हय. नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विकी है, आज आपको मैं अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूँ।बात दो साल पहले की है.

गलत है।उस रात मैं आंटी के नाम पर मुठ मारकर सो गया।सुबह उठा और ड्यूटी चला गया और शाम को जब 5 बजे आया तो आंटी बोलीं- आज तुम्हें अच्छा खाना मिलेगा।मैं इतना सुनते ही और खुश हो गया आंटी की मोटी गाण्ड. मैंने पीछे से चुदाई करते हुए एक उंगली उसकी गांड में डाल दी जिससे वो एकदम चिहुँक पड़ी और बोली- आज सिर्फ चूत को सुकून दो, गांड अगली बार फाड़ना।मैं लण्ड को उसकी चूत में पूरा बाहर लेकर एकदम से अंदर डाल रहा था, जिससे उसको मजा आ रहा था।हमारे शरीर आपस में टकराने से फच्च फच्च फच्च…. पर परवाह किसको थी।मेरी स्टेनो सुनीता भी 6 बजे के लगभग चली जाती थी।सुनीता लगभग 32 साल की महिला थी, रंग कुछ गेंहुआ.

मेरे सामने ही अपनी गीली अंडरवियर-ब्रा और दूसरे कपड़े सुखाए।मेरी हालत खराब हो गई थी. नेहा- ये वीडियो शूटिंग मेरे काम की रसीद होगी और जब भी मेरा मन चाहेगा मैं आपसे चुदवाउंगी और मदद भी मांगूंगी।सभी ने हामी भर दी और शुरू हो गया चोदम-चुदाई का खेल।एक साथ दो-दो लण्ड नेहा की चूत में थे.

और उनके हाथ कुर्सी के आर्म्स पर रख दिए।फिर आईने में अपने आपको देखते हुए आपी से कहा- अब देखो आपी. जय ने 15 मिनट के बाद सारा पानी मेरी चूत के अन्दर डाल दिया।अभी सिर्फ यश बाकी था। उसने धीरे से लण्ड चूत में डाला और ज़ोर से धकेल दिया, पूरा लण्ड चूत में था, उसने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ानी चालू कर दी।तभी मेरा फोन बजा. पैंट खुलते ही मेरा लंबा लंड उसके सामने आ गया और मेरे बिना कुछ बोले ही रामा ने मेरे लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।रामा मेरा लंड ऐसे चूस रही थी.

जिससे आंटी की चूत चुदने की पोजीशन पर आ गई।अब मैंने अपना लण्ड आंटी की चूत पर रखा और लण्ड फिराने लगा।तभी आंटी बोलीं- अब और मत तड़पा मेरे राजा चोद मुझे.

जिससे मेरा शरीर भैया के नंगे शरीर को स्पर्श नहीं कर रहा था और भैया भी नाईटी के ऊपर से ही मेरे उरोजों को दबा रहे थे. उसके बाद कुछ देर टीवी देखती और फिर फ्रेश होकर रात का खाना बनाने में भाभी का हाथ बंटाती थी।उसके बाद खाना खाकर रात कुछ देर पढ़ाई करती और फिर सो जाती।धीरे-धीरे कॉलेज में कुछ लड़कियों से दोस्ती भी हो गई. वहाँ भी सारी गंदगी लगी है।यह कहानी एक पाकिस्तानी लड़के सगीर की जुबानी है.

इधर उधर की बातें करते हुए हमने खाना ख़त्म किया।अब्बू ने अपने पॉकेट में हाथ डालते हुए कहा- अरे हाँ सगीर. प्लीज जरूर बताइएगा। मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा।[emailprotected]बहन की चुदाई कहानी का अगला भाग :गरम माल दीदी और उनकी चुदासी चूत-2.

मेरा अगला टारगेट तो आपी की टाँगों के बीच वाली जगह है।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !फरहान ने छत को देखते हुए एक ठंडी आह भरी और बोला- हाँनन् भाई. इस पर दीदी भी कुछ नहीं कहती थीं।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !हमारी मस्ती ऐसे ही चलने लगी, मुझे भी इसमें बड़ा मजा आता था।एक दिन दीदी के सामने ही जीजू ने कहा- रोमा अब तो तुम्हारी भी शादी होगी. पर मैं इतनी उत्तेजित थी कि उससे कुछ बोल नहीं पा रही थी।मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।अब आलोक उठा.

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तुम्हें देखते ही तुम्हारी लेने को मन करता है।सुनीता- ओहो ये बात है.

मादरचोद कच्छे में आतंक मचाने लगा।वैशाली ने भी मेरा उठा हुआ मूसल देख लिया था।मैंने उसकी तरफ देखा साली ग़दर जवानी थी. और मुँह की गर्माहट ने मेरी उत्तेजना को जल्दी ही चरम पर ला दिया। मैं नीचे से कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगा।पायल भी तेजी से लण्ड को अन्दर-बाहर करने लगी।‘अह्ह्ह पायल मेरा निकलने वाला है. वो मुझसे चिपक जाती।मुझे भी मज़ा आ रहा था।अब मेरे दिल में उसके लिए ग़लत ख्याल आने लगे थे।आख़िर मैं भी एक लड़का हूँ.

मैंने आज तक ऐसा महसूस नहीं किया था।’मुझे लग रहा था कि ये सब गलत है उसकी शादी होने वाली है. बस मुझे एकटक देख रही थीं।एक बात हमेशा मेरे मन में रहती है कि तुम जिससे सेक्स करो तो मर्ज़ी से करो. राजस्थानी मारवाड़ी सेक्स वीडियो फिल्ममैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ और दो सालों से रोजाना इसकी कहानियां पढ़ता आया हूँ।आज मैं अपने ज़िन्दगी की उस हसीन घटना के बारे में बताऊँगा.

मेरा बाक़ी है अभी!उसने कहा- अब क्या गांड फ़ाड़ोगे?मैंने कहा- चलो साली जी, फटाफट लौड़ा मुँह में लेकर मेरा पानी पियो।उसने कहा- पानी तो मैं मोहित का भी नहीं पीती. ’मैं उसकी तरफ आँखें फाड़ कर देख रहा था कि छाया किस चीज के बारे में कहना चाहती थी।तभी छाया ने मुझसे कहा- अच्छा एक बात बताओ.

आज तो जी भरके आपकी चुदाई करूँगा।मैंने हँसते हुए उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों पर एक जोरदार चुम्मी दी। फिर मैंने उससे बोला- तू अभी तैयार हो जा. हालाँकि मैं जानता ही था कि वैशाली की चूत बहुत ही गर्म है और लण्ड की बेहद प्यासी है।वो मुझसे पहले भी कई लड़कों का लण्ड ले चुकी थी. बाहर आकर अपनी कमीनी साली का गिफ्ट ले लो।नीति की आवाज सुन विकास बाहर निकला।वो पूरी तरह से नंगा था और उसका लंड तना हुआ था।नीति उसे देख कर बोली- हाय जीजू.

वही एक शादीशुदा चुदी चुदाई चूत देती है। उसके जितना मजा कोई नहीं दे सकती है।अब वो सीधी होकर लेट गई और मैं उसके ऊपर आ गया था और अब मैं उसकी चूत के साथ उसके निप्पलों की भी खबर ले रहा था।कुछ ही देर में मेरा भी होने वाला था. मगर वो तो मुझसे काफ़ी आगे निकली हुई थी।मैंने पास पड़े तेल की शीशी उठाई और अपने लण्ड पर कुछ बूंदें लगाईं और उसे पूरे लौड़े पर मल लिया। फिर उसकी गाण्ड में डाला. वहाँ ज्यादा रोशनी नहीं थी इसलिए मुझे डर लग रहा था।एक बार मन किया कि वापस भाग जाऊँ लेकिन फिर उसके मोटे लंड को चूसने के ख्याल ने मुझे उस खंडहर के अंदर जाने पर मजबूर कर दिया.

पर आज मुझे वो ख्वाहिश पूरी करनी है।नेहा बोली- पर यार इस वक़्त?मैंने उसको थोड़ी देर तक मनाया.

जब उससे मन पसन्द चीज़ मिलने वाली हो। आपी की आँखें नहीं झपक रही थीं. तो ज़िंदगी भर पछताना होगा।मैं भी थोड़ा रुक गया और पायल के गाल को सर को बदन को सहलाने लगा, उसकी चूची को मुँह में भर कर चूसने लगा।पायल मुझको लगातार धकेल रही थी। वो मेरी गिरफ्त से निकलना चाहती थी।मैं- पायल बस हो गया.

जिससे भी मुझे बड़ा सुख मिल रहा था और मेरे लिंग ने पानी छोड़-छोड़ कर भाभी के पूरे योनि क्षेत्र को गीला कर दिया था। क्योंकि मेरा शरीर भाभी के नर्म मुलायम व गर्म शरीर का स्पर्श पा रहा था और मेरा लिंग भाभी की आग की तरह धधकती योनि पर रगड़ खा रहा था।मेरा लिंग भाभी की योनि पर तो था. उन्होंने मुझसे कहा- तुमने मुझे वादा किया था।मैं सोचने लगा और खुश भी होने लगा कि जिनके नाम का मैं मुठ मारता हूँ. तुम्हारी तरह गंदी नहीं हूँ।मैंने कहा- उस वक़्त तो आपको बुरा नहीं लग रहा था.

अभी तुम ये दूध पियो।मैंने जग को मुँह से लगाया और एक घूँट भरा, फिर आपी से कहा- आपी कमजोर तो आप भी हो जाओगी. अतः आप मुझको तंग न करें।इतना सुन कर सुनीता की आँखों में आंसू आ गए और उसने कहा- सर, काश मैं आपको बता पाती कि मेरी मज़बूरी क्या है।बार-बार उसने आग्रह किया कि मैं उसको अपने अंडर ले लूं. मगर वो ज़्यादा मोटा होने की वज़ह से अन्दर नहीं गया।इससे प्रिया के साथ-साथ मुझे भी दर्द हुआ.

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पैरों की पायल फोटो

सम्पादक जूजासुबह जब मेरी आँख खुली और कॉलेज जाने के लिए तैयार होने के लिए बाथरूम के पास गया. मुझे मज़ा आ रहा था। फिर जीजू मेरे पैरों के पास आकर लेट गए और मेरे पैरों पर गुदगुदी करके चूमने लगे।तभी मैंने अपनी चूत में से कुछ निकलता हुआ महसूस किया और जीजू को ये बताया. मगर मेरे कहने पर वो कुछ देर में मान गई।मैं उसे एक होटल में ले गया और उसके साथ कमरे में गया।जैसे कि मैं पहले से ही उसको चोदने का प्लान करके आया था, होटल के कमरे में जा कर मैंने दरवाजा बंद किया और फिर अंजलि को मैंने बाँहों में लेकर कहा- अंजलि मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत बेचैन था।दोस्तो.

इसमें बिल्कुल भी मसाला नहीं है। आप मेरा हौसला बढ़ाएं ताकि मैं आपको और भी कहानियाँ लिखता रहूँ।मेरी फेसबुक और ईमेल आईडी हैं।[emailprotected]. और उनके पति दस दिन पहले एक महीने के लिए दूसरे स्टेट गए हुए थे।टूर प्लेस पर एक जगह बहुत भीड़ थी और सभी लोग लाइन में जा रहे थे, हम लोग भी लाइन में लगे थे।थोड़ी देर बाद लाइन बढ़ी. राजधानी चार्ट नाईट वालीप्लीज़ इसे जल्दी से निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी आशू।मैंने उसकी एक ना सुनी और पूरा लण्ड उसकी नरम और गरम चूत में डाल दिया। मुझे कुछ गीला-गीला महसूस हुआ मेरे लण्ड पर.

’ गूँज रही थीं लम्बी सम्भोग क्रिया के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।हम दोनों एक साथ ही झड़े थे।जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसमें खून लगा हुआ था।उसके बाद हम दोनों ने बाथरूम में एक साथ स्नान किया.

मुझे पता नहीं।इस समय वो अपने एक हाथ से लगातार अपने मम्मों को दबा रही थीं।फिर वो बाहर चली गईं और ज़ोर-ज़ोर से अपनी पायल को बजाने लगीं। पास वाले कमरे का दरवाजा भी खटखटाया. तब मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है और उसको याद करके मुठ मार लेता हूँ।आज मुझे पता नहीं वो कहाँ है.

तुम यहीं रुक जाओ।सामने वाले दूसरे कमरे में जाते ही उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। उनका दरवाजा बंद होते ही अब मैंने सोनी और उसके होंठों को बुरी तरह से चूसने लगा।थोड़ी देर चुम्बन करने के बाद सोनी ने कहा- मैं मना नहीं कर रही हूँ. हम दोनों सोफे पर एक साथ बैठे हुए थे तभी मैंने एक शरारत की, मैंने उनका हाथ पकड़ कर कहा- बुआ, आज तो आप बड़ी कातिल लग रही हो और आज की पूरी पार्टी में आपसे सुन्दर कोई था ही नहीं. तुम दोनों ही मेरे भाई हो और भाई होने के नाते जितना फिर मुझे सगीर से है.

तो उनके पति का फ़ोन आया हुआ था। फोन पर उनकी सास बात कर रही थीं और वो पीछे से सुन रही थीं।थोड़ा अँधेरा हो गया था। उस समय हल्की ठंड सी हो रही थी.

वो अब झड़ने वाली थी, मैं उसको देर तक पेलता रहा, इस बीच वो 3 बार झड़ चुकी थी, मेरा भी अब गिरने वाला था, मैंने स्पीड और बढ़ा दी।मैंने कहा- मेरा होने वाला है. मेरे लण्ड को महसूस हो रही थी।उसके चेहरे पर पसीने की बूँदें मुंदी हुई आंखें. लेकिन तुम से मशवरा माँग रहा हूँ कि अगर उनसे शॉप ले ली जाए तो संभाल लोगे तुम?मैंने अब्बू की बात सुन कर चंद लम्हें सोचा और फिर मज़बूत लहजे में जवाब दिया- अब्बू आप मेरी तरफ से बेफ़िक्र हो जाएँ.

मराठी सेक्सी बायाक्या मुझे सारी उम्र ऐसे ही रो रो कर जीना है?दोस्तो, ललित सिर्फ अकेला ऐसा गे नहीं है जो इस तरह की प्रताड़ना का शिकार हुआ है. मुझे सुबह जल्दी उठकर मम्मी-पापा के लिए खाना भी बनाना है।मैंने मना कर दिया।भाभी ने कहा- तो ठीक है.

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हम अपने रूम पर वापस भी आ गए थे।अभी तक उसने मुझसे कुछ भी नहीं माँगा तो मुझे लगा कि शायद वो मज़ाक ही कर रहा था।उस दिन वैशाली भी हमारे साथ ही रूम पर आई थी, मैं भरपूर उत्तेजक मूड में था। पहले भी मैं कई बार वैशाली से सेक्स कर चुका था. मैं समझ गया कि अब उसको मज़ा आ रहा है।कुछ मिनट तक मैं उसको उसी पोजीशन में चोदता रहा।उसे भी मजा आ रहा था. लेकिन पिछले साल गर्मीयों में जब मैं और आप बाजी के घर 10 दिन रहे थे.

अब तक आपने पढ़ा था कि भाभी मुझे छेड़ने लगी थीं और मैं संकोच में कुछ कह भी नहीं पा रहा था।सुबह मेरी भाभी से बात तक करने कि हिम्मत नहीं हुई और मैं चुपचाप स्कूल चला गया।जब मैं स्कूल से वापस घर आया तो देखा कि मेरा सारा सामान ड्राईंग रूम से गायब था। मैंने बाहर जाकर देखा तो भाभी किचन में खाना बना रही थीं. फिर अगले दिन मैंने खुद को अच्छे से तैयार किया और अपने को पूरा साफ किया। आप लोग ‘साफ करना’ मतलब तो समझ ही गए होंगे. बहुत मोटा है।वो रोने लगी और दर्द से उसका बुरा हाल हो गया।मैं कुछ देर उसके ऊपर बिना हिले लेटा रहा, फिर एक और ज़ोर का झटका दिया.

’ की हल्की-हल्की सिसकियाँ फूटने लगीं।मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था. क्योंकि भाभी की नाईटी के बटन खुले हुए थे और ब्रा भी ऊपर हो रखी थी। मेरा हाथ भाभी के अधनंगे नर्म मुलायम उरोजों को छू रहा था।भाभी के रेशमी उरोजों के स्पर्श ने मुझे पागल सा कर दिया। मुझे डर तो लग रहा था मगर फ़िर भी मैं भाभी के उरोजों पर हाथ को धीरे-धीरे फ़िराने लगा। काफ़ी देर तक मैं ऐसे ही भाभी के उरोजों को सहलाता रहा. तो मैं मान गया।दीदी उठीं और मेरी सोफे पर आकर मेरे ऊपर बैठ गईं।दीदी- मैं कैसी लगती हूँ?मैं- यह आप क्या पूछ रही हैं?दीदी- मैंने जितना पूछा.

पर अब तो उनकी चूचियां बड़ी हो गई थीं और गाण्ड भी बहुत ज्यादा बाहर निकल आई थी।उनके साथ में एक लड़की भी थी. मैंने उसे बताया कि रसोई में सब सामान है जाकर देख लो और चाय बना दो।वो चाय बनाने के लिए रसोई में जाने के लिए जैसे ही वो पलटी.

इसलिए मैं ज़्यादातर दोपहार के बाद घर पर ही होता था।भैया का डेली रुटीन सुबह 7.

अब इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मैं अपने लण्ड को आप से छुपाऊँ या नहीं. मेला फुल मूवीलेकिन ज़बरदस्ती नहीं।उनको पता था कि मैं अक्सर उनसे मज़ाक किया करता हूँ और उन्हें आँख भी मारा करता हूँ।वो मुझे हमेशा बोला करती थीं कि ‘क्या आप पागल हो गए हैं. मराठी सेक्स स्टोरीजअब अगर अन्दर भी डाल दूँ तो क्या फ़र्क़ पड़ता है।‘बहुत फ़र्क़ पड़ता है इससे सगीर. आज फ़िर आपके सामने अपनी एक नई कहानी लेकर हाज़िर हूँ।मैं एक युवा लड़का हूँ और अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर रहा हूँ।मेरी पिछली कहानीमैं.

पर वो चुदने के बाद आराम से सो गई थीं और उनका कम्बल भी छोटा था, उनके कम्बल में दो आदमी नहीं सो सकते थे.

तो मुझे मेरी बेस्ट फ्रेंड अंजू का हरिद्वार से फोन आया कि अगले रविवार को मेरी शादी है और तुमको जरूर आना है।मैंने उसे मना कर दिया ये कह कर कि ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलेगी। वो नहीं मानी. फिर तो मैं उन्हें खूब जम कर चोदूंगा।लाली मौसी ने मेरी कमर में टाँगें लपट लीं और अपने पैर की एड़ियों से अपने चूतड़ को धक्का देने लगीं।अब मैंने मौसी की चूचियाँ पकड़ कर लण्ड को सुपारे तक बाहर निकाल के जड़ तक अन्दर पेलना शुरू कर दिया।मौसी की चूत इतनी ज़्यादा गीली थी कि पूरे कमरे में मौसी की चूत से ‘फ़च. तो खुलकर रोहन साथ दे रही थी।मैंने देखा कि उसका लण्ड फिर से खड़ा हो चुका था।अब रोहन ने मेरे मम्मों को चूसना बंद किया और मुझसे बोला- मम्मी आपके बूब्स तो बहुत टाइट और मीठे हैं।इतना बोल कर वो फिर से मेरे मुँह के पास अपना मुँह लेकर आने लगा.

अब मेरी हिम्मत भी थोड़ी खुल गई थी- भाभी ऐसा दिखाओगी तो कोई भला नहाने में समय क्यों गंवाएगा?भाभी- ठीक है. आज जो चाहे कर लो।मैंने भी वक़्त को समझा और झट से दरवाजा बन्द करके भाभी से लिपट गया, पूरे चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी और उनके होंठों पर आकर रुक गया।होंठों से होंठ मिले. तो और क्या कहते हैं?’‘तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है क्या मौसी?’ मैंने आधा लण्ड बाहर निकाल कर फिर जड़ तक पेलते हुए कहा।‘आऐयइ.

हरी दुल्हन

तो मैंने नज़र उठा कर आपी के चेहरे की तरफ देखा तो वो खिलखिला कर हँस पड़ीं, उनकी आँखों में इस वक़्त शदीद शरारत नाच रही थी।आपी को हँसता देख कर मैंने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि आपी हँसी को ज़बरदस्ती रोकते हो बोलीं- अच्छा अच्छा सॉरी. तो उनका लण्ड फिर से खड़ा हो गया था। जीजू ने मेरी कमर को पकड़ा और अपना लण्ड एक बार फिर से मेरी चूत में घुसा दिया।फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़े और जोर-जोर से मुझे चोदने लगे।मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती।यह लिखते हुए भी मेरी चूत बिल्कुल भीग चुकी है और मैं अपनी चूत को सहला रही हूँ।उधर मेरी चूत ने भी अब जवाब दे दिया था. मैंने उसकी चूत को देखा जो कि एकदम गीली थी और उसका पानी बाहर तक निकल रहा था।मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड रखा और बोला- अंजलि रेडी हो.

तो उसने दरवाजा खोला… वो बहुत प्यारी लग रही थी। उसका बदन भरा भरा सा था और उसने डार्क ब्लू कलर का टाइट ड्रेस पहना था.

उन्होंने मुझसे कहा- तुमने मुझे वादा किया था।मैं सोचने लगा और खुश भी होने लगा कि जिनके नाम का मैं मुठ मारता हूँ.

मुझे बहुत ज़ोर का दर्द हुआ, मेरी जान निकल गई और मैं उसे रोकने लगी- आहऽऽ राजू. मैं फ्रेश हो कर नीचे आया तो सब ही खाना खा चुके थे और अब्बू हस्बे-मामूल टीवी लाऊँज में ही बैठे न्यूज़ देखते हो चाए पी रहे थे।मैं खाने के लिए टेबल पर बैठा और खाना शुरू किया ही था कि अब्बू ने मेरा थका हुआ चेहरा देख कर कहा- बेटा तुम कॉलेज से 2 बजे तक तो शॉप पर पहुँच ही जाते हो. सेक्स फिल्म अंग्रेजी वीडियोतो वह फिल्म देख रही थी।इतने में उसमें सेक्सी सीन आ गया और करीना कहने लगी- क्या गन्दा सीन है.

मुझे अजीब सा लगा।मुझे पता नहीं क्या हुआ मैंने भी उसकी तरफ स्माइल दी।पर यह भी ज्यादा देर नहीं रहा, छुट्टी होते-होते हमारा वही पहले वाला झगड़ा शुरू हो गया।ऐसा ही चलता रहा. पर उतनी नहीं कि टोपा घुस जाए।मैंने थोड़ा पीछे होकर हल्का सा झटका मारा. जैसा कि बचपन में मेरे सामने नंगा रहता था।उसका लण्ड अभी पूरी तरह से खड़ा नहीं था.

बहुत मज़ा आ रहा था।मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?उसने कुछ नहीं बोला. दर्द हो रहा है।मैंने लंड निकाल कर थोड़ी सी कोल्ड क्रीम उसकी चूत पर और उंगली से थोड़ी चूत के अन्दर भी लगाई.

तो मुझे उन दोनों की आवाजें सुनाई देने लगीं।भैया कह रहे थे कि 3 दिन बाद आया हूँ.

अन्दर से सविता चाची ने पूछा- कौन है?नफ़ीसा आंटी ने बोला- मैं हूँ नफ़ीसा।सविता चाची ने पूछा- अकेली हो या और कोई है?नफ़ीसा ने बोला- सिर्फ़ मैं ही हूँ।इसके बाद मेहता आंटी ने गेट खोला लेकिन वो नज़ारा देखने लायक था। क्योंकि मेहता आंटी नंगी ही बाहर आ गई थीं। नफ़ीसा और मेहता आंटी आपस में गले मिलीं। मुझे इस ही मौके का इंतज़ार था. ’आपी ने उसके लण्ड को मुँह से निकाल कर एक गहरी नज़र उसके चेहरे पर डाली और फिर बिना कुछ बोले दोबारा लण्ड को मुँह में लेकर अन्दर-बाहर करने लगीं और 5-6 बार अन्दर-बाहर करने के बाद ही लण्ड पूरा जड़ तक आपी के मुँह में जाने लगा।फरहान का जिस्म काँपने लगा था. क्योंकि मैं उनके फ्रेंड की तरह था। वो बहुत खूबसूरत थीं और उनकी उम्र मात्र 23 साल की थी। इसी वजह से मैं उन्हें बहुत लाइक करता था।मेरे दिल का हाल शायद मेरी मामी जानती थीं.

बीपी पिक्चर भोजपुरी जिससे मेरी जीभ उसकी चूत में जाने लगी और मैं उसको अपनी जीभ से ही चोदने लगा।काफ़ी देर करने के बाद उसकी चूत से नमकीन पानी निकलने लगा. मैं लेटे हुआ मोबाइल पर फन्नी वीडियो देख रहा था और वो मेरे पैर के पास बैठी हुई थी।मैंने उसे अपने पास बुलाया और बोला- आराम से पैर फैला लो।वो मेरे पास आ गई तो मैंने करवट ले ली।मैंने उससे पूछा- तुम्हें बच्चों की मूवी अच्छी लगती हैं?तो उसने बोला- आप क्या देख रहे हैं?मैंने कहा- फन्नी वीडियोज.

जलगाँव ब्वॉय का आप सभी को प्यार भरा प्रणाम।नए पाठकों को मैं अपना परिचय दे देता हूँ। मेरा नाम अवि है. क्योंकि मैंने बहुत मज़बूती से उनके कूल्हों को नोंच कर चीरने के अंदाज में पकड़ रखा था. पर मैं छूट नहीं पाई, मेरी आँख से लगातार आँसू बह रहे थे।कुछ देर वो उसी स्थिति में लेटा रहा और मेरी चूची दबाता रहा।फ़िर उसने धीरे-धीरे अपना पूरा लण्ड मेरी बुर के अन्दर कर दिया।उसका लण्ड मेरी चूत के खून से लाल हो गया था।कुछ देर बाद जब मैं थोड़ा सामान्य हो गई तो उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। पहले तो धीरे-धीरे चोदा.

चूहा का फोटो

पिछले भाग में आप सभी ने जाना था कि मेरी बड़ी साली मुझसे चुदने को राजी थी. तब मैं बताऊँगी कि क्या करना है।अब तो मैं ख़ुशी के मारे एकदम पागल हो रहा था. इसमें डुबकी लगाना बाकी है।वो दोनों मेरी बात सुनकर हँस पड़ीं और भाभी बोलीं- तो जल्द ही लगा लेना लाला.

मेरी कमर की दोनों तरफ में आपी के घुटने ज़मीन पर टिके हुए थे और वो मेरे हाथों पर अपने हाथ रखे. और इस रात को इस रात के हर पल को मैं तुम्हारे साथ यादगार बनाते हुए अपनी आँखों में बसा लेना चाहता हूँ।यह कह कर मैंने उसके कुछ कहने के पहली अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर चुम्बन करना शुरू कर दिया।पायल ने थोड़ी देर में मेरे चुम्बन जवाब चुम्बन से देना शुरू कर दिया।धीरे-धीरे मैं उसके पूरा ऊपर आ गया और हम दोनों के बीच जबरदस्त चुम्बन का दौर शुरू हो गया। मैं कभी निचला तो कभी ऊपर वाला होंठ चूसता.

जो ये अभी तक गीली है?रोहन बोला- मम्मी कल रात से मैं आपको याद कर करके चार बार मुठ मार चुका हूँ। जब पापा आपको चोद रहे थे उसी टाइम मैंने दो बार आपकी पैंटी में मुठ मारी और फिर कमरे में आकर भी लौड़ा हिलाया। मेरा बहुत मन कर रहा था आपको चोदने का.

जब मैं 12 वीं क्लास का एग्जाम दे कर गर्मियों की छुट्टी में दादी के पास गाँव गया हुआ था।वहाँ पड़ोस में एक भाभी रहती थीं. मैं यहाँ ही हूँ आपके पास!तो आपी ने कहा- सगीर, अब कैसे बर्दाश्त करूँ मैं. ’ जैसी आवाज़ निकाल रही थी।मैं थोड़ा रुक गया तो माधुरी बोली- रुक क्यों गए.

मैंने लहंगे का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार कर दूर कर दिया।फिर मैं उनके मस्त रसीले मम्मों को चूसते-चूसते उनकी पैन्टी के ऊपर से चूत को भी सहला रहा था। वो मदहोश हो रही थीं।मैं अब नीचे को आने लगा. बस मुझे एकटक देख रही थीं।एक बात हमेशा मेरे मन में रहती है कि तुम जिससे सेक्स करो तो मर्ज़ी से करो. मुझे देर हो रही है।मैंने जल्दी से भाभी को नीचे घुटने के बल बैठा दिया और लण्ड को नेहा को चूसने को कहा.

’ बाबा जी जानवरों जैसे गुर्रा रहे थे।मैंने लिंग को कप से थोड़ा बाहर खींचा, अभी भी वह वीर्य के मोटे-मोटे लौंदे उगल रहा था। कुछ और मिनट आखिरी बून्द टपकाने के बाद जब लौड़ा ढीला हुआ तब तक कप उनके माल से थोड़ा भर गया था।बाबा जी ने मुझे कप को घूरते हुए देखा फिर धीरे से आगे बड़े और उसी टेबल से उन्होंने चम्मच को उठा लिया। बाबा जी मुझे पीठ के बल लिटा कर मेरी बगल में गए।‘जग्गो.

बीएफ पिक्चर सेक्सी वीडियो हिंदी: जो एक-दूसरे के साथ अपने पार्टनर्स की अदल-बदल करके उनके साथ सेक्स का मज़ा लूटते हैं।वैसे तो हमारी सेक्स यात्रा के बहुत ही चटपटे और उत्तेजक किस्से हैं. पर बार-बार लण्ड फिसल रहा था।उसने अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पर सैट किया और धक्का लगाने को कहा।मैंने जैसे ही धक्का लगाया.

तो हमारी शक्ल देख कर हँसते हुए बोलीं- अपने मुँह तो बंद कर लो ज़लीलो. आपी की हालत अब बहुत खराब हो रही थी और वो अपने सिर को राईट-लेफ्ट झटके देते हुए दबी-दबी आवाज़ में ‘आहें. और रात का इंतज़ार करने लगा।उस रात के लिए अपने रूम मेट को एक दोस्त के कमरे पर भेज दिया।भाभी के साथ चुदाई की सोच कर मैंने एक बार उनके नाम पर मुट्ठ भी मार ली।रात 11 बजे बड़े भाई आ गए और 12 बजे तक उनके घर में अँधेरा हो गया मतलब सब लोग सो चुके थे।छोटी भाभी अकेली थी.

माधुरी मेरे सामने नग्न हो चुकी थीमैंने भी अपनी पैन्ट उतारी और उसके ऊपर लेट कर उसको चुम्बन करने लगा।माधुरी का बदन ढीला पड़ने लगा, वो भी मुझको चुम्बन कर रही थी।हम दोनों एक-दूसरे की जीभ को चूस रहे थे। मैंने उसके बेपरवाह होने का फायदा उठाया और अपना हाथ उसकी जांघों के बीच में दे दिया, फिर थोड़ा नीचे आ कर उसकी चूची को मुँह में भर कर चूसने लगा।माधुरी मेरे दो तरफ़ हमलों से पागल हो रही थी।वह जोर-जोर से ‘अह.

कोई 18 साल की कमसिन लड़की की चूत हो।फिर भी मैंने उसकी चूत के मुहाने पर तेल लगा दिया. तो दूसरे हाथ से उसके चूतड़ों पर स्केल से जोर-जोर से बराबर मार रहा था।मार से उसके चूतड़ लाल पड़ गए थे और निशान भी बन गए थे।फिर दीप को सीधा करके मैं अपना लंड उसके मुँह में डालकर उसका मुँह चोदने लगा।इस बीच मैं उसको थप्पड़ भी बराबर मार रहा था, दर्द उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था, पूरा चेहरा सुर्ख पड़ गया था।ऐसा करने में मुझे कितना आनन्द आ रहा था. लेकिन इस बात का ख़याल रखा कि उंगलियाँ ज्यादा गहराई में ना जाने पाएं।आपी का जिस्म अकड़ गया था और उन्होंने अपने कूल्हे बेड से उठा लिए और फरहान के लण्ड को पूरी ताक़त से अपनी तरफ खींच लिया।उसी वक़्त फरहान के मुँह से ‘आहह.